Independence Day : स्वतंत्रता दिवस पर मोहन भागवत का संदेश, बोले – आजादी मिली है इसे सुरक्षित रखना जरूरी

Independence Day: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराया। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि देश को मिली आजादी को सुरक्षित रखना जरूरी है। भागवत ने भारत को सुखी, समृद्ध और सुरक्षित बनाने को हर नागरिक की जिम्मेदारी बताया।

Independence Day

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 15, 2026

Independence Day : देशभर में 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्साह देखने को मिला। इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराया। ध्वजारोहण के बाद उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और आजादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि देश को मिली स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

90 वर्षों के संघर्ष के बाद मिली आजादी

मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि 1857 के विद्रोह से लेकर 1947 में स्वतंत्रता मिलने तक करीब 90 वर्षों तक देशवासियों ने अलग-अलग स्तरों पर संघर्ष किया। इस लंबे दौर में अनेक लोगों ने अपना जीवन देश के लिए समर्पित किया और असंख्य बलिदान दिए। उन्होंने कहा कि इतनी कुर्बानियों के बाद हासिल हुई स्वतंत्रता को केवल याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे हमेशा सुरक्षित और मजबूत बनाए रखना भी जरूरी है।

आजादी को कायम रखना हर नागरिक का दायित्व

RSS प्रमुख ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्त करना एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी, लेकिन आजादी की रक्षा करना लगातार चलने वाली जिम्मेदारी है। उन्होंने देशवासियों से राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उनके मुताबिक भारत को मजबूत बनाने में सरकार के साथ-साथ समाज और प्रत्येक नागरिक की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

भारत को अपने मूल विचारों से जुड़े रहना होगा

मोहन भागवत ने विनायक दामोदर सावरकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश में श्रेष्ठ, महान और कल्याणकारी मूल्यों को स्थापित करने की जिम्मेदारी भारतीयों की ही है। उन्होंने कहा कि भारत स्वतंत्र है और उसकी स्वतंत्रता कायम रहेगी, लेकिन देश को मजबूत, सुरक्षित और खुशहाल बनाने का कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। भारत को अपनी मूल विचारधारा और सिद्धांतों से जुड़े रहते हुए भविष्य की चुनौतियों का सामना करना होगा।

तिरंगे के तीन रंगों का बताया महत्व

संघ प्रमुख ने राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि तिरंगे का केसरिया रंग कर्मशीलता, ज्ञान, त्याग और बलिदान का प्रतीक है। सफेद रंग शांति और शीतलता का संदेश देता है, जबकि हरा रंग समृद्धि और विकास का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि इन रंगों में भारत के जीवन-मूल्यों की व्यापक भावना दिखाई देती है।

अलग विचार, लेकिन राष्ट्र की एकता सर्वोपरि

मोहन भागवत ने कहा कि देश के नागरिकों के विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन यह विविधता भारत की एकता को कमजोर नहीं करती, बल्कि उसकी विशेषता है। उन्होंने तिरंगे के बीच स्थित अशोक चक्र का उदाहरण देते हुए कहा कि चक्र की सभी तीलियां अलग-अलग दिशाओं में जाती हैं, लेकिन उनका केंद्र एक ही है। यही भारत की विविधता में एकता की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण राष्ट्रीय ध्वज के केंद्र में धर्म चक्र को स्थान दिया गया है।

भारत को सुखी, समृद्ध और सुरक्षित बनाने का संकल्प

मोहन भागवत ने कहा कि भारत स्वतंत्र है और हमेशा स्वतंत्र रहेगा, लेकिन देश को सुखी, संपन्न और सुरक्षित बनाने के रास्ते में कई चुनौतियां आएंगी। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें विकास और राष्ट्र निर्माण के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं। ऐसे समय में समाज को एकजुट होकर देशहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।

विश्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए भारत

RSS प्रमुख ने कहा कि भारत की प्रगति केवल देश की सीमाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। भारत को ऐसा राष्ट्र बनना चाहिए जो पूरी दुनिया के लिए उपयोगी योगदान दे सके। उन्होंने भारत के विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही और कहा कि देश की तरक्की का उद्देश्य मानवता के कल्याण में भी योगदान देना होना चाहिए।

आजादी के साथ भविष्य की जिम्मेदारी का संदेश

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मोहन भागवत का संदेश देश की स्वतंत्रता, सुरक्षा, समृद्धि और सामाजिक एकता पर केंद्रित रहा। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन करते हुए नागरिकों से राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए एकजुट प्रयास, मजबूत राष्ट्रीय भावना और अपने मूल मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है।

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