Plane Hijacking History : विमान हाइजैकिंग यानी विमान अपहरण का इतिहास कई दशकों पुराना है।हाल ही में दुबई से तेल अवीव के लिए उड़ान भरने वाली फ्लाईदुबई में सह-पायलट द्वारा कैप्टन पर हमले की घटना के बाद, यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा एक पुराना और गंभीर सवाल फिर खड़ा कर दिया है। अब सवाल है कि क्या विमान का क्रू ही कभी हाइजैकिंग या क्रैश की वजह बन सकता है? दुनिया में पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां पायलट या सह-पायलट की लापरवाही या संदिग्ध हरकतों से विमानों और यात्रियों की जान खतरे में पड़ी।
केवल इतना ही नहींं दुनियाभर में राजनीतिक मांगों, कैदियों की रिहाई, फिरौती और आतंकी उद्देश्यों से विमान अपहरण की अनेक घटनाएं सामने आईं। कुछ घटनाएं यात्रियों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के लिए बड़े बदलाव का कारण बनीं। भारत भी कई चर्चित हाइजैकिंग मामलों का गवाह रहा है।

1931 में दर्ज हुआ शुरुआती विमान अपहरण प्रयास
21 फरवरी 1931 को पेरू में फोर्ड ट्राई-मोटर विमान से जुड़ी घटना विमान अपहरण के शुरुआती दर्ज प्रयासों में मानी जाती है। सशस्त्र क्रांतिकारियों ने पायलट को विमान अपनी इच्छित दिशा में उड़ाने के लिए कहा था। इस घटना ने उस समय विमानन क्षेत्र के सामने मौजूद नए सुरक्षा खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया।

1970 में एक साथ चार अंतरराष्ट्रीय विमान निशाने पर
6 सितंबर 1970 को डॉसन फील्ड्स हाइजैकिंग ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। PFLP से जुड़े अपहरणकर्ताओं ने एक ही दिन में कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को निशाना बनाया। इनमें TWA, Swissair, Pan Am और El Al से जुड़ी उड़ानें शामिल थीं। एक साथ कई विमानों के अपहरण ने अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा के सामने गंभीर चुनौती पेश की।

डीबी कूपर मामला आज भी बना हुआ है रहस्य
24 नवंबर 1971 को Boeing 727 विमान में सवार एक व्यक्ति ने डैन कूपर नाम का इस्तेमाल करते हुए फिरौती की मांग की। उसे 2 लाख डॉलर और पैराशूट दिए गए। इसके बाद उसने उड़ते विमान से पैराशूट के जरिए छलांग लगा दी। जांच के बावजूद उसके बारे में अंतिम रूप से कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया और यह मामला विमानन इतिहास के चर्चित रहस्यों में बना रहा।

एंटेबे अपहरण के बाद शुरू हुआ बड़ा बचाव अभियान
27 जून 1976 को Air France Flight 139 का अपहरण कर उसे युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट ले जाया गया। यात्रियों को बंधक बनाए जाने के बाद इजराइली कमांडो ने सैन्य अभियान चलाया। इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में बंधकों को छुड़ाया गया। एंटेबे ऑपरेशन को विमान अपहरण के बाद किए गए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बचाव अभियानों में गिना जाता है।

Lufthansa Flight 181 में GSG-9 ने यात्रियों को बचाया
13 अक्टूबर 1977 को Lufthansa Flight 181 को अपहरणकर्ताओं ने अपने कब्जे में ले लिया। विमान को अंततः सोमालिया के मोगादिशु ले जाया गया। इसके बाद जर्मनी की विशेष बल इकाई GSG-9 ने कार्रवाई की और यात्रियों को मुक्त कराया। इस अभियान ने विमान अपहरण की परिस्थितियों में विशेष बलों की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।

TWA Flight 847 में 17 दिनों तक चला संकट
14 जून 1985 को TWA Flight 847 का अपहरण किया गया। विमान को बेरूत और अल्जीयर्स के बीच ले जाया गया और यात्रियों को लंबे समय तक बंधक बनाकर रखा गया। इस घटना के दौरान एक अमेरिकी नौसेना गोताखोर की हत्या कर दी गई थी। लंबे समय तक चले इस संकट ने विमान अपहरण से निपटने की अंतरराष्ट्रीय रणनीतियों पर चर्चा तेज की।

कराची में Pan Am Flight 73 पर हमला
5 सितंबर 1986 को Pan Am Flight 73 को कराची में आतंकवादियों ने अपने कब्जे में ले लिया। इस घटना में फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा भानोट ने यात्रियों की मदद करने और उन्हें बचाने में महत्वपूर्ण साहस दिखाया। उनकी भूमिका के कारण उन्हें बाद में व्यापक सम्मान मिला। यह घटना भारत और अंतरराष्ट्रीय विमानन इतिहास में विशेष रूप से याद की जाती है।

