LPG Crises: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत में ईंधन और एलपीजी (LPG) की उपलब्धता को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। जहां एक ओर विपक्ष ने सरकार के दावों की पोल खुलने का आरोप लगाया है, वहीं केंद्र सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी का तीखा प्रहार
बताते चले कि, शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पुणे से आ रही उन खबरों का हवाला दिया जहां ईंधन की कमी के कारण गैस आधारित श्मशानों को बंद करना पड़ा है। प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार ने संसद में 72 दिनों के तेल भंडार और पर्याप्त एलपीजी स्टॉक का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वैश्विक तेल कीमतें कम थीं, तब लाभ जनता को नहीं मिला, लेकिन अब संकट के समय आम आदमी पर सिलेंडर की कीमतों का बोझ डाल दिया गया है।
संजय राउत की चेतावनी
सांसद संजय राउत ने भी इस मुद्दे पर केंद्र को घेरा है। उन्होंने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने देश में घरेलू और कमर्शियल गैस की किल्लत पैदा कर दी है। संजय राउत के अनुसार, सरकार के वे सभी आश्वासन विफल साबित हुए हैं जिनमें कहा गया था कि भारत पर युद्ध का असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि मुंबई समेत कई बड़े शहरों में ईंधन की कमी के कारण रेस्तरां और अन्य उद्योग बंद होने की कगार पर पहुँच गए हैं।
पेट्रोलियम मंत्री का आश्वासन
विपक्ष के हमलों के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए जनता से न घबराने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया बातचीत के माध्यम से बताया कि भारत ने ऊर्जा आयात के लिए वैकल्पिक रास्ते और स्रोत सुरक्षित कर लिए हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की आपूर्ति घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 100% जारी रहेगी। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि उद्योगों को उनकी ज़रूरत का 70-80% हिस्सा ही मिल पाएगा, जो मौजूदा युद्ध की स्थिति में एक बेहतर प्रबंधन है।
प्राकृतिक गैस वितरण की नई प्राथमिकता
सप्लाई चेन में आई बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने ईंधन वितरण प्रबंधन के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है। इस कानून के तहत प्राकृतिक गैस के आवंटन के लिए एक नई प्राथमिकता सूची तैयार की गई है। नए नियमों के अनुसार, घरों में पाइप वाली गैस और वाहनों के लिए सीएनजी को प्राथमिकता दी जाएगी। अन्य क्षेत्रों के लिए पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर कोटा तय किया गया है ताकि सीमित संसाधनों का उचित बंटवारा हो सके।
राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा की रणनीतिक तैयारी
भारत अपनी प्राकृतिक गैस का लगभग 30% हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते से आयात करता है, जो वर्तमान में संघर्ष के कारण जोखिम भरा क्षेत्र बना हुआ है। इस लॉजिस्टिक चुनौती और समुद्री मार्ग के संकट से निपटने के लिए मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत अब अन्य व्यापारिक मार्गों से गैस खरीद रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की स्थिति में भारत की ‘नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी’ को बनाए रखना और भविष्य की जरूरतों के लिए स्टॉक का संतुलन बनाना है।










