
ITBP Raising Day 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 24 अक्टूबर को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 65वें स्थापना दिवस के अवसर पर बल के सभी जवानों और कर्मियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा में ITBP के योगदान, साहस और समर्पण की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाले हिमवीरों की निस्वार्थ सेवा और बलिदान पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इस अवसर पर उन्होंने जवानों के कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय सेवा के प्रयासों को भी सम्मान दिया।
सोशल मीडिया पोस्ट में साझा की जवानों की तस्वीरें
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर स्थापना दिवस के मौके पर एक संदेश साझा किया। पोस्ट में बर्फ से ढकी पहाड़ियों पर तैनात ITBP जवानों की तस्वीरें भी दिखाई गईं। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में बल के कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि ITBP के हिमवीरों ने अपने असाधारण साहस से अपनी पहचान बनाई है। उनका कहना था कि ये जवान बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं और हर जिम्मेदारी को दृढ़ संकल्प के साथ निभाते हैं।

हर चुनौती का सामना करते हैं ITBP के हिमवीर
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में हिमवीरों के दृढ़ निश्चय और निस्वार्थ सेवा का विशेष उल्लेख किया। ITBP के जवान दुर्गम पहाड़ी इलाकों, बर्फीले रास्तों और अत्यधिक ठंड के बीच सीमा की निगरानी करते हैं। कई बार सीमित संसाधनों और कठिन मौसम में भी उन्हें लंबे समय तक अपनी चौकियों पर तैनात रहना पड़ता है। ऐसे हालात में उनका अनुशासन, प्रशिक्षण और सतर्कता देश की सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं।
24 अक्टूबर 1962 को हुआ था ITBP का गठन
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का गठन 24 अक्टूबर 1962 को किया गया था। यह बल भारत-चीन सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ITBP लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर तैनात रहती है। यह सीमा लद्दाख के काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक फैली हुई है। सीमा सुरक्षा के अलावा, बल आंतरिक सुरक्षा से जुड़े अभियानों में भी सहयोग करता है। इनमें छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्रों में नक्सल-विरोधी अभियानों में भागीदारी शामिल है।\


माइनस 45 डिग्री तक तापमान में भी तैनाती
ITBP की कई सीमा चौकियां समुद्र तल से लगभग 9,000 से 18,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। सर्दियों में इन क्षेत्रों का तापमान माइनस 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। बर्फबारी, तेज हवाओं और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के बावजूद जवान अपनी ड्यूटी निभाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में लगातार निगरानी रखना और आपात स्थिति से निपटना उनके प्रशिक्षण तथा शारीरिक क्षमता की बड़ी परीक्षा होती है।
पर्वतारोहण से लेकर आपदा राहत तक अहम भूमिका
ITBP के जवानों को पर्वतारोहण, स्कीइंग और सामरिक अभियानों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। सीमा सुरक्षा के साथ-साथ यह बल हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव और राहत कार्य भी करता है। भूस्खलन, बर्फीले तूफान और अन्य आपात स्थितियों में जवान प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में योगदान देते हैं। स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं बल के इसी साहस, समर्पण और सेवा भावना को सम्मानित करती हैं।
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