9/11 ने विमान सुरक्षा का पूरा ढांचा बदल दिया
11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमलों के दौरान चार वाणिज्यिक विमानों का अपहरण किया गया। इनमें दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराए, जबकि एक विमान पेंटागन से टकराया। चौथा विमान पेंसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस घटना के बाद अमेरिका सहित कई देशों ने एयरपोर्ट और विमान सुरक्षा व्यवस्था को बड़े स्तर पर मजबूत किया।

2016 में EgyptAir Flight 181 का मामला
29 मार्च 2016 को EgyptAir Flight 181 को एक व्यक्ति ने अपने कब्जे में लेकर साइप्रस के लारनाका एयरपोर्ट पर उतरने के लिए मजबूर किया। आरोपी ने कथित तौर पर नकली विस्फोटक बेल्ट पहनी थी। बाद में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। जांच में यह मामला आतंकवादी हमले के बजाय व्यक्तिगत कारणों से जुड़ा बताया गया।

1971 में ‘गंगा’ विमान को पाकिस्तान ले जाया गया
भारत में चर्चित शुरुआती घटनाओं में 30 जनवरी 1971 का इंडियन एयरलाइंस ‘गंगा’ विमान अपहरण शामिल है। श्रीनगर से जम्मू जा रहे विमान को हाईजैक कर लाहौर ले जाया गया। वहां विमान को जला दिया गया। इस घटना के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच विमानन संबंधों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण बने।

1981 में Indian Airlines Flight 423 का अपहरण
29 सितंबर 1981 को Indian Airlines Flight 423 को श्रीनगर से दिल्ली जाते समय हाईजैक किया गया और विमान को लाहौर ले जाया गया। घटना के दौरान यात्रियों को बंधक बनाया गया। बाद में कमांडो कार्रवाई के जरिए यात्रियों को सुरक्षित छुड़ाया गया। यह मामला उस दौर में भारत से जुड़ी प्रमुख विमान अपहरण घटनाओं में शामिल रहा।

1984 में दो भारतीय उड़ानें हाईजैक हुईं
5 जुलाई 1984 को Indian Airlines Flight 405 से जुड़ी हाइजैकिंग में विमान को लाहौर ले जाया गया और यात्रियों को बाद में सुरक्षित रिहा कराया गया। इसके कुछ सप्ताह बाद 24 अगस्त 1984 को Indian Airlines Flight 421 को चंडीगढ़ से उड़ान भरने के बाद हाईजैक कर दुबई ले जाया गया। बातचीत के बाद यात्रियों को छोड़ दिया गया।
1993 में हाइजैक की कोशिश और NSG कार्रवाई
22 जनवरी 1993 को Indian Airlines Flight 810 में फर्जी बम दिखाकर विमान को हाईजैक करने की कोशिश की गई। बाद में आरोपी ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसी वर्ष 24 अप्रैल को Indian Airlines Flight 427 को दिल्ली से श्रीनगर जाते समय हाईजैक कर अमृतसर उतारा गया। NSG कमांडो कार्रवाई में अपहरणकर्ता मारा गया और यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया।

IC-814 कंधार अपहरण
24 दिसंबर 1999 को Kathmandu से Delhi जा रही IC-814 फ्लाइट का अपहरण कर उसे कंधार ले जाया गया। यात्रियों की रिहाई के लिए भारत सरकार को तीन आतंकियों को छोड़ना पड़ा, जिनमें मसूद अजहर भी शामिल था। यह घटना भारत की विमान सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी नीति के इतिहास में महत्वपूर्ण पड़ाव बनी।
1960 से 1980 के बीच हाइजैकिंग के प्रमुख उद्देश्य
1960 से 1980 के दौर में विमान अपहरण की कई घटनाओं के पीछे राजनीतिक मांगें, राजनीतिक शरण हासिल करना या कैदियों की रिहाई जैसे उद्देश्य बताए जाते हैं। उस समय विमान सुरक्षा और कॉकपिट सुरक्षा के मौजूदा इंतजाम आज की तुलना में सीमित थे। इसी कारण कई देशों को विमान अपहरण से निपटने के लिए नए सुरक्षा उपाय विकसित करने पड़े।
9/11 के बाद कॉकपिट सुरक्षा हुई अधिक सख्त
2001 के बाद विमानन सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए। कॉकपिट के दरवाजों को मजबूत और सुरक्षित बनाने, यात्रियों तथा सामान की जांच कड़ी करने और सुरक्षा प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। एयरपोर्ट सुरक्षा में तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का इस्तेमाल भी बढ़ा। इन बदलावों का उद्देश्य विमान में अनधिकृत प्रवेश और अपहरण की संभावनाओं को कम करना रहा।
विमान हाइजैकिंग का इतिहास