मुंबई में घर की कीमतों में इजाफा, ईरान-इजरायल तनाव का पड़ा असर

मुंबई मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले से ही आसमान छू रहीं हैं और अब इनके रेट्स में और तेजी आ सकती है.  Anarock Group की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों (MMR) में घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहा तनाव है, जिसकी वजह से निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान को लाने-ले जाने का खर्च और कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची इमारतों को बनाने का खर्च पहले ही करीब ₹50 प्रति वर्ग

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Published On :

मार्च 21, 2026

मुंबई

मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले से ही आसमान छू रहीं हैं और अब इनके रेट्स में और तेजी आ सकती है.  Anarock Group की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों (MMR) में घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहा तनाव है, जिसकी वजह से निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान को लाने-ले जाने का खर्च और कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची इमारतों को बनाने का खर्च पहले ही करीब ₹50 प्रति वर्ग फुट तक बढ़ चुका है. जानकारों का मानना है कि बिल्डर्स अब इस बढ़े हुए खर्च की भरपाई घर खरीदारों से करेंगे, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो बजट होम या मध्यम आय वर्ग के घर तलाश रहे हैं। 

निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख इनपुट्स की कीमतों में भी तीखी वृद्धि देखी गई है. स्टील की कीमतें लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर ₹62 से ₹72 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं, जबकि हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतें ₹51 से ₹56 प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई हैं, जिनमें आगे और बढ़ोतरी की आशंका है। 

खाड़ी देशों में उत्पादन में कटौती के चलते एल्युमीनियम की कीमतें ₹3.5 लाख प्रति टन तक जा पहुंची हैं, जिसका उपयोग इमारतों के बाहरी हिस्सों और मेट्रो स्टेशनों जैसे बुनियादी ढांचे में प्रमुखता से होता है. साथ ही, सड़क निर्माण के लिए अनिवार्य बिटुमेन की कीमतें भी बढ़कर ₹48 से ₹51 प्रति किलोग्राम हो गई हैं। 

लॉजिस्टिक्स में आ रही हैं बाधाएं
लागत में इस अप्रत्याशित वृद्धि का सबसे बड़ा कारण लॉजिस्टिक्स में आने वाली बाधाएं हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बाधित होने के कारण शिपमेंट्स को अब 'केप ऑफ गुड होप' के लंबे रास्ते से भेजा जा रहा है, जिससे समुद्री मार्ग की दूरी 6,000 से 10,000 समुद्री मील बढ़ गई है और डिलीवरी में 10 से 20 दिनों की देरी हो रही है. इस बदलाव ने प्रति कंटेनर माल ढुलाई की लागत में ₹1.5 से ₹3.5 लाख की बढ़ोतरी कर दी है. इसके अलावा, ₹1 लाख प्रति टन के पार पहुंचे समुद्री ईंधन के ऊंचे दाम, युद्ध अधिभार (War surcharges) और बढ़ते बीमा प्रीमियम ने डेवलपर्स की वित्तीय चुनौतियों को और अधिक गंभीर बना दिया है।  

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