Israel Iran War 2026 : पिछले वर्ष जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद से ही मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव चरम पर है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजरायल एक बार फिर बड़े पैमाने पर सैन्य तैयारियों में जुटे हैं। अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति का जो संकेंद्रण किया है, उसे 2003 के इराक युद्ध के बाद से सबसे बड़ा जमावड़ा माना जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप की स्पष्ट चेतावनी कि यदि ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ता विफल रहती है तो गंभीर सैन्य परिणाम भुगतने होंगे, इस बात का संकेत है कि क्षेत्र एक बड़े युद्ध की दहलीज पर खड़ा है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस विशाल उपस्थिति का सीधा अर्थ ईरान पर संभावित बमबारी है।
नफ्ताली बेनेट की चेतावनी: उभरती हुई ‘इस्लामिक धुरी’
जहाँ पूरी दुनिया का ध्यान ईरान और अमेरिका के टकराव पर है, वहीं इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने एक नए और अधिक खतरनाक मोर्चे की ओर इशारा किया है। बेनेट के अनुसार, मध्य पूर्व में एक नई ‘इस्लामिक धुरी’ (Islamic Axis) आकार ले रही है। इस गठबंधन में तुर्की, कतर, मुस्लिम ब्रदरहुड और पाकिस्तान जैसे नाम शामिल हैं। इजरायल का मानना है कि यह गठबंधन केवल वैचारिक नहीं, बल्कि सामरिक रूप से इजरायल के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहा है। बेनेट ने विशेष रूप से तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन को एक ‘खतरनाक दुश्मन’ करार दिया है, जो इजरायल को चारों ओर से घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
तुर्की का नया अवतार: इजरायल के लिए एक ‘नया ईरान’
इजरायली रणनीतिकारों की चिंता का मुख्य केंद्र तुर्की का बदलता रुख है। बेनेट ने तुर्की को एक ‘नए ईरान’ के रूप में परिभाषित किया है। उनके अनुसार, मुस्लिम ब्रदरहुड के नेतृत्व में तुर्की एक ऐसा मोर्चा खोल रहा है जो ईरान से भी अधिक घातक साबित हो सकता है। यह गठबंधन न केवल इजरायल की सीमाओं के पास कट्टरपंथी ताकतों को मजबूत कर रहा है, बल्कि पाकिस्तान जैसे परमाणु शक्ति संपन्न देश के साथ मिलकर एक अभेद्य दीवार खड़ी करने की कोशिश में है। इजरायल को डर है कि तुर्की की कूटनीति और पाकिस्तान की परमाणु क्षमता का मिलन उसकी सुरक्षा व्यवस्था को तहस-नहस कर सकता है।
पाकिस्तान का ‘इस्लामिक बम’ और वैश्विक चिंता
पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र मुस्लिम राष्ट्र है जिसके पास परमाणु हथियार हैं। इसे अक्सर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में “इस्लामिक बम” के रूप में संदर्भित किया जाता रहा है। इजरायल के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि पाकिस्तान एकमात्र ऐसा देश है जो अक्सर अपने विरोधियों के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देता रहता है। हाल के दिनों में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच ‘इस्लामिक नाटो’ बनाने की चर्चाओं ने तेल अवीव की रातों की नींद उड़ा दी है। इजरायल इस संभावित सैन्य गठबंधन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से भी बड़ा खतरा मानता है, क्योंकि इसमें एक स्थापित परमाणु शक्ति (पाकिस्तान) शामिल है।
इस्लामिक नाटो: इजरायल की सुरक्षा के लिए अस्तित्व का संकट
इजरायल को यह अंदेशा है कि यदि इस्लामिक देशों का यह गठबंधन ‘नाटो’ की तर्ज पर पूरी तरह विकसित हो जाता है, तो यह सीधे तौर पर इजरायल की संप्रभुता को चुनौती देगा। कट्टरपंथी ताकतों का परमाणु हथियारों तक पहुंच बनाना और उनका एक संगठित सैन्य ढांचे में तब्दील होना इजरायल के लिए “अस्तित्व का संकट” पैदा कर सकता है। यही कारण है कि अब इजरायल की खुफिया एजेंसियां और सैन्य योजनाकार ईरान के साथ-साथ पाकिस्तान और तुर्की की गतिविधियों पर भी पैनी नजर रख रहे हैं। दुनिया एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ एक छोटी सी चिंगारी वैश्विक महायुद्ध का रूप ले सकती है।









