Iran US War : अमेरिका और ईरान के बीच जारी लंबे युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बड़ा बयान दिया है। Reuters को दिए एक विशेष इंटरव्यू में वेंस ने कहा कि किसी भी समझौते के लिए ईरान को अपनी परमाणु यूरेनियम संवर्धन क्षमता में पर्याप्त और वास्तविक कमी करनी होगी। उनके मुताबिक, केवल भविष्य में परमाणु कार्यक्रम सीमित करने का वादा अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
वेंस बोले- सिर्फ वादे नहीं, जमीन पर कार्रवाई जरूरी
जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान से ठोस कदम की अपेक्षा कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाने का इरादा नहीं रखता, तो उसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित ईंधन की जरूरत क्यों है। वेंस के अनुसार, ईरान को अपने परमाणु संवर्धन ढांचे में ऐसा बदलाव करना होगा, जिससे उसके दावे पर भरोसा कायम हो सके।

युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत में अड़चन
अमेरिका और ईरान के बीच हाल के हफ्तों में युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हालांकि, वेंस के मुताबिक दोनों पक्षों की मांगों में अभी भी बड़ा अंतर है और बातचीत को आगे बढ़ाना आसान नहीं है।
ईरान की परमाणु नीति बनी मुख्य विवाद
ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जुड़ा बताता रहा है और परमाणु संवर्धन के अधिकार को अपनी महत्वपूर्ण मांग मानता है। Reuters के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की मांगें और ईरान की शर्तें अभी एक-दूसरे से अलग हैं। ईरान ने यह भी कहा है कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू होने से पहले उसकी कुछ शर्तों को स्वीकार करना होगा।
वाशिंगटन को ईरान के फैसले लेने वाले तंत्र पर सवाल
बातचीत की एक बड़ी मुश्किल ईरान के सत्ता तंत्र को लेकर अमेरिका की अनिश्चितता भी है। वेंस ने कहा कि अमेरिका ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से संपर्क में है, लेकिन वाशिंगटन को यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि ईरान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में अंतिम निर्णय किस स्तर पर लिए जा रहे हैं।

ईरान ने अमेरिकी दावे को बताया गलत
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने अमेरिका की इस धारणा को खारिज किया है कि वाशिंगटन को ईरान की निर्णय प्रक्रिया की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि समस्या ईरान के निर्णय तंत्र में नहीं, बल्कि अमेरिकी अधिकारियों के अलग-अलग बयानों और बदलते रुख में है। इससे दोनों देशों के बीच बातचीत में अविश्वास की स्थिति और स्पष्ट होती है।
युद्ध की आर्थिक कीमत भी बढ़ी
ईरान-अमेरिका युद्ध का असर केवल कूटनीति और सुरक्षा तक सीमित नहीं है। संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है। Reuters के मुताबिक, अमेरिकी अभियान की लागत करीब 3 अरब डॉलर प्रति माह बताई जा रही है। इसके साथ ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी ने अमेरिकी प्रशासन पर घरेलू राजनीतिक दबाव भी बढ़ाया है।

ट्रंप प्रशासन के लिए राजनीतिक चुनौती
नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान युद्ध राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक मुद्दा बन गया है। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और युद्ध की लागत को लेकर मतदाताओं की चिंता प्रशासन के सामने चुनौती पेश कर रही है। वेंस चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप की ईरान नीति का बचाव करते भी नजर आ रहे हैं।
आगे क्या होगा?
वेंस ने संकेत दिया है कि अमेरिका अभी भी समझौते के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए ईरान को परमाणु कार्यक्रम में ठोस रियायत देनी होगी। दूसरी तरफ ईरान अपने संवर्धन के अधिकार को महत्वपूर्ण मुद्दा मान रहा है। ऐसे में युद्ध समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों के बीच भरोसा और शर्तों पर सहमति बनना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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