Iran Nuclear Sites: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा जारी की गई ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों ने नतांज और इस्फ़हान जैसे अति-संवेदनशील परमाणु केंद्रों पर नए निर्माण कार्य की पुष्टि की है। पिछले साल हुए हमलों के बाद, ईरान ने अब अपने क्षतिग्रस्त ढांचों के ऊपर विशाल नई छतें बनाना शुरू कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल मरम्मत नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जासूसी और हवाई हमलों से बचने के लिए की जा रही एक बड़ी किलेबंदी है।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी को चुनौती: संवेदनशील मलबे को छिपाने की कोशिश
वैश्विक समुदाय, विशेष रूप से पश्चिमी देशों को डर है कि तेहरान इन नई छतों के जरिए अपने उन संवेदनशील संसाधनों को छिपा रहा है, जो पिछले हमलों में बच गए थे। विशेषज्ञों का तर्क है कि नतांज में संवर्धित यूरेनियम और कीमती सेंट्रीफ्यूज उपकरणों को सुरक्षित निकालने और उन्हें दुनिया की नजरों से दूर रखने के लिए यह प्रयास किया जा रहा है। गौरतलब है कि ईरान ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों के प्रवेश पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिससे इन ठिकानों की वास्तविक स्थिति जानना नामुमकिन होता जा रहा है।
नतांज का सामरिक महत्व: हमलों के बाद फिर खड़ा हो रहा है केंद्र
तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नतांज केंद्र ईरान का सबसे मुख्य यूरेनियम संवर्धन स्थल है। जून में इजरायली हमलों और बाद में अमेरिकी ‘बंकर-बस्टर’ बमों के प्रहार से इस केंद्र की जमीनी और भूमिगत इकाइयों को भारी नुकसान पहुँचा था। हालांकि, ताज़ा तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान ने हार मानने के बजाय दिसंबर के महीने में यहाँ युद्धस्तर पर काम शुरू किया और महीने के अंत तक नई सुरक्षात्मक छतों का निर्माण पूरा कर लिया है, जो आधुनिक मिसाइल हमलों को झेलने में सक्षम हो सकती हैं।
इस्फ़हान में हलचल और भूमिगत सुरंगों का रहस्य
नतांज के साथ-साथ इस्फ़हान के परमाणु केंद्र में भी जनवरी की शुरुआत से इसी तरह का निर्माण देखा गया है। यहाँ सेंट्रीफ्यूज निर्माण इकाइयों को हवाई निगरानी से बचाने के लिए ढका जा रहा है। सबसे अधिक चिंताजनक बात ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर हो रही लगातार खुदाई है। तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ईरान एक नई और कहीं अधिक गहरी भूमिगत परमाणु सुविधा विकसित कर रहा है। यहाँ पुरानी सुरंगों को भरकर मुख्य सुरंग को फिर से मजबूत किया जा रहा है, जिससे संकेत मिलते हैं कि ईरान अपने परमाणु भविष्य को पहाड़ों के अंदर सुरक्षित करना चाहता है।
मिसाइल कार्यक्रम की मजबूती: पारचिन परिसर का नया स्वरूप
ईरान की तैयारी केवल परमाणु केंद्रों तक सीमित नहीं है। वह अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी नई धार दे रहा है। तेहरान के पास स्थित पारचिन सैन्य परिसर के ‘तालेघान-2’ स्थल को फिर से विकसित किया जा रहा है। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि इस स्थल की संरचना को अब पहले के मुकाबले बहुत अधिक शक्तिशाली बनाया गया है, ताकि यह बाहरी बमबारी के प्रति प्रतिरोधी बना रहे। यह विकास दर्शाता है कि ईरान अपनी रक्षा और हमले की क्षमताओं को एक साथ उन्नत कर रहा है।
अमेरिकी घेराबंदी और परमाणु समझौते की अनिश्चितता
एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ नए सिरे से परमाणु समझौते पर बातचीत की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र में सैन्य तैनाती कम नहीं हो रही है। अमेरिका ने अपने विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स को तैनात कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। ईरान लगातार अपने कार्यक्रम को ‘शांतिपूर्ण’ बता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां उसके हथियारों के बढ़ते जखीरे और पारदर्शी रवैये की कमी को देखते हुए गहरे संदेह में हैं। यह निर्माण कार्य आने वाले समय में एक बड़े वैश्विक टकराव का केंद्र बन सकता है।









