
Dollar Index Today : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मजबूती का सिलसिला लगातार तीसरे कारोबारी दिन जारी रहा। मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 82 पैसे मजबूत होकर 94.96 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। हाल के दिनों में रुपये पर दबाव के बीच आई इस तेजी को घरेलू मुद्रा के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, डॉलर की मांग में कमी और भारतीय रिजर्व बैंक के नियामकीय कदमों ने रुपये को संभलने में मदद की है।
शुरुआती कारोबार में 95.53 से 94.96 तक पहुंचा रुपया
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में मंगलवार को रुपया 95.53 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ घरेलू मुद्रा में मजबूती आई और यह 94.96 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव की तुलना में 82 पैसे की बढ़त थी। इससे पहले सोमवार को रुपया 93 पैसे मजबूत होकर 95.78 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोमवार की तेजी छह महीने से अधिक समय में रुपये की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त थी।

आरबीआई के कदमों से डॉलर की मांग पर असर
मुद्रा बाजार के जानकारों के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों को नामित बैंकों के माध्यम से डॉलर उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था से हाजिर बाजार में डॉलर की मांग कम हो सकती है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव से जुड़े कुछ लेनदेन की लागत बढ़ाने और फॉरेक्स डेरिवेटिव्स कारोबार पर सीमाएं लगाने जैसे कदमों ने भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित किया है। इन उपायों का उद्देश्य रुपये पर पड़ रहे दबाव को कम करना और विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।
विशेषज्ञों ने बताई रुपये की तेजी की वजह
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से फॉरेक्स डेरिवेटिव्स में कारोबार पर लगाई गई सीमाओं और ट्रेडिंग की लागत बढ़ाने से रुपये को कुछ राहत मिली है। उनके अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती के साथ विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी घटकर लगभग 1,708 करोड़ रुपये रह गई। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।


डॉलर सूचकांक में गिरावट से घरेलू मुद्रा को सहारा
दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति बताने वाला डॉलर सूचकांक 0.15 प्रतिशत गिरकर 102.43 पर आ गया। डॉलर सूचकांक में कमजोरी से दूसरी मुद्राओं को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी मुद्रा की चाल केवल डॉलर सूचकांक पर निर्भर नहीं करती; ब्याज दरें, विदेशी निवेश और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं।
शेयर बाजार में तेजी, लेकिन विदेशी बिकवाली का जोखिम
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार भी बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स 305 अंक चढ़कर 72,224.15 अंक पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 93.40 अंक बढ़कर 22,458.50 अंक पर आ गया। दूसरी ओर, अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.2 प्रतिशत से ऊपर रहने को विदेशी निवेश के लिए चुनौती माना जा रहा है। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को शुद्ध रूप से 1,708.48 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

कच्चे तेल की कीमतें और आगे की चुनौती
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चे तेल का वायदा भाव 1.11 प्रतिशत घटकर 105.47 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। रुपये में मजबूती के बावजूद विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें आगे बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए लगातार तीन दिन की तेजी को राहत के संकेत के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन रुपये की स्थायी मजबूती के लिए आने वाले कारोबारी सत्रों का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।
Read More : Gold Rate Today: सोने की चमक पड़ी फीकी, दिल्ली, जयपुर और लखनऊ में ये है नया भाव











