Jharkhand Students Protest : झारखंड छात्र आंदोलन पर सीएम हेमंत सोरेन की अपील, सरकार ने संवाद का दिया भरोसा

झारखंड में छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से संयम बरतने और संवाद के रास्ते समाधान निकालने की अपील की है। राज्य सरकार ने छात्रों की मांगों पर बातचीत का भरोसा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि वार्ता से आंदोलन को लेकर क्या नया रास्ता निकलता है।

Jharkhand Students Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 7, 2026

Jharkhand Students Protest :  झारखंड विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में जारी छात्र आंदोलन को लेकर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से समझती है और उनका समाधान बातचीत के जरिए निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और सरकार उनकी बात सुनने के लिए सकारात्मक रवैया अपनाए हुए है।

बातचीत के लिए सरकार तैयार, छात्रों से मांगी स्पष्ट राय

मीडिया से बातचीत में हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार ने संवाद के लिए पहले से एक व्यवस्था बनाई हुई है और उसी माध्यम से छात्रों के साथ चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार यह जानना चाहती है कि छात्रों की वास्तविक समस्याएं क्या हैं और वे किन मुद्दों पर समाधान चाहते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, बातचीत का उद्देश्य केवल विवाद समाप्त करना नहीं बल्कि युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप स्थायी समाधान तैयार करना है।

युवाओं के सुझावों के आधार पर होगा बड़ा सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार केवल आंदोलन में शामिल छात्रों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे राज्य के युवाओं की राय भी जानना चाहती है। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे बिना किसी संकोच के अपने सुझाव सरकार तक पहुंचाएं। हेमंत सोरेन ने भरोसा दिलाया कि प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर भर्ती व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएंगे, ताकि भविष्य में युवाओं को पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था मिल सके।

आंदोलन 14वें दिन भी जारी, देर रात तक चली वार्ता

राज्य में छात्रों का आंदोलन लगातार 14वें दिन भी जारी रहा। गुरुवार देर रात करीब 10:45 बजे प्रशासन की ओर से एसडीओ और एसडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की कोशिश की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार केवल छात्र प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक वार्ता करना चाहती है, ताकि बातचीत व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सके।

प्रतिनिधिमंडल को लेकर नहीं बनी सहमति

हालांकि, छात्र अपने पहले से घोषित 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पर कायम रहे। आंदोलनकारी छात्रों की मांग है कि इस प्रतिनिधिमंडल में छात्र नेताओं के अलावा एक पत्रकार और एक अधिवक्ता को भी शामिल किया जाए, जिससे पूरी वार्ता पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे। देर रात तक दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन प्रतिनिधिमंडल की संरचना पर सहमति नहीं बनने के कारण कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक (पीटी) परीक्षा को रद्द करने की है। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुई हैं और निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। छात्रों का कहना है कि यदि परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही है तो इसे निरस्त कर दोबारा आयोजित किया जाना चाहिए, ताकि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके।

सीआईडी जांच पर छात्रों ने जताया अविश्वास

राज्य सरकार ने परीक्षा से जुड़े आरोपों की जांच सीआईडी को सौंप दी है, लेकिन आंदोलनकारी छात्र इस जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई से कराई जानी चाहिए, ताकि निष्पक्षता पर किसी तरह का संदेह न रहे। छात्रों का मानना है कि केवल स्वतंत्र जांच ही पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।

भर्ती प्रणाली में व्यापक बदलाव की भी मांग

प्रदर्शनकारी छात्रों ने केवल मौजूदा परीक्षा को लेकर ही नहीं, बल्कि भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं में भी सुधार की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे पेपर लीक, कथित धांधली और चयन प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों पर पूरी तरह रोक लग सके। छात्रों का मानना है कि भर्ती प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से सुरक्षित और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि केवल जांच कराना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

संवाद और समाधान पर टिकी निगाहें

फिलहाल झारखंड में छात्र आंदोलन और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता खुला हुआ है, लेकिन प्रतिनिधिमंडल को लेकर बनी असहमति के कारण समाधान अभी दूर दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सुधार और संवाद का भरोसा दिया है, जबकि छात्र अपनी प्रमुख मांगों पर अडिग हैं। अब आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली वार्ता पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

Read More  :  Parliament Session : संसद में अगले हफ्ते कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, सभी सांसदों को तीन लाइन व्हिप जारी