India US Trade Deal : भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी क्यों? जयशंकर ने बताई जटिलताओं की पूरी वजह

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ में बदलाव और कुछ जटिलताओं के कारण समझौते में देरी हुई। अब सवाल है कि लंबे समय से चल रही बातचीत कब अंतिम रूप लेगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

India US Trade Deal

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 29, 2026

India US Trade Deal : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन कुछ जटिल बुनियादी वास्तविकताओं के कारण समझौते में उम्मीद से ज्यादा समय लग रहा है। वाशिंगटन में एशिया सोसायटी के कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि व्यापार समझौते को लेकर भारत और अमेरिका की सोच कई मुद्दों पर कमोबेश समान है।

भारत-अमेरिका रिश्तों में व्यापार बड़ी चुनौती

जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों पर चर्चा करते हुए माना कि पिछले एक साल में व्यापार और टैरिफ से जुड़े घटनाक्रमों ने द्विपक्षीय रिश्तों के सामने कुछ चुनौतियां खड़ी की हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को बेहतर दिशा में आगे बढ़ाने के लिए इन मुद्दों को वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुलझाना होगा। उनके मुताबिक, व्यापार वार्ता में कई तरह के दांव और जटिलताएं शामिल हैं।

छोटे उत्पादकों को लेकर भारत की स्थिति अलग

विदेश मंत्री ने भारत की आर्थिक संरचना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में छोटे कृषि उत्पादक और छोटी फैक्ट्रियां हैं। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच प्रति व्यक्ति आय के अंतर का भी जिक्र किया। जयशंकर के मुताबिक, दोनों देशों की उत्पादन व्यवस्था, आर्थिक परिस्थितियां और सामाजिक संरचना एक-दूसरे से काफी अलग हैं। इसलिए व्यापार वार्ता में इन वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की चिंता

एशिया सोसायटी के कार्यक्रम में जयशंकर ने भारत की सीमा-पार आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए आतंकवाद का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्री के अनुसार, भारत ने कई दशकों से एक पड़ोसी देश की ओर से कथित तौर पर जानबूझकर और सुनियोजित आतंकवाद का सामना किया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारत की चिंताओं को लेकर पर्याप्त समझ और संवेदनशीलता की जरूरत है।

अमेरिका के रुख पर जयशंकर ने जताई चिंता

जयशंकर ने कहा कि सीमा-पार आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं की पर्याप्त समझ या संवेदनशीलता नहीं होना द्विपक्षीय संबंधों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। उन्होंने यह बात भारत-अमेरिका संबंधों के व्यापक संदर्भ में रखी। विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद भारत की विदेश नीति और सुरक्षा संबंधी चिंताओं में एक महत्वपूर्ण विषय है और इस मुद्दे पर भारत अपनी अपेक्षाओं को लगातार सामने रखता रहा है।

लोगों की आवाजाही भी बनी अहम चुनौती

विदेश मंत्री ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में लोगों की आवाजाही से जुड़े मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज लोगों की आवाजाही की अर्थव्यवस्था और उससे जुड़ी राजनीति कई बार अलग-अलग दिशाओं में जाती दिखाई देती है। उनके मुताबिक, यह केवल सरकारों के बीच बातचीत तक सीमित विषय नहीं रह गया है, बल्कि आम धारणा और जनमत भी इसका हिस्सा बन चुके हैं।

सोशल मीडिया के दौर में जनमत महत्वपूर्ण

जयशंकर ने कहा कि आधुनिक कूटनीति केवल देशों, नेताओं, मंत्रियों या राजनयिकों के बीच होने वाली बातचीत तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया के दौर में जनता की राय का प्रभाव लगातार बढ़ा है। उन्होंने विशेष रूप से लोकतांत्रिक देशों में जनमत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका जैसे देशों को इस बदलती वास्तविकता को ध्यान में रखकर अपने संबंधों को आगे बढ़ाना होगा।

संबंधों को बेहतर बनाने पर जोर

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत चाहता है कि अमेरिका के साथ उसके संबंध आगे बढ़ें और बेहतर दिशा में जाएं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसके लिए दोनों देशों को सामने मौजूद मुद्दों की वास्तविक स्थिति को समझना होगा। जयशंकर के अनुसार, जिन चुनौतियों पर दोनों देश आगे बढ़ने में सफल होंगे, उनका असर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर पड़ेगा।

UNGA 81वें सत्र में शामिल हैं जयशंकर

एस. जयशंकर इन दिनों अमेरिका में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में हिस्सा लेने के लिए गए हुए हैं। उन्होंने 26 सितंबर को यूएनजीए सत्र को संबोधित किया था। अमेरिका यात्रा के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों, व्यापार, टैरिफ, आतंकवाद और लोगों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर उनकी टिप्पणियां दोनों देशों के मौजूदा रिश्तों की चुनौतियों और प्राथमिकताओं को सामने रखती हैं।

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