Israel Lebanon Ceasefire : लंबे समय से जारी खूनी संघर्ष और भारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिका की सफल मध्यस्थता के बाद इजरायल और लेबनान अपने नाजुक संघर्षविराम (Ceasefire) को फिर से पूरी तरह से लागू करने पर सहमत हो गए हैं। दोनों देशों के बीच वाशिंगटन में गहन कूटनीतिक चर्चा हुई, जिसके बाद लेबनान की सीमाओं के भीतर कई विशेष ‘पायलट सुरक्षा जोन’ (Pilot Security Zones) स्थापित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस नए रक्षा समझौते की सबसे महत्वपूर्ण और कड़क शर्त यह है कि इन नवनिर्मित सुरक्षा क्षेत्रों में हिज्बुल्लाह के सशस्त्र लड़ाकों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीमा पर इजरायली नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में होने वाले किसी भी संभावित जमीनी हमले को रोकना है।
हिज्बुल्लाह की ओर से गोलीबारी पूरी तरह बंद होने पर ही टिकेगा सीजफायर
अमेरिकी विदेश विभाग (स्टेट डिपार्टमेंट) के मुख्यालय में आयोजित बातचीत के चौथे और बेहद महत्वपूर्ण दौर के समापन के बाद दोनों देशों द्वारा एक साझा संयुक्त बयान जारी किया गया। इस बयान में साफ तौर पर आगाह किया गया है कि संघर्षविराम की दीर्घकालिक सफलता पूरी तरह से हिज्बुल्लाह गुट पर निर्भर करेगी। समझौते के तहत हिज्बुल्लाह को इजरायल पर की जाने वाली अपनी सभी प्रकार की गोलीबारी और रॉकेट हमलों को तुरंत और स्थायी रूप से बंद करना होगा। इसके साथ ही, हिज्बुल्लाह को लेबनान की रणनीतिक लिटानी नदी के दक्षिणी क्षेत्रों से अपने सभी लड़ाकों और भारी हथियारों को पूरी तरह से पीछे हटाना अनिवार्य कर दिया गया है।
विवादित क्षेत्रों का पूर्ण नियंत्रण अब लेबनानी सेना के हाथों में सौंपने की तैयारी
हालांकि, इन पायलट सुरक्षा जोनों के वास्तविक संचालन, उनकी भौगोलिक संरचना और प्रशासनिक ब्लूप्रिंट को लेकर अभी तक कोई विस्तृत या तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके बावजूद, शांति समझौते की शर्तों के अनुसार, लेबनान की आधिकारिक राष्ट्रीय सेना (Lebanese Army) इन सभी संवेदनशील और विवादित क्षेत्रों का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथों में लेगी। संयुक्त बयान में इस बात की पुरजोर उम्मीद जताई गई है कि यह बड़ा कदम दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच भविष्य में एक व्यापक, स्थायी शांति और अचूक सुरक्षा समझौते की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
बाहरी ताकतों के दखल पर रोक और संप्रभु सरकारों द्वारा भविष्य के फैसले
शांति वार्ता में शामिल सभी देशों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने इस बुनियादी सिद्धांत को एक सुर में दोहराया कि इजरायल और लेबनान के बीच द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य केवल दोनों देशों की संप्रभु सरकारों द्वारा ही तय किया जाना चाहिए। साझा बयान के जरिए किसी भी बाहरी देश या गैर-सरकारी उग्रवादी संगठन द्वारा लेबनान के संप्रभु भविष्य को बंधक बनाने या अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल करने के किसी भी प्रयास को सिरे से खारिज कर दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कड़ा संदेश सीधे तौर पर ईरान के संदर्भ में दिया गया है, जो हिज्बुल्लाह का मुख्य वित्तपोषक और रणनीतिक समर्थक रहा है।
ईरान का रुख और हिज्बुल्लाह को शांति वार्ता की मेज से पूरी तरह रखा गया बाहर
ईरान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह पैरवी करता रहा है कि मध्य पूर्व में संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ एक व्यापक अस्थायी समझौते के हिस्से के रूप में लेबनान पर होने वाले सभी इजरायली हमलों को तत्काल रोका जाना चाहिए। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हिज्बुल्लाह को इजरायल-लेबनान के बीच हुई इस आधिकारिक शांति बातचीत की प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर रखा गया है। चूंकि हिज्बुल्लाह एक गैर-सरकारी संगठन और मिलिशिया है, इसलिए उसे संप्रभु वार्ताओं में शामिल नहीं किया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे मामले पर अपनी पीठ थपथपाते हुए एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत कूटनीति का इस्तेमाल करते हुए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेबनान के खिलाफ जारी भारी सैन्य हमलों को तुरंत रोकने के लिए राजी कर लिया, जिसके बाद इजरायल ने अपने सैनिकों को पीछे बुला लिया। ट्रंप का यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों वैश्विक नेताओं के बीच बंद कमरों में हुई ‘तीखी’ और तनावपूर्ण बातचीत की खबरें अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बनी हुई थीं।
‘ट्रुथ सोशल‘ पर ट्रंप की घोषणा और नेतन्याहू के साथ तीखी नोकझोंक
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार की देर शाम अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस बड़ी सफलता की घोषणा की। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने बातचीत के दौरान नेतन्याहू को यहां तक चेतावनी दे दी थी कि अगर अमेरिका ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो इजरायली प्रधानमंत्री आज भ्रष्टाचार के मामलों में जेल की सलाखों के पीछे होते। ट्रंप ने नेतन्याहू को उनके लोकप्रिय उपनाम से संबोधित करते हुए पोस्ट किया, “आज मेरी बीबी नेतन्याहू से बेहद सकारात्मक बातचीत हुई। मैंने उनसे लेबनान की राजधानी बेरूत में कोई भी बड़ा हवाई या जमीनी हमला न करने का व्यक्तिगत अनुरोध किया था। उन्होंने मेरी बात का सम्मान करते हुए अपनी सेना को वापस बुला लिया है। धन्यवाद बीबी।”
Read More : Aaj Ka Mausam: भीषण गर्मी से मिलेगी राहत या बढ़ेगी मुसीबत? यूपी में अगले 3 दिनों के लिए जारी हुआ अलर्ट










