India GDP Growth: दुनियाभर में छाई आर्थिक मंदी, ईरान-यूएस के बीच जारी भीषण युद्ध और आसमान छूती क्रूड ऑयल (कच्चे तेल) की कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वो कर दिखाया है जिससे पूरी दुनिया दंग है। तमाम वैश्विक चुनौतियों और भू-राजनीतिक तनाव को घुटने टेकने पर मजबूर करते हुए भारत की जीडीपी (GDP) ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर ने उम्मीद से कहीं ज्यादा रफ्तार पकड़ी है।
सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा और शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, देश की वास्तविक जीडीपी (Real GDP) में 7.7 प्रतिशत की भारी-भरकम वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि यह पिछले वित्त वर्ष की 7.1% की विकास दर के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत और आक्रामक है। इस ऐतिहासिक उछाल ने साफ कर दिया है कि भारतीय बाजार आज दुनिया का सबसे सुरक्षित और तेजी से बढ़ने वाला निवेश केंद्र बन चुका है।
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मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स (MoSPI) का बड़ा एलान
शुक्रवार को मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लिमेंटेशन (MoSPI) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों ने देश के आर्थिक जानकारों को भी हैरान कर दिया है।
वैश्विक मंदी के दौर में भी भारत ने यह चमत्कारी आंकड़ा कैसे हासिल किया, वो हम आपको आगे बताएंगे… लेकिन उससे पहले यह जान लीजिए कि साल के आखिरी महीनों का रिपोर्ट कार्ड क्या कहता है? मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 की आखिरी तिमाही (Q4) में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.8% की रिकॉर्ड तोड़ दर से बढ़ी है। यह साबित करता है कि वित्त वर्ष के आखिरी तीन महीनों में भी देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर जैसी तमाम आर्थिक गतिविधियां बेहद मजबूत बनी रहीं। जहां एक तरफ दुनिया के बड़े-बड़े विकसित देश आर्थिक तंगी और मंदी की मार झेल रहे हैं, वहीं भारत का यह प्रदर्शन उसकी आंतरिक मजबूती की गवाही दे रहा है।
323 लाख करोड़ के पार पहुंची वास्तविक जीडीपी
अगर हम आंकड़ों के गणित को आसान भाषा में समझें, तो स्थिर (2022-23) कीमतों के आधार पर मापी गई भारत की वास्तविक जीडीपी (Real GDP) वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है।
तुलना के लिए, ठीक एक साल पहले यानी वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 299.89 लाख करोड़ रुपये पर था। यानी एक साल के भीतर ही देश की कुल वेल्थ में एक बहुत बड़ा इजाफा हुआ है। दूसरी ओर, नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP)—जिसमें बाजार की महंगाई का असर भी शामिल होता है—उसने भी लंबी छलांग लगाई है। वित्त वर्ष 2026 में नॉमिनल जीडीपी 8.9% की शानदार बढ़त के साथ 346.36 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है, जो पिछले वित्त वर्ष में 318.07 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई थी।
जीएसटी कलेक्शन और वाहन बिक्री बने मुख्य इंजन
सरकार के मुताबिक, जीडीपी के ये शानदार और भरोसेमंद अनुमान हवा-हवाई नहीं हैं, बल्कि इन्हें देश के कई महत्वपूर्ण जमीनी आर्थिक संकेतकों (Economic Indicators) को परखने के बाद तैयार किया गया है।
इस महा-बढ़त के पीछे देश का दमदार औद्योगिक उत्पादन (IIP), हर महीने रिकॉर्ड तोड़ता जीएसटी (GST) कलेक्शन, दिग्गज भारतीय कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजे, देश में गाड़ियों (वाहनों) की बंपर बिक्री, रेलवे और सड़कों पर होने वाली माल ढुलाई, टेलीकॉम सेवाओं का ताबड़तोड़ उपयोग और बैंकों की लोन देने की मजबूत गतिविधियां शामिल हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में आने वाले जीडीपी आंकड़ों को और अधिक सटीक बनाने के लिए अब औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की बिल्कुल नई सीरीज का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका आधार वर्ष (Base Year) बदलकर 2022-23 कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, अगले वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के महा-आंकड़े 31 अगस्त 2026 को देश के सामने जारी किए जाएंगे।
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