Iran Rejects Trump Offer: अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने पीछे हटने की सभी अंतरराष्ट्रीय अपीलों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने अपनी सैन्य शक्ति का आक्रामक प्रदर्शन करते हुए दावा किया है कि उसने कुवैत में स्थित एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डे को पूरी तरह से निष्क्रिय (Deactivate) कर दिया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस हमले में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचा है और कई अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की खबर है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने साफ संदेश दिया है कि वे किसी भी वैश्विक दबाव में नहीं झुकेंगे और अपने नेताओं की शहादत का बदला इसी तरह के विनाशकारी हमलों से लेते रहेंगे।
समुद्र में कोहराम: युद्धपोत ‘अब्राहम लिंकन’ को पीछे हटने पर किया मजबूर
ईरान की सैन्य कार्रवाई केवल जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसने समुद्र में भी अमेरिकी नौसेना को कड़ी चुनौती दी है। बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसैनिक बेस पर ईरान ने सुसाइड ड्रोनों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं। सबसे सनसनीखेज खबर अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ को लेकर आई है। ईरानी सेना का दावा है कि उन्होंने इस विशाल युद्धपोत पर चार सटीक मिसाइलें दागी हैं। हमले के बाद, ‘अब्राहम लिंकन’ को अपनी रणनीतिक स्थिति छोड़कर पीछे हटना पड़ा और वर्तमान में वह खुद को बचाने के लिए एक ‘सेफ जोन’ में शरण ले चुका है। लंबी दूरी की मिसाइलों के इस प्रयोग ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा तंत्र की पोल खोल दी है।
हताहतों की संख्या पर विवाद: 560 सैनिकों की मौत का ईरानी दावा
इस युद्ध में जान गंवाने वाले सैनिकों की संख्या को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच विरोधाभास बना हुआ है। ईरान की फौज ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उनके हमलों में अब तक 560 अमेरिकी सैनिक मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। शुरुआत में पेंटागन ने केवल 3 सैनिकों की मौत की पुष्टि की थी, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने संदेह पैदा कर दिया है। ट्रंप ने स्वीकार किया है कि हताहत होने वाले सैनिकों की संख्या बढ़ सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी हकीकत सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा भयावह हो सकती है और अमेरिका अपने नुकसान को छिपाने की कोशिश कर रहा है।
‘ईरान की शर्तों पर होगा अंत’: समझौते से तेहरान का इनकार
ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट कर दिया है कि वे फिलहाल किसी भी प्रकार के युद्धविराम या समझौते के पक्ष में नहीं हैं। IRGC ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि इस युद्ध की शुरुआत अमेरिका और इजरायल ने की थी, लेकिन अब इसका अंत केवल ईरान की शर्तों पर ही होगा। तेहरान ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े मिसाइल हमले किए जा सकते हैं। इस आक्रामक रुख ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को खतरे में डाल दिया है, जिससे पूरी दुनिया में चिंता की लहर दौड़ गई है।
तीसरे विश्व युद्ध का खतरा: खाड़ी देशों में मंडरा रहे तबाही के बादल
वर्तमान में मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव अपने चरम स्तर पर पहुँच चुका है। अमेरिका अब अपने नाटो सहयोगियों और क्षेत्रीय भागीदारों के साथ मिलकर एक बड़ी जवाबी रणनीति तैयार कर रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने अपनी मिसाइल यूनिट्स को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा है। कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं और सैन्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि स्थिति को तुरंत नहीं संभाला गया, तो यह संघर्ष तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत बन सकता है। कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है, जिससे खाड़ी क्षेत्र एक बारूद के ढेर में तब्दील हो गया है।
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