Jammu Kashmir Encounter: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक बार फिर आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई है। यह ताजा मुठभेड़ जिले के डोलगाम इलाके में हुई, जहां भारतीय सेना और किश्तवाड़ की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने 2 से 3 आतंकवादियों को घेर लिया है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, ये आतंकी प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए जा रहे हैं। खास बात यह है कि यही आतंकी 18 जनवरी, 22 जनवरी और 24 जनवरी को सुरक्षा बलों को चकमा देकर फरार होने में सफल रहे थे।
ऑपरेशन ‘त्राशी-I’ के तहत संयुक्त कार्रवाई

सेना द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, 31 जनवरी 2026 की सुबह संयुक्त ऑपरेशन ‘त्राशी-I’ के दौरान आतंकियों के साथ फिर से संपर्क स्थापित हुआ। यह अभियान व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम द्वारा चलाया जा रहा है। ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए विभिन्न खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट्स का आपसी समन्वय किया गया है। दुर्गम पहाड़ी इलाके और खराब मौसम के बावजूद सुरक्षा बल पूरी सतर्कता के साथ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।
इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग ने 29 जनवरी को किश्तवाड़ जिले के तीन संवेदनशील इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने के आदेश जारी किए थे। इसमें 2G, 3G, 4G और 5G सभी सेवाएं शामिल हैं। प्रशासन को आशंका थी कि राष्ट्र-विरोधी तत्व इंटरनेट का दुरुपयोग कर सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
पिछले एक सप्ताह में तीसरी मुठभेड़
इससे पहले 25 जनवरी को भी किश्तवाड़ के पहाड़ी चतरू इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। यह पिछले एक सप्ताह के भीतर उसी क्षेत्र में तीसरी मुठभेड़ थी। रविवार रात करीब 10:20 बजे सेना और पुलिस की संयुक्त सर्च पार्टी जनसीर-कंडीवार के जंगलों में तलाशी अभियान चला रही थी, तभी आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद इलाके में रुक-रुक कर गोलीबारी होती रही।
बर्फबारी के बीच भी जारी तलाशी अभियान
चतरू क्षेत्र इस समय पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ है और कई जगहों पर दो फीट से ज्यादा बर्फ जम चुकी है। इसके बावजूद सेना और पुलिस जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े तीन पाकिस्तानी आतंकियों की तलाश में लगातार जुटी हुई है। 18 जनवरी को मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव में हुई पहली मुठभेड़ में एक पैराट्रूपर शहीद हो गया था, जबकि सात अन्य जवान घायल हुए थे। घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर आतंकी भले ही अब तक बचते रहे हों, लेकिन सुरक्षा बलों ने हार नहीं मानी है और सर्च ऑपरेशन पूरी ताकत से जारी है।









