Iran Pakistan Tension: अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में ईरान पर एक बड़े हवाई हमले को अंजाम दिया, जिससे मिडिल ईस्ट में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण हो गई है। शनिवार की सुबह हुए इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी जवाब में मिसाइल दागीं। इन मिसाइलों का निशाना खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर था। इसके अलावा सऊदी अरब पर भी ईरान ने हमला किया, जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत की खबर आई है। इस बीच पाकिस्तान भी चर्चा में आ गया है, क्योंकि सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान अब ईरान पर हमला करेगा।
सऊदी और पाकिस्तान का म्यूचुअल डिफेंस समझौता
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने 2025 में एक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दूसरे देश पर हमला मानने का प्रावधान है। हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि पाकिस्तान को तुरंत युद्ध में कूदना होगा। ऐसे समझौते आम तौर पर राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन देने के उद्देश्य से किए जाते हैं। इसके पहले तालिबान ने पाकिस्तान पर हमला किया था, लेकिन उस समय सऊदी अरब ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया।
पाकिस्तान के लिए ईरान पर हमला क्यों है मुश्किल
अगर सऊदी अरब पाकिस्तान से सहायता मांगता है, तो पाकिस्तान के लिए निर्णय लेना आसान नहीं होगा। इसके पीछे कई कारण हैं। सबसे पहले, ईरान-पाकिस्तान सीमा देश की सुरक्षा के लिए संवेदनशील है। सीधे युद्ध में उतरने का मतलब है कि खतरा पाकिस्तान के अपने इलाके तक फैल सकता है। इसके अलावा, युद्ध का दायरा कितना बड़ा होगा, देश की आंतरिक राजनीतिक स्थिति, जनता की प्रतिक्रियाएं और ईरान के साथ लंबे समय से बने रिश्तों को ध्यान में रखना होगा। पाकिस्तान की सेना की तैयारी और संसाधन भी इस फैसले में अहम भूमिका निभाएंगे।
पाकिस्तान किस तरह मदद कर सकता है
म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट का पालन करना जरूरी नहीं कि हमेशा सैनिक भेजना ही हो। पाकिस्तान कई अन्य तरीकों से मदद कर सकता है। इनमें तकनीकी सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करना, सऊदी ठिकानों की सुरक्षा में सहायता, एयर डिफेंस में सहयोग, प्रशिक्षण या सलाह देना शामिल है। पाकिस्तान पहले भी खाड़ी देशों की सहायता करता रहा है, लेकिन हर बार सीधे लड़ाई में शामिल नहीं हुआ।
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