Iran Power Struggle : राष्ट्रपति पेजेश्कियन पर दबाव बढ़ा? IRGC को मिली बड़ी जिम्मेदारी

ईरान में सत्ता संतुलन को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन पर बढ़ते दबाव और IRGC की बढ़ती भूमिका ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा प्रतिष्ठान का प्रभाव बढ़ने से तेहरान की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।

Iran Power Struggle

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 4, 2026

Iran Power Struggle :  ईरान में आंतरिक राजनीति और अमेरिका के साथ जारी अप्रत्यक्ष कूटनीतिक संपर्कों के बीच सत्ता संघर्ष की खबरों ने नई बहस छेड़ दी है। इजरायली मीडिया रिपोर्टों और एएनआई के हवाले से दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को कथित तौर पर अंतिम चेतावनी दी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर अहमद वाहिदी की भूमिका पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली हो गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरानी प्रशासन की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राष्ट्रपति के इस्तीफे को लेकर सामने आया बड़ा दावा

इजरायली ब्रॉडकास्टर चैनल 14 ने तेहरान स्थित सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान नीतिगत मतभेद होने पर कई बार इस्तीफे की पेशकश या उसकी चेतावनी को राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वोच्च नेता ने अब स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि भविष्य में राष्ट्रपति दोबारा इस्तीफा देने की कोशिश करते हैं, तो उसे तुरंत स्वीकार किया जा सकता है। इस दावे ने ईरान के राजनीतिक ढांचे में बढ़ते मतभेदों को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया है।

मई 2026 में इस्तीफे की पेशकश का दावा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मसूद पेजेश्कियान ने मई 2026 में औपचारिक रूप से पद छोड़ने की इच्छा जताई थी। उनका कथित आरोप था कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण मामलों में उनकी सरकार को निर्णय प्रक्रिया से लगभग अलग रखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस स्थिति के बाद सर्वोच्च नेता ने सैन्य प्रतिष्ठान के साथ अपनी एकजुटता और मजबूत कर दी, जिससे राष्ट्रपति की रणनीतिक निर्णयों में भूमिका काफी सीमित हो गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

IRGC और अहमद वाहिदी की भूमिका हुई मजबूत

इजरायली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, IRGC कमांडर अहमद वाहिदी का प्रभाव अब ईरानी शासन में काफी बढ़ गया है। दावा किया गया है कि अमेरिका से जुड़े प्रमुख नीतिगत फैसलों में अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वाहिदी का सख्त रुख अब ईरान की आधिकारिक नीति के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह जानकारी सही साबित होती है, तो यह नागरिक सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच शक्ति संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत माना जाएगा।

अमेरिकी चुनाव तक दबाव बनाए रखने की रणनीति

रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले अपनी ईरान नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। इसी वजह से ईरानी नेतृत्व फिलहाल अधिकतम दबाव की रणनीति अपनाकर अपनी आर्थिक और सामरिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह नीति भविष्य की संभावित वार्ताओं में ईरान की स्थिति मजबूत करने का प्रयास भी हो सकती है।

अप्रत्यक्ष वार्ता और ट्रंप का कड़ा संदेश

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक बातचीत फिलहाल बंद है, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक पर्दे के पीछे अप्रत्यक्ष संपर्क जारी हैं। बताया गया है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ तथा जेरेड कुश्नर के बीच मध्यस्थ देशों के जरिए संवाद चल रहा है। इस प्रक्रिया में कतर और पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर चुका था, लेकिन सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर के अनुरोध पर सैन्य कार्रवाई रोककर कूटनीति को एक और अवसर दिया गया। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरानी अधिकारी निजी तौर पर बातचीत करते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से इससे इनकार करते हैं। वहीं, इन सभी दावों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

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