India slams Pakistan UNSC : UNSC में भारत का पाकिस्तान पर बड़ा हमला, आतंकवाद और मानवाधिकार पाखंड बेनकाब

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के मंच पर भारत ने पाकिस्तान की बोलती बंद करते हुए उसके आतंकवाद और मानवाधिकारों से जुड़े पाखंड को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है! 'राइट ऑफ रिप्लाई' का इस्तेमाल कर भारतीय राजनयिक ने ऐसा क्या कह दिया जिससे पाकिस्तान को मुंह छिपाने की जगह नहीं मिली? जानने के लिए पढ़ें...

India slams Pakistan UNSC

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 21, 2026

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India slams Pakistan UNSC :  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के मंच पर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अब तक का सबसे तीखा और जोरदार हमला बोला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत ने पुख्ता सबूतों के साथ यह उजागर किया कि कैसे पाकिस्तान निर्दोष नागरिकों की बेरहमी से हत्याएं करता है, उन पर हवाई हमले करता है और बड़े पैमाने पर आतंकवाद को बढ़ावा देता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने वैश्विक मंच पर दोटूक शब्दों में कहा कि जो देश खुद मासूम और बेगुनाह लोगों पर बम बरसाता है, उसे दुनिया के सामने मानवाधिकारों की दुहाई देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान का अपने ही नागरिकों और पड़ोसियों के खिलाफ हिंसा तथा सुनियोजित नरसंहार का एक लंबा और काला इतिहास रहा है।

यूनामा की रिपोर्ट का हवाला

सुरक्षा परिषद में “सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा” विषय पर आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण बहस के दौरान भारतीय प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान (UNAMA) की हालिया रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। इस आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के शुरुआती तीन महीनों के भीतर ही पाकिस्तान द्वारा की गई सीमा पार सैन्य आक्रामकता और हिंसा के कारण अफगानिस्तान में 750 से अधिक निर्दोष नागरिक या तो मारे गए हैं या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। रिपोर्ट में दर्ज नागरिक हताहतों से जुड़ी कुल 95 गंभीर घटनाओं में से 94 के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को ही जिम्मेदार ठहराया गया है, जो उनकी हिंसक नीतियों को प्रमाणित करता है।

काबुल अस्पताल पर हवाई हमला

भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की इस घिनौनी करतूत को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बेहद बड़ी विडंबना है कि जिसका खुद का दामन खून से सना है, वह भारत के आंतरिक मामलों पर उंगली उठाने का दुस्साहस कर रहा है। यूनामा की रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने बताया कि इसी साल मार्च में, रमजान के पवित्र महीने के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल के ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ पर एक बर्बर और कायराना हवाई हमला किया था। यह हमला ठीक उस समय किया गया जब मासूम लोग तरावीह की नमाज अदा करके मस्जिद और अस्पताल परिसर से बाहर निकल रहे थे। इस भीषण और अमानवीय हमले में 269 आम नागरिकों की दर्दनाक मौत हो गई और 122 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि वह कोई सैन्य ठिकाना नहीं था।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन

भारत ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अपीलों और मानवीय जिम्मेदारियों को पूरी तरह से ठेंगा दिखाने का गंभीर आरोप लगाया। हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि रात के अंधेरे में पूरी तरह निहत्थे और निर्दोष नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाना और फिर वैश्विक मंचों पर आकर अंतरराष्ट्रीय कानूनों की दुहाई देना पाकिस्तान के चरम पाखंड को दर्शाता है। अस्पताल जैसे संवेदनशील और गैर-सैन्य स्थल पर नमाज के ठीक बाद हमला करना यह साबित करता है कि पाकिस्तानी हुकूमत के मन में मानवीय मूल्यों और जीवन के प्रति कोई सम्मान नहीं है। इस क्रूर सैन्य कार्रवाई के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों का जीवन पूरी तरह तबाह हो गया है।विस्थापन और सीमा पार आतंकवाद: पाकिस्तान की दोहरी नीति पर तीखा प्रहार

इस बहस के दौरान भारत ने सीमा पार से प्रायोजित होने वाले आतंकवाद के ज्वलंत मुद्दे को एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाया। भारतीय प्रतिनिधि ने मांग की कि आतंकवाद को सरकारी नीति के रूप में इस्तेमाल करने वाले और आतंकियों को पनाह देने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की इस निरंतर सैन्य हिंसा और बमबारी के कारण 94 हजार से अधिक अफगान नागरिक अपनी जान बचाने के लिए विस्थापित होने पर मजबूर हुए हैं। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की ये हिंसक हरकतें किसी को अचरज में नहीं डालतीं, क्योंकि यह एक ऐसा मुल्क है जो अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए अपने ही देश के लोगों पर बम गिराने से बाज नहीं आता।

इतिहास के काले पन्ने: 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध और नरसंहार का स्मरण

अपने संबोधन के अंत में भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान को इतिहास के उस काले अध्याय का स्मरण कराया जिसे दुनिया कभी नहीं भूल सकती। उन्होंने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा चलाए गए कुख्यात ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय पाकिस्तानी शासकों ने अपने ही देश के सैनिकों द्वारा 4 लाख से अधिक महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म और लाखों नागरिकों के बेरहम नरसंहार को खुली आधिकारिक मंजूरी दी थी। भारत ने निष्कर्ष निकाला कि इस तरह की घिनौनी और अमानवीय हरकतें साफ दिखाती हैं कि पाकिस्तान दशकों से अपनी आंतरिक और प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए हिंसा का सहारा लेता रहा है। दुनिया अब उसके झूठे प्रोपेगेंडा को पूरी तरह समझ चुकी है।

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