वैशाली में 12 केसों में अनुसंधानकर्ताओं की गलती, डिफॉल्ट बेल से बाहर आए आरोपी

पटना बिहार में आपराधिक मामलों की जांच में गंभीर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। बीते तीन माह के भीतर राज्यभर में संगीन मामलों के 75 आरोपितों को सिर्फ इस वजह से जमानत मिल गई क्योंकि पुलिस तय समय सीमा के भीतर आरोप पत्र (चार्जशीट) न्यायालय में दाखिल नहीं कर सकी। चार्जशीट दाखिल करने में हुई देरी के कारण अदालतों ने इन आरोपितों को डिफॉल्ट बेल दे दी। चार्जशीट में देरी बनी राहत की वजह जांच में सामने आया है कि अधिकांश मामलों में अनुसंधानकर्ताओं ने समय पर केस डायरी और आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया। दंड

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Published On :

अप्रैल 30, 2026

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पटना

बिहार में आपराधिक मामलों की जांच में गंभीर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। बीते तीन माह के भीतर राज्यभर में संगीन मामलों के 75 आरोपितों को सिर्फ इस वजह से जमानत मिल गई क्योंकि पुलिस तय समय सीमा के भीतर आरोप पत्र (चार्जशीट) न्यायालय में दाखिल नहीं कर सकी। चार्जशीट दाखिल करने में हुई देरी के कारण अदालतों ने इन आरोपितों को डिफॉल्ट बेल दे दी।

चार्जशीट में देरी बनी राहत की वजह
जांच में सामने आया है कि अधिकांश मामलों में अनुसंधानकर्ताओं ने समय पर केस डायरी और आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167(2) (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187(2)) के तहत यदि तय समय में चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो अभियुक्त को डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल जाता है। इसी प्रावधान का लाभ उठाकर कई कुख्यात अपराधी जेल से बाहर आ गए।

वैशाली के 12 अनुसंधानकर्ता चिन्हित
राज्य स्तर पर समीक्षा के दौरान सामने आए 75 मामलों में वैशाली जिले के 12 मामले भी शामिल हैं, जहां अनुसंधानकर्ताओं की लापरवाही के कारण आरोपितों को राहत मिली। इनमें से 11 पुलिस अधिकारी अभी भी वैशाली जिले के विभिन्न थानों में पदस्थापित हैं, जबकि एक अधिकारी का तबादला सीतामढ़ी कर दिया गया है। इस संबंध में संबंधित एसपी को भी जानकारी भेज दी गई है और सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई वैशाली में ही चलाई जाएगी।

लापरवाह अधिकारियों के जवाब असंतोषजनक
मुख्यालय डीएसपी अबू जफर इमाम ने सभी मामलों की जांच कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है। अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया, लेकिन अधिकांश ने वर्कलोड का हवाला देते हुए एक जैसा जवाब दिया, जिसे संतोषजनक नहीं माना गया। इसके बाद विभागीय कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।
 
एसपी का बयान: 10 पर होगी कार्रवाई
वैशाली के एसपी विक्रम सिहाग ने बताया कि मामले में सभी अनुसंधानकर्ताओं से जवाब मांगा गया था। इनमें से 2 अधिकारियों का जवाब संतोषजनक पाया गया, जबकि 10 के जवाब असंतोषजनक रहे। ऐसे में इन 10 अनुसंधानकर्ताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने पुलिस जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगे से इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने को लेकर सख्ती बरती जाएगी।

 

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