Iran-US Conflict: आज सुबह पूरी दुनिया की आंखें मिडिल ईस्ट से आ रही भयावह खबरों के बीच खुली। इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के जवाब में तेहरान ने पूरे क्षेत्र में मिसाइलों की बौछार कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता को संबोधित करते हुए उन्हें अपनी कमान संभालने का आह्वान किया है। जहां दुबई और दोहा जैसे शहर सायरन की गूंज से थर्रा रहे थे, वहीं ‘मिडिल ईस्ट का स्विट्जरलैंड’ कहा जाने वाला ओमान इस तबाही से पूरी तरह अछूता नजर आया।
मस्कट और तेहरान के बीच सुरक्षा संबंधों का इतिहास
बताते चले कि, ईरान और ओमान के अटूट रिश्तों की बुनियाद 1970 के दशक में रखी गई थी। जब ओमान के सुल्तान कबूस बिन सईद को ‘धोफर विद्रोह’ का सामना करना पड़ा, तब ईरान के शाह ने मार्क्सवादी विद्रोहियों को कुचलने के लिए अपनी सेना भेजी थी। इस शुरुआती सैन्य सहयोग ने दोनों देशों के बीच एक ऐसा संस्थागत विश्वास (Institutional Trust) पैदा किया, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद भी नहीं डगमगाया। जहाँ अन्य खाड़ी देश ईरान को खतरे के रूप में देखते हैं, वहीं ओमान ने दशकों से इस दोस्ती को सहेज कर रखा है।
क्षेत्रीय कूटनीति का संतुलन
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, ओमान की सबसे बड़ी ताकत उसकी न्यूट्रल फॉरेन पॉलिसी (Neutral Foreign Policy) है। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) का हिस्सा होने के बाद भी, मस्कट ने कभी भी सऊदी अरब या अन्य पड़ोसियों के ईरान-विरोधी खेमे में शामिल होना स्वीकार नहीं किया। ओमान ने ‘अहस्तक्षेप’ की नीति अपनाई है, जिससे वह पश्चिमी देशों और ईरान, दोनों के लिए एक विश्वसनीय मित्र बना हुआ है। यही कारण है कि आज युद्ध के समय भी ओमान की जमीन सुरक्षित है।
तेहरान और वाशिंगटन के बीच गुप्त वार्ता
ओमान केवल एक शांत देश नहीं है, बल्कि वह मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा डिप्लोमैटिक मीडिएटर (Diplomatic Mediator) है। 2015 की ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील (JCPOA) की गुप्त राहें ओमान की राजधानी मस्कट से ही निकली थीं। आज की मौजूदा लड़ाई के दौरान भी, ओमान अमेरिका और ईरान के बीच एक ‘बैक-चैनल’ संचार सेतु का काम कर रहा है, जिससे संघर्ष को और अधिक फैलने से रोकने में मदद मिल रही है।
रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा
ईरान के लिए ओमान पर हमला करना एक आत्मघाती कदम होगा। भौगोलिक दृष्टि से दोनों देश होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) की निगरानी करते हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है। आर्थिक मोर्चे पर, प्रस्तावित ‘ईरान-ओमान गैस पाइपलाइन’ और बढ़ते पर्यटन संबंधों ने दोनों को एक-दूसरे पर निर्भर बना दिया है। प्रतिबंधों से जूझ रहे ईरान के लिए ओमान दुनिया से जुड़ने का एक मात्र सुरक्षित द्वार है।
अन्य खाड़ी देशों की तुलना में ओमान का विशेष कूटनीतिक रुतबा
ईरान के अन्य GCC देशों के साथ संबंध अक्सर तनावपूर्ण रहते हैं क्योंकि वहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। लेकिन ओमान ने अपनी धरती को कभी भी ईरान के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दिया। सुल्तान कबूस बिन सईद के “मित्रता और शांति” के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए, ओमान ने खुद को ग्रे-जोन संघर्षों से दूर रखा है। यही ‘बैलेंस्ड पॉलिसी’ आज ओमान को बारूद के ढेर में तब्दील हो चुके मिडिल ईस्ट में सुरक्षित रखे हुए है।
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