India Venezuela oil : भारत के लिए वेनेजुएला बना तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर, अमेरिका ने दिया ग्रीन सिग्नल

अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली विशेष ढील के बाद वेनेजुएला अचानक भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है; जानिए वाशिंगटन से मिले इस ग्रीन सिग्नल के पीछे भारतीय रिफाइनरियों का कौन सा बड़ा गेम प्लान छिपा हुआ है?

India Venezuela oil

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 23, 2026

India Venezuela oil :  वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों से भारत के लिए एक बेहद सुकून देने वाली और बड़ी आर्थिक खबर सामने आ रही है। केवल दो महीने पहले तक भारत जिस देश से अपने घरेलू बाजार के लिए एक बूंद भी कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का आयात नहीं कर रहा था, उसने इस महीने अमेरिका और सऊदी अरब जैसे दिग्गज तेल उत्पादक देशों को पछाड़ दिया है।

वह सीधे भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले शीर्ष देशों की सूची में तीसरे पायदान पर आकर खड़ा हो गया है। यहां बात हो रही है दुनिया के सबसे समृद्ध तेल भंडार वाले देश ‘वेनेजुएला’ की, जो एक समय पर भारत को सबसे सस्ती दरों पर कच्चा तेल बेचा करता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह व्यापार ठप पड़ गया था।

वेनेजुएला से तेल आयात में भारी उछाल

भारतीय रिफाइनरियों द्वारा वेनेजुएला से तेल की खरीद का सिलसिला अप्रैल महीने से ही दोबारा शुरू कर दिया गया था, लेकिन इस चालू महीने में इस आयात ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। वर्तमान में भारत वेनेजुएला से प्रतिदिन 417,000 बैरल से भी अधिक कच्चे तेल का आयात कर रहा है।

इस बंपर उछाल के साथ ही वेनेजुएला अब रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बाद भारत को तेल सप्लाई करने वाला तीसरा सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार बन गया है। अब भारतीय बाजार को तेल निर्यात करने की दौड़ में वेनेजुएला से आगे सिर्फ रूस और यूएई ही बचे हैं, जबकि सऊदी अरब और इराक काफी पीछे छूट गए हैं।

वेनेजुएला के पास है दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक अपडेट यह है कि अगले हफ्ते वेनेजुएला की राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बयानों के संकेत के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और दीर्घकालिक तेल आपूर्ति को लेकर एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौते (डील) पर हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है।

आपको बता दें कि वेनेजुएला के पास 300 बिलियन बैरल से भी अधिक का प्रमाणित तेल भंडार है, जो कि अमेरिका, रूस और सऊदी अरब के कुल तेल भंडारों को मिलाकर भी उससे कहीं अधिक बड़ा है।

अमेरिका की ग्रीन सिग्नलकूटनीति

इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू यह है कि वेनेजुएला की वैश्विक बाजार में वापसी और राष्ट्रपति के भारत दौरे से जुड़े तमाम बड़े अपडेट वेनेजुएला या भारत से नहीं, बल्कि खुद अमेरिका से निकलकर आ रहे हैं। इसके पीछे अमेरिका की एक सोची-समझी रणनीतिक मंजूरी और वैश्विक कूटनीति काम कर रही है।

दरअसल, अमेरिका इस समय दो मुख्य लक्ष्य हासिल करना चाहता है; पहला यह कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की निरंतर सप्लाई बनी रहे ताकि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बेकाबू न हों, और दूसरा यह कि भारत जैसा दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार कच्चे तेल के लिए पूरी तरह से रूस पर निर्भर न हो जाए। इसी संतुलन को साधने के लिए अमेरिका ने वेनेजुएला पर लगाए गए अपने पुराने कड़े प्रतिबंधों में थोड़ी ढील (नरमी) दी है, जिसका फायदा उठाकर भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने तेजी से अपनी खरीद बढ़ा दी है।

होर्मुज स्ट्रेट संकट और सऊदी अरब की मनमानी के बीच भारत ने अपनाया संतुलन का मार्ग

भारत अपनी कुल राष्ट्रीय जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक कीमतों में मामूली बदलाव भी देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की दरों पर सीधा असर डालता है। पिछले दिनों ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़े तनाव के कारण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) का समुद्री मार्ग लगभग अवरुद्ध हो गया था, जिसके चलते मध्य-पूर्व के देशों से होने वाली शिपमेंट रुक गई।

केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, इस संकट के कारण और कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी की वजह से सऊदी अरब से भारत का आयात घटकर महज 340,000 बैरल प्रति दिन रह गया है। ऐसे नाजुक समय में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रूस और मध्य-पूर्व के अलावा वेनेजुएला को शामिल कर संतुलन की एक बेहतरीन विदेश नीति का परिचय दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत किसी एक देश पर निर्भरता खत्म करने के लिए वर्तमान में दुनिया के 40 अलग-अलग देशों से तेल खरीद रहा है।

Read More:  गर्मी में टिफिन पैकिंग गाइड: खाने को जल्दी खराब होने से बचाने के आसान तरीके