India Bangladesh Relations: भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ समय से जारी कूटनीतिक तल्खी अब खत्म होती नजर आ रही है। शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग ने भारतीय नागरिकों के लिए सभी श्रेणियों की वीजा सेवाएं फिर से शुरू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही दिसंबर 2025 से वीजा सेवाओं पर लगा प्रतिबंध आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। इस कदम को दक्षिण एशिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव कम होने के पहले बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला दोनों देशों के बीच भरोसे की बहाली की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान का सत्ता संभालते ही बड़ा फैसला
वीजा सेवाओं को बहाल करने का यह महत्वपूर्ण निर्णय बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के प्रमुख तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के महज कुछ ही दिनों बाद लिया गया है। गौरतलब है कि तारिक रहमान ने 17 फरवरी 2026 को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। चुनाव में मिली भारी जीत के बाद रहमान ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता देगी। बीएनपी के नेतृत्व वाली नई सरकार यह भली-भांति समझती है कि बांग्लादेश के आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत के साथ मधुर संबंध अनिवार्य हैं।
सभी श्रेणियों के वीजा आवेदनों के लिए खुले द्वार
इंडिया टुडे और अन्य राजनयिक सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार सुबह से ही नई दिल्ली स्थित उच्चायोग में कांसुलर सेवाएं पूरी तरह चालू कर दी गईं। अब भारतीय नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा, मेडिकल वीजा और शिक्षा वीजा सहित सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे पहले केवल बिजनेस और वर्क परमिट जैसी सीमित श्रेणियों में ही काम हो रहा था, लेकिन अब सामान्य यात्रियों के लिए भी रास्ते खुल गए हैं। इस फैसले से उन हजारों भारतीयों को बड़ी राहत मिली है जो व्यापार, इलाज या पर्यटन के उद्देश्य से बांग्लादेश की यात्रा करना चाहते हैं।
भारत की ओर से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया और सहयोग का वादा
बांग्लादेश की इस सद्भावना पहल के जवाब में भारत ने भी सकारात्मक रुख अपनाया है। गुरुवार को सिलहट में भारत के वरिष्ठ कांसुलर अधिकारी अनिरुद्ध दास ने संकेत दिया कि नई दिल्ली भी बांग्लादेशी नागरिकों के लिए जल्द ही पूर्ण वीजा सेवाएं बहाल करने की प्रक्रिया में है। बता दें कि दिसंबर में भारत-विरोधी नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद उपजे हिंसक विरोध प्रदर्शनों और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों के कारण सुरक्षा चिंताओं के चलते सेवाओं को सीमित कर दिया गया था। अब स्थिति सामान्य होते देख दोनों पक्ष पुरानी कड़वाहट भूलकर आगे बढ़ने को तैयार हैं।
मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल की चुनौतियों का अंत
मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में काफी ठंडापन देखा गया था। उस दौरान भारत-विरोधी भावनाओं को नियंत्रित करने में प्रशासनिक विफलता और कूटनीतिक दूरियों ने संबंधों को नुकसान पहुँचाया था। यहाँ तक कि यूनुस ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत के बजाय चीन को चुनकर वर्षों पुरानी परंपरा को तोड़ दिया था। हालांकि, तारिक रहमान के आने से यह गतिरोध टूटता दिख रहा है। शपथ ग्रहण समारोह में भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत भी नई सरकार के साथ सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार है।
क्या भारत होगा प्रधानमंत्री तारिक रहमान का पहला विदेश गंतव्य?
राजनयिक गलियारों में अब सबसे बड़ी चर्चा तारिक रहमान के पहले विदेशी दौरे को लेकर है। ओम बिरला ने अपनी मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक व्यक्तिगत पत्र उन्हें सौंपा है, जिसमें रहमान को भारत आने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया है। यदि तारिक रहमान अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के लिए दिल्ली को चुनते हैं, तो यह न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक मजबूत संदेश होगा, बल्कि दक्षिण एशियाई राजनीति में भारत की केंद्रीय भूमिका को भी फिर से स्थापित करेगा।
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