US-Iran War: मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) में छिड़ा संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हालिया मौत ने पूरे देश को प्रतिशोध की आग में झोंक दिया है। ईरान अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक और खतरनाक रुख अपना रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में, ईरान ने दावा किया है कि उसने रविवार को समुद्र के बीचों-बीच तैनात एक शक्तिशाली अमेरिकी युद्धपोत पर सीधा हमला किया है। इस हमले के बाद वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध की आहट और तेज हो गई है।
‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत ईरान का बड़ा हमला
ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRNA और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ की शुरुआत कर दी है। इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य उन अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को नष्ट करना है, जिन्हें ईरान अपने सर्वोच्च नेता की हत्या का जिम्मेदार मानता है। ईरानी सेना ने स्पष्ट किया है कि वे अब केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक नीति पर चलेंगे और उनके निशाने पर क्षेत्र में मौजूद हर वो दुश्मन होगा जो उनके अस्तित्व को चुनौती देगा।
अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ‘अब्राहम लिंकन’ बना निशाना
ईरान के दावे के मुताबिक, इस ताजा हमले में अमेरिकी नौसेना के गौरव कहे जाने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ (USS Abraham Lincoln) को निशाना बनाया गया है। ईरानी सशस्त्र बलों ने दावा किया कि उन्होंने समुद्र में गश्त कर रहे इस युद्धपोत पर एक के बाद एक चार घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। यह हमला इतना सुनियोजित था कि इसने अमेरिकी रक्षा प्रणाली ‘ईजिस’ (Aegis) को भी चुनौती दी है। यदि यह दावा सच साबित होता है, तो यह दशकों में अमेरिकी नौसेना पर हुआ सबसे बड़ा सीधा हमला माना जाएगा।
मिसाइल तकनीक का शक्ति प्रदर्शन: चार बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रहार
ईरान ने इस हमले के लिए अपनी अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग किया है। ये मिसाइलें लंबी दूरी तक मार करने और लक्ष्य को सटीकता से भेदने में सक्षम हैं। IRGC के चौथे बयान में कहा गया है कि ये मिसाइलें खामेनेई की मौत का पहला बदला हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इस हमले के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसके पास अमेरिकी तकनीक का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।
अमेरिका की चुप्पी और सैन्य हलचल: सस्पेंस बरकरार
ईरान के इस बड़े दावे के बावजूद, व्हाइट हाउस या पेंटागन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर अमेरिका ऐसे हमलों पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है, लेकिन वर्तमान चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर दिया गया था, या फिर अब्राहम लिंकन को सचमुच कोई क्षति पहुँची है? इस बीच, हिंद महासागर और खाड़ी क्षेत्रों में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना की सक्रियता अचानक बढ़ गई है, जिससे किसी बड़े जवाबी हमले की आशंका प्रबल हो गई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाज़ार पर गहराते संकट के बादल
ईरान और अमेरिका के बीच सीधे टकराव की खबरों ने वैश्विक बाज़ारों में हड़कंप मचा दिया है। खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति अब खतरे में है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए मिडिल-ईस्ट पर निर्भर हैं, यह स्थिति चिंताजनक है। राजनयिक गलियारों में अब केवल एक ही सवाल गूँज रहा है—क्या दुनिया एक और बड़े और अंतहीन युद्ध की ओर बढ़ रही है?
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