Iran Israel War 2026: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। ईरान और इजराइल-अमेरिका गठबंधन के बीच चल रहे इस भीषण संघर्ष में जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए संयुक्त हवाई हमलों (Airstrikes) में अब तक कम से कम 555 ईरानी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में ‘एसोसिएटेड प्रेस’ (AP) ने रेड क्रिसेंट के हवाले से बताया कि यह आंकड़ा केवल उन इलाकों का है जहाँ राहत टीमें पहुँच सकी हैं। इस युद्ध ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है और मरने वालों की संख्या में अभी और बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।
131 शहरों पर बरसी मिसाइलें: बुनियादी ढांचा ध्वस्त
युद्ध की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ईरान के 131 शहरों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इजराइली और अमेरिकी वायु सेना के ‘एयरस्ट्राइक कैंपेन’ ने इस्लामिक रिपब्लिक के प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों को तहस-नहस कर दिया है। हमलों की व्यापकता इतनी अधिक है कि देश के कई हिस्सों में बिजली, पानी और संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। ईरान ने खाड़ी के कई अन्य देशों पर भी हमले किए हैं, जिससे यह युद्ध अब क्षेत्रीय दायरे से बाहर निकलकर एक बड़े वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है।
राहत और बचाव कार्य: 4 मिलियन वॉलंटियर्स का नेटवर्क सक्रिय
भीषण हमलों के बीच ईरान ने अपनी पूरी मशीनरी को बचाव कार्यों में झोंक दिया है। ‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने प्रभावित इलाकों में युद्ध स्तर पर राहत कार्य शुरू कर दिया है। संस्था ने सोशल मीडिया पर बताया कि पूरे देश में 100,000 से अधिक कर्मचारी हाई अलर्ट पर हैं। इसके अलावा, मानवीय सहायता, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता (Psychosocial Support) प्रदान करने के लिए लगभग चार मिलियन स्वयंसेवकों का एक विशाल नेटवर्क तैयार किया गया है। ईरानी सरकार का कहना है कि वे अपने “555 हमवतनों” को खोने पर बेहद दुखी हैं, लेकिन घायलों को बचाने के लिए बिना रुके काम जारी रहेगा।
बढ़ता सैन्य तनाव: इजराइल और अरब देशों पर मिसाइल दाग रहा ईरान
मैदान-ए-जंग में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ईरान और उसके समर्थित मिलिशिया (Militia) समूहों ने इजराइल के साथ-साथ कई अरब देशों पर भी मिसाइलें दागी हैं। इसके जवाब में, अमेरिका और इजराइल ने ईरानी ठिकानों पर अपने हमले और तेज कर दिए हैं। इस ‘टू-वे’ हमले ने खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अरब देशों को शामिल करने से यह संघर्ष अब एक बहुपक्षीय युद्ध में बदल गया है, जिसे नियंत्रित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
कूटनीति का अंत? अली लारीजानी ने बातचीत से किया इनकार
जहाँ एक तरफ बमबारी जारी है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक रास्ते भी बंद होते दिख रहे हैं। ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि ईरान मौजूदा परिस्थितियों में संयुक्त राज्य अमेरिका (US) के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं करेगा। लारीजानी का यह बयान इस बात का संकेत है कि ईरान झुकने के मूड में नहीं है और वह अंतिम समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए तैयार है। बातचीत के दरवाजे बंद होने से शांति की उम्मीदें धूमिल होती नजर आ रही हैं।
अमेरिकी बेस और ब्रिटिश ठिकानों पर ड्रोन हमले
युद्ध का विस्तार इराक और साइप्रस तक पहुँच गया है। इराक में सक्रिय ईरान-समर्थक मिलिशिया ने बगदाद एयरपोर्ट पर स्थित अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया और इसकी जिम्मेदारी ली। इससे पहले इरबिल में एक अमेरिकी बेस पर भी फायरिंग की गई थी। केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि साइप्रस ने भी भूमध्यसागरीय द्वीप पर स्थित एक ब्रिटिश बेस को ड्रोन द्वारा निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट दी है। ये घटनाक्रम दर्शाते हैं कि ईरान समर्थित गुट अब पश्चिमी देशों के सैन्य ठिकानों को हर तरफ से घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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