Alireza Arafi: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इज़रायल के भीषण हमले में हुई मौत के बाद, ईरान ने अपने नए नेतृत्व की घोषणा कर दी है। सरकारी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफ़ी को देश का अंतरिम सुप्रीम लीडर (Antarim Supreme Leader) नियुक्त किया गया है। खामेनेई के निधन से पैदा हुए राजनीतिक शून्य को भरने के लिए अराफ़ी अब एक अस्थायी नेतृत्व परिषद का नेतृत्व करेंगे, जो नए स्थायी सर्वोच्च नेता के चुने जाने तक राष्ट्र की कमान संभालेगी।
अस्थायी परिषद संभालेगी देश: पजेशकियान और एजेई भी शामिल
ईरान के संवैधानिक नियमों के अनुसार, सर्वोच्च नेता की अनुपस्थिति में एक अंतरिम परिषद का गठन किया जाता है। इस परिषद में वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान, मुख्य न्यायाधीश घोलम-होसैन मोहसेनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल के एक प्रमुख धर्मगुरु के रूप में अराफ़ी शामिल हैं। यह त्रिमूर्ति इस संवेदनशील और युद्धग्रस्त समय में देश के प्रशासनिक, न्यायिक और धार्मिक फैसलों को लागू करेगी। ईरान के लिए यह बदलाव का काल अत्यंत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि उसे न केवल आंतरिक स्थिरता बनाए रखनी है, बल्कि बाहरी हमलों का भी सामना करना है।
IRGC के नए प्रमुख बने अहमद वहीदी: जनरल पकपूर की मौत के बाद बदलाव
शनिवार को हुए हमले में न केवल खामेनेई, बल्कि ईरान की सैन्य शक्ति का आधार कहे जाने वाले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को भी भारी क्षति पहुँची है। हमले में IRGC के प्रमुख जनरल मोहम्मद पकपूर की मौत के बाद, ईरान ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अहमद वहीदी को सेना का नया चीफ नियुक्त किया है। वहीदी एक अनुभवी सैन्य रणनीतिकार माने जाते हैं और उन पर अब ईरान की रक्षा पंक्तियों को फिर से संगठित करने और इज़रायल-अमेरिका के हमलों का जवाब देने की बड़ी जिम्मेदारी है।
कौन हैं अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफ़ी? धार्मिक और राजनीतिक सफर
1959 में यज़्द शहर में जन्मे अलीरेज़ा अराफ़ी ईरान के धार्मिक हलकों में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। वे अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति रह चुके हैं और वर्तमान में क़ोम शहर में जुमे की नमाज़ के इमाम हैं। साल 2019 में वे शक्तिशाली ‘गार्जियन काउंसिल’ के सदस्य बने, जो ईरान के कानूनों और चुनावों की निगरानी करती है। सांस्कृतिक क्रांति की उच्च परिषद और मदरसों के प्रबंधन से जुड़े रहने के कारण उन्हें प्रशासन और धार्मिक सत्ता के तालमेल का व्यापक अनुभव प्राप्त है।
तकनीक प्रेमी और आधुनिक सोच: मोजतबा खामेनेई से अलग राह
अराफ़ी को ईरान के अन्य कट्टरपंथी नेताओं की तुलना में थोड़ा अलग माना जाता है। जहाँ खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को अत्यधिक परंपरावादी माना जाता है, वहीं अराफ़ी आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कट्टर समर्थक हैं। उनका मानना है कि इस्लामी सभ्यता को आधुनिक युग में प्रासंगिक बनाए रखने के लिए धार्मिक संस्थाओं को नई तकनीक को अपनाना चाहिए। उनका यह दृष्टिकोण भविष्य में ईरान की नीतियों में बदलाव का संकेत दे सकता है।
अयातुल्लाह की उपाधि और स्थायी लीडर बनने की संभावना
अराफ़ी को ‘अयातुल्लाह’ की उपाधि प्राप्त है, जो शिया इस्लाम में सर्वोच्च धार्मिक सम्मानों में से एक है। ईरान के कानून के मुताबिक, सुप्रीम लीडर बनने के लिए इस पदवी का होना अनिवार्य है। हालाँकि, 2015 में वे ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ का चुनाव हार गए थे, लेकिन 2021 में उन्होंने शानदार वापसी की और इसके सदस्य बने। उनकी वर्तमान नियुक्ति को देखते हुए विशेषज्ञ यह अनुमान लगा रहे हैं कि वे स्थायी सुप्रीम लीडर की दौड़ में सबसे प्रबल दावेदार बनकर उभर सकते हैं।
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