Strait of Hormuz News : ईरान का अमेरिका के सामने सात दिन का प्लान, छठे दिन खुल सकता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने सात दिन का प्रस्ताव सामने रखा है। योजना के मुताबिक, छठे दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल सकता है और सातवें दिन बातचीत शुरू हो सकती है। लेकिन क्या अमेरिका ईरान की शर्तें स्वीकार करेगा? अब सबकी निगाहें वाशिंगटन के जवाब पर टिकी हैं।

Strait of Hormuz News

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 19, 2026

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Strait of Hormuz News  : पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बयान ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन की योजना रखी है। इस प्रस्ताव के तहत यदि वाशिंगटन ईरान की शर्तों को स्वीकार करता है, तो दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। योजना में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और बातचीत बहाल करने का प्रस्ताव शामिल है।

छठे दिन खुल सकता है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, प्रस्ताव की शर्तें पूरी होने पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को छठे दिन खोला जा सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, मार्ग को दोबारा खोलने की संभावना अमेरिकी सहमति और प्रस्ताव की शर्तें पूरी होने पर निर्भर करेगी।

सातवें दिन फिर शुरू हो सकती है बातचीत

अराघची ने कहा कि ईरान ने अपना रुख सात दिन की योजना के रूप में अमेरिकी पक्ष के सामने रखा है। उनके अनुसार, अमेरिका ने भी अपना पक्ष और विचार साझा किए हैं, जिनकी तेहरान समीक्षा कर रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक, छठे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के बाद सातवें दिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिर से शुरू हो सकती है। हालांकि, इस संभावित प्रक्रिया को लेकर अभी अमेरिकी सहमति और आगे की आधिकारिक घोषणा महत्वपूर्ण होगी।

अमेरिकी रुख पर ईरान ने उठाए सवाल

ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वाशिंगटन वास्तव में ईमानदारी से समाधान चाहता है, तो तनाव कम करने का रास्ता स्पष्ट हो सकता है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच मतभेद अभी बरकरार हैं। एक तरफ संघर्ष समाप्त करने और वार्ता शुरू करने की संभावना पर चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं।

OIC की बैठक में अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप

इससे पहले इराक की राजधानी बगदाद में इस्लामिक सहयोग संगठन यानी OIC के विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए अराघची ने अमेरिका की नीतियों की आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने कूटनीतिक समाधान के बजाय आक्रामकता, धमकियों और आर्थिक दबाव का रास्ता चुना है। उनके अनुसार, ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।

संप्रभु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा ईरान

अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी तरह के दबाव या डराने-धमकाने के आगे झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान अपने संप्रभु अधिकारों से समझौता नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने आपसी सम्मान और भरोसे की गारंटी के आधार पर बातचीत के लिए ईरान की तैयारी भी जताई।

अब अमेरिका के जवाब पर टिकी निगाहें

ईरान के सात दिन के प्रस्ताव के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका इस योजना पर क्या रुख अपनाता है। यदि दोनों पक्ष सहमति की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने और वार्ता बहाल होने की संभावना बन सकती है। फिलहाल, प्रस्ताव की शर्तों, अमेरिकी प्रतिक्रिया और आधिकारिक घोषणाओं पर पूरे क्षेत्र की नजर रहेगी।

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