Garba Controversy: नवरात्रि में गरबा पर गरमाया विवाद, बीजेपी विधायक ने रखी ये शर्त

जयपुर में नवरात्रि के गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य के बयान से विवाद बढ़ गया है। उन्होंने दूसरे धर्मों के लोगों की भागीदारी पर सवाल उठाते हुए सनातन धर्म अपनाने की बात कही। विधायक ने एंट्री से पहले देवी मां का जयकारा, कलावा और तिलक लगाने की बात भी कही।

Garba Controversy

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 26, 2026

Garba Controversy: राजस्थान की राजधानी जयपुर में नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य के बयान से विवाद खड़ा हो गया है। हवा महल विधानसभा क्षेत्र से विधायक आचार्य ने कहा कि गरबा और डांडिया केवल मनोरंजन के कार्यक्रम नहीं, बल्कि देवी मां की आराधना और धार्मिक परंपरा का हिस्सा हैं। उन्होंने दूसरे धर्मों के लोगों की इन आयोजनों में भागीदारी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी को सनातन परंपरा के इन उत्सवों में इतनी रुचि है, तो उसे सनातन धर्म अपना लेना चाहिए।

गरबा और डांडिया देवी मां की आराधना का हिस्सा: बालमुकुंद आचार्य

बताते चले कि, पत्रकारों से बातचीत के दौरान बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि नवरात्रि में आयोजित होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रम देवी मां के स्वागत और आराधना से जुड़े होते हैं। उनके मुताबिक, इन आयोजनों का उद्देश्य भक्ति भाव के साथ देवी की उपासना करना है। विधायक ने कहा कि जिन लोगों को देवी मां का नाम लेने में दिक्कत है, उन्हें ऐसे धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं होना चाहिए।

Garba Controversy

बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि सनातनी परंपरा के उत्सव में किसी को इतनी ही दिलचस्पी है तो वह सनातन धर्म अपनाकर इन कार्यक्रमों में शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी की धार्मिक आस्था या मंशा पर सवाल उठाने की जरूरत नहीं होगी।

दूसरे धर्म के लोगों की एंट्री को लेकर बीजेपी विधायक का बयान

बालमुकुंद आचार्य ने गरबा-डांडिया आयोजनों में दूसरे धर्मों के लोगों की एंट्री को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म से दूरी बनाए रखने के बावजूद उसके धार्मिक उत्सवों में गलत मंशा से शामिल होना उचित नहीं है। बीजेपी विधायक ने दावा किया कि दूसरे धर्मों के कुछ लोग ऐसे आयोजनों में किस उद्देश्य से शामिल होना चाहते हैं, यह सभी को पता है। उन्होंने कहा कि आयोजकों के लिए ऐसे लोगों को प्रवेश देने से बेहतर है कि उनकी एंट्री पर रोक लगाई जाए। उनके इस बयान के बाद धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और पहचान को लेकर बहस और तेज हो गई है।

गरबा में एंट्री से पहले जयकारा, कलावा और तिलक की बात

विधायक बालमुकुंद आचार्य ने गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में प्रवेश को लेकर कुछ सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सनातन धर्म अपनाए बिना गरबा या डांडिया में शामिल होना चाहता है, तो प्रवेश द्वार पर ही देवी मां का जयकारा लगवाया जाना चाहिए।

Garba Controversy

उन्होंने आगे कहा कि एंट्री से पहले संबंधित व्यक्ति के हाथ में कलावा बांधा जाए और माथे पर तिलक लगाया जाए। इसके बाद ही उसे कार्यक्रम में प्रवेश दिया जाए। विधायक के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति की सनातन धर्म में आस्था है तो धार्मिक आयोजन में शामिल होने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन आस्था नहीं होने की स्थिति में ऐसे धार्मिक उत्सवों में शामिल कराना उचित नहीं होगा।

दूसरे धर्मों की एंट्री पर रोक को बताया सही

बालमुकुंद आचार्य ने दूसरे धर्मों के लोगों के गरबा-डांडिया आयोजनों में शामिल होने पर रोक लगाने के फैसलों को भी सही ठहराया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों में दूसरे धर्म के लोगों की भागीदारी को लेकर आयोजकों को सतर्क रहना चाहिए।हालांकि, विधायक के इस बयान में दूसरे धर्मों के लोगों की मंशा को लेकर लगाए गए आरोपों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। उनके बयान के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि धार्मिक आयोजनों में किसी व्यक्ति की आस्था और पहचान के आधार पर प्रवेश के नियम किस तरह तय किए जाने चाहिए।

नवरात्रि में गरबा-डांडिया को लेकर बढ़ा विवाद

Garba Controversy

नवरात्रि के दौरान देशभर में गरबा और डांडिया के बड़े आयोजन होते हैं, जिनमें अलग-अलग समुदायों के लोग भी कई जगहों पर भाग लेते हैं। ऐसे में जयपुर के बीजेपी विधायक का बयान धार्मिक आयोजनों में भागीदारी, आस्था और प्रवेश नियमों को लेकर नई बहस का कारण बन गया है। बालमुकुंद आचार्य इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब नवरात्रि के गरबा और डांडिया आयोजनों में दूसरे धर्मों के लोगों की एंट्री को लेकर दिए गए उनके बयान पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।