UP News: दवा की कीमत देख चौंक जाएंगे! खरीद 74 रुपये, MRP पहुंची करीब 5 हजार

अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की खरीद कीमत और MRP के बीच भारी अंतर सामने आया है। FSDA ने 214 अस्पतालों की फार्मेसियों से जुटाए आंकड़ों में 130 दवाओं की जांच की। इनमें 36 दवाओं की MRP खरीद कीमत से 10 गुना से अधिक और कुछ मामलों में 67 गुना तक ज्यादा मिली।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 5, 2026

UP News: अक्सर अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीजों के लिए दवाओं की कीमत चिंता का विषय रहती है,लेकिन अब दवाओं की खरीद कीमत और पैक पर दर्ज अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी के बीच भारी अंतर ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की ओर से मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की फार्मेसियों के निरीक्षण के बाद यह जानकारी सामने आई है. विभाग ने प्रदेश के 214 अस्पतालों की फार्मेसियों से दवाओं और इंजेक्शन की खरीद-बिक्री से जुड़े आंकड़े जुटाकर उनका विश्लेषण किया है.

कई दवाओं की खरीद कीमत के मुकाबले MRP कई गुना अधिक

UP News
अस्पताल की फार्मेसी और दवाओं की कीमत

आपको बता दे कि, एफएसडीए ने जांच के दौरान 130 दवाओं और इंजेक्शन के खरीद मूल्य और MRP का तुलनात्मक अध्ययन किया। इसमें 36 दवाएं ऐसी मिली, जिनकी MRP फार्मेसी की खरीद कीमत से 10 गुना से अधिक थी। कुछ मामलों में यह अंतर 67 गुना तक पहुंच गया। जांच में गंभीर संक्रमण, आईसीयू और अन्य जटिल चिकित्सकीय परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाली कई इंजेक्टेबल दवाएं भी शामिल हैं। इससे दवाओं की कीमत तय करने और अस्पतालों में उनकी बिक्री को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

74 रुपये की खरीद, पैक पर दर्ज MRP करीब 5 हजार रुपये

जांच में बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमिक्सिन-बी इंजेक्शन गुफिपोल 5 लाख यूनिट की खरीद कीमत 74.09 रुपये दर्ज मिली, जबकि इसकी MRP 4,980.94 रुपये थी। इसी दवा के गुफिपोल 5 लाख के एक अन्य आंकड़े में खरीद कीमत 90 रुपये और MRP 4,528.10 रुपये दर्ज की गई। इन आंकड़ों में खरीद मूल्य और पैक पर दर्ज MRP के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

थ्री-वे स्टॉपकॉक समेत उपकरणों के दामों की भी जांच

एफएसडीए के विश्लेषण में केवल दवाएं और इंजेक्शन ही नहीं, बल्कि अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले कुछ मेडिकल डिवाइसेज की खरीद कीमत और MRP के बीच भी अंतर सामने आया। एक थ्री-वे स्टॉपकॉक की खरीद कीमत 6.40 रुपये दर्ज की गई, जबकि उस पर MRP 163 रुपये थी। इसी तरह एक अन्य मेडिकल डिवाइस की खरीद कीमत 20.95 रुपये मिली, जबकि उसकी MRP 500 रुपये दर्ज थी।

56 रुपये में खरीदा गया इंजेक्शन, MRP हजारों रुपये

UP News
थ्री-वे स्टॉपकॉक समेत उपकरणों के दामों की भी जांच

लिवर की गंभीर बीमारी से जुड़ी कुछ चिकित्सकीय स्थितियों में इस्तेमाल होने वाले टर्लीप्रेसिन इंजेक्शन की खरीद कीमत 56 रुपये दर्ज की गई, जबकि उसकी MRP 3,050 रुपये पाई गई। इसी दवा के दूसरे ब्रांड टेरोनिम 10 एमएल की खरीद कीमत भी 56 रुपये थी, जबकि MRP 2,600 रुपये दर्ज थी। एफएसडीए के विश्लेषण में ऐसे कई मामलों को शामिल किया गया है, जिनमें खरीद और अधिकतम खुदरा मूल्य के बीच उल्लेखनीय अंतर दिखाई दिया।

एंटीबायोटिक और गंभीर संक्रमण की दवाओं में भी बड़ा अंतर

गंभीर संक्रमणों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली एंटीबायोटिक दवाओं में भी खरीद मूल्य और MRP का बड़ा अंतर सामने आया। कोलिस्टिमेथेट सोडियम 4.5 एमआईयू की खरीद कीमत 210 रुपये दर्ज थी, जबकि इसकी MRP 9,702.31 रुपये थी। वहीं, टिगेसाइक्लिन 50 एमजी इंजेक्शन की खरीद कीमत 154.54 रुपये थी, जबकि इसकी MRP 7,110.47 रुपये दर्ज पाई गई। ये दवाएं गंभीर और जटिल संक्रमणों के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं।

कैंसर और जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में भी सामने आया अंतर

UP News

जांच के दौरान कैंसर और जीवनरक्षक उपचार में इस्तेमाल होने वाली कुछ महंगी दवाओं में भी खरीद कीमत और MRP के बीच अंतर दर्ज किया गया। बेवाकिजुमैब 400 एमजी की खरीद कीमत 7,541.10 रुपये थी, जबकि MRP 69,995 रुपये दर्ज मिली। वहीं, इनोजा 1 एमजी की खरीद कीमत 2,07,504 रुपये और MRP 3,02,610 रुपये दर्ज थी। सिमुलेक्ट 200 एमजी इंजेक्शन की खरीद कीमत 72,700.95 रुपये और MRP 95,420 रुपये पाई गई।

ऊंची MRP के पीछे क्या है वजह?

दवाओं की खरीद कीमत और पैक पर दर्ज MRP में इतना बड़ा अंतर सामने आने के बाद एफएसडीए अब इस पूरे मामले का नए सिरे से विश्लेषण कर रहा है। विभाग यह समझने की कोशिश कर रहा है कि जब अस्पतालों को कई दवाएं बेहद कम कीमत पर उपलब्ध होती हैं, तो उनके पैक पर MRP कई गुना अधिक क्यों दर्ज रहती है। विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि कहीं कुछ मामलों में ऊंची MRP डिस्काउंट की गुंजाइश बनाए रखने के लिए तो निर्धारित नहीं की जाती।

दवाओं की कीमतों को लेकर बढ़ी निगरानी

UP News

एफएसडीए के इस विश्लेषण ने अस्पतालों की फार्मेसी में दवाओं और मेडिकल डिवाइसेज की कीमतों को लेकर एक अहम तस्वीर सामने रखी है। हालांकि, केवल खरीद मूल्य और MRP के अंतर से किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अलग-अलग दवाओं में निर्माता, आपूर्ति व्यवस्था, कर, वितरण लागत और अन्य व्यावसायिक कारकों का प्रभाव हो सकता है। ऐसे में विभाग के आगे के विश्लेषण और कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि इन बड़े मूल्य अंतरों के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और मरीजों पर इसका कितना असर पड़ रहा है।