
IMD Weather Alert: चक्रवात ‘अर्णब’ के अवशेषों और नए मौसमी तंत्र के सक्रिय होने से देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत के तटों से टकराने के बाद इस तूफान के अवशेष अब उत्तर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इसके प्रभाव से देश के कई राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो चुका है, जिससे आने वाले दिनों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाएगी और उत्तर भारत में विधिवत सर्दी की शुरुआत हो जाएगी।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और स्काईमेट के अनुसार, चक्रवात के अवशेष, बंगाल की खाड़ी में बनने वाले नए मौसमी दबाव और एक नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के संयुक्त प्रभाव से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है।
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किन राज्यों में रहेगा बारिश और खराब मौसम का असर?

मौसमी प्रणालियों के सक्रिय होने से देश के कई हिस्सों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की गई है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भारी बारिश के बाद अब झारखंड और बिहार में भी बारिश शुरू हो चुकी है। मौसम विभाग के मुताबिक, बिहार के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा, पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी अगले दो दिनों तक तेज बारिश के पूरे आसार हैं। उत्तराखंड में भारी से बहुत भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के बिगड़ने और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की प्रबल संभावना है। इसके साथ ही पहाड़ी राज्यों में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) भी हो सकती है, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुँचने की आशंका है। राजधानी दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पूर्वी राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है।

बारिश के थमते ही तेजी से गिरेगा तापमान

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक रुक-रुक कर चलने वाला यह बारिश का दौर जैसे ही थमेगा, उत्तर भारत के तापमान में अचानक से बड़ी गिरावट आएगी। इसी बीच उत्तर भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो रहा है, जो दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के मौसम को प्रभावित करेगा। हालांकि इस नए सिस्टम का दायरा सीमित हो सकता है, लेकिन इसके असर से उत्तर भारत के एक बड़े भूभाग पर पारे में भारी गिरावट दर्ज होगी। सुबह और शाम के वक्त सिहरन बढ़ जाएगी, जिससे लोगों को ठंड के पूरी तरह आ जाने का अहसास होने लगेगा।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के इस मिजाज को देखते हुए अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएं, क्योंकि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुँच सकता है।
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