भ्रष्टाचार मामलों में हरियाणा में अब जांच से पहले अनुमति लेना जरूरी

चंडीगढ़. अब सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच एजेंसी सीधे कार्रवाई नहीं कर सकेगी। पहले उच्च अधिकारी से स्वीकृति जरूरी होगी। मगर रंगे हाथ पैसे लेने वाले वाले मामलों में पहले की तरह कार्रवाई जारी रहेगी। हरियाणा सरकार ने अधिकारियों व कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इसके तहत भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर अब सरकारी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ जांच या पूछताछ से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि यह फैसला उन मामलों में लागू

Wrriten By :

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Published On :

जनवरी 11, 2026

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चंडीगढ़.

अब सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर जांच एजेंसी सीधे कार्रवाई नहीं कर सकेगी। पहले उच्च अधिकारी से स्वीकृति जरूरी होगी। मगर रंगे हाथ पैसे लेने वाले वाले मामलों में पहले की तरह कार्रवाई जारी रहेगी। हरियाणा सरकार ने अधिकारियों व कर्मचारियों से संबंधित भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है।

इसके तहत भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर अब सरकारी अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ जांच या पूछताछ से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि यह फैसला उन मामलों में लागू नहीं होगा, जहां अधिकारी व कर्मचारी रंगे हाथ पकड़े जाएंगे। भ्रष्टाचार के मामलों में जांच के लिए केंद्र सरकार ने हरियाणा समेत सभी राज्यों को नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों का अध्ययन करने के बाद हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को जांच से संबंधित एसओपी लागू करने के निर्देश दिए हैं। अब ऐसे मामलों में जांच के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 17ए की पालना जरूरी है। यह एसओपी उन सभी लंबित मामलों में भी लागू होगी, जिसमें अभी तक धारा 17ए के तहत अनुमति नहीं ली गई है।

जांच की अनुमति मुख्य सचिव के स्तर पर ही दी जाएगी। वहीं, दूसरी एजेंसी के मामलों में संबंधित अधिकारी के प्रशासनिक विभाग को ही सक्षम प्राधिकारी माना जाएगा। नई एसओपी का मकसद यही है कि किसी भी अधिकारी को बेवजह प्रताड़ित न किया जाए। पुख्ता सबूत के बाद ही कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए। एसओपी में यह भी प्रावधान किया गया है कि शिकायत की पहले जांच की जाएगी। उसके बाद संबंधित अधिकारी से पूछताछ व जांच के लिए अनुमति मांगी जाएगी। सिंगल विंडो के जरिये ही अनुमति ली जाएगी।

तीन महीने में अनुमति पर लेना होगा फैसला

नई एसओपी में यह भी तय कर दिया गया है कि जांच की अनुमति पर फैसला तीन महीने के भीतर लेना होगा। विशेष परिस्थितियों में एक महीने का समय बढ़ाया जा सकता है, मगर इस बारे में लिखित में बताना होगा। वहीं, एसओपी में यह भी निर्देश दिया गया है कि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों के भ्रष्टाचार के मामलों में जांच की अनुमति की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारी निचले अधिकारी को सौंप सकते हैं। मगर एसओपी के अनुपालन की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक विभाग की रहेगी।

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