Holi in Pakistan: क्या पाकिस्तान में भी होती है होली? देखिए सबसे रंगीन जश्न की जगह

पाकिस्तान में होली का त्योहार भी बड़े उत्साह से मनाया जाता है। खासतौर पर Lahore और Karachi में यह रंगों का जश्न देखने लायक होता है। भारत की तरह ही यहां भी लोग रंगों में सराबोर होकर खुशियां मनाते हैं। जानिए पाकिस्तान में Holi Celebration की सबसे रंगीन जगहें और परंपराएं।

क्या पाकिस्तान में भी होती है होली?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

फ़रवरी 6, 2026

Holi in Pakistan: भारत में होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है। यह उत्सव खुशी, नई शुरुआत और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान में भी होली का जश्न मनाया जाता है? वहां हिंदू समुदाय हर साल इस पर्व को पूरे उत्साह और परंपरा के साथ मनाता है। आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में होली कहां और कैसे मनाई जाती है।

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पाकिस्तान में होली का आयोजन

पाकिस्तान में होली खासतौर पर सिंध प्रांत में मनाई जाती है। यह त्योहार मार्च की शुरुआत में आता है और इस साल 4 मार्च को मनाया जा रहा है। भले ही यह अल्पसंख्यक समुदाय का त्योहार है, लेकिन इसकी धूम पूरे क्षेत्र में देखने को मिलती है। स्थानीय प्रशासन भी सुरक्षा और व्यवस्था के लिए सहयोग करता है, जिससे उत्सव शांतिपूर्ण और आनंदमय बन सके।

कराची का सबसे बड़ा उत्सव

पाकिस्तान में होली का सबसे बड़ा आयोजन कराची में होता है। यहां का मुख्य केंद्र ऐतिहासिक श्री स्वामीनारायण हिंदू मंदिर है। हर साल सैकड़ों भक्त यहां इकट्ठा होते हैं। उत्सव की शुरुआत होलिका दहन से होती है और इसके बाद रंगों से खेलना, भक्ति गीत गाना, नृत्य करना और सामुदायिक भोज का आयोजन होता है। कराची की होली विशेष इसलिए मानी जाती है क्योंकि इसमें शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग शामिल होते हैं और यह सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन जाती है।

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मीठी: सांप्रदायिक सद्भाव का उदाहरण

क्या पाकिस्तान में भी होती है होली?
क्या पाकिस्तान में भी होती है होली?

सिंध का मीठी शहर हिंदू-मुस्लिम एकता का मॉडल माना जाता है। यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं और होली को धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर सांस्कृतिक त्योहार के रूप में देखा जाता है। मुस्लिम निवासी भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। मटकी फोड़ जैसी पारंपरिक गतिविधियों में दोनों समुदाय मिलकर हिस्सा लेते हैं, जिससे सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का संदेश मिलता है।

मुल्तान की ऐतिहासिक जड़ें

मुल्तान में होली का गहरा ऐतिहासिक महत्व है। परंपरा के अनुसार, इस त्योहार की शुरुआत प्राचीन प्रहलाद पुरी मंदिर से हुई थी। यह स्थान पौराणिक कथा में प्रहलाद और भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार से जुड़ा हुआ है। हालांकि आज यह मंदिर खंडहर में बदल चुका है, लेकिन होली से इसका संबंध अब भी क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है।

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अन्य शहरों में होली

कराची, मीठी और मुल्तान के अलावा पाकिस्तान के अन्य शहरों जैसे लाहौर, रावलपिंडी और बलूचिस्तान के हिंदू बहुल इलाकों में भी होली मनाई जाती है। भले ही इन जगहों पर उत्सव का पैमाना छोटा होता है, लेकिन गुलाल लगाना, गाना-बजाना, नृत्य करना और मिठाइयां बांटना जैसी परंपराएं यहां भी जीवित हैं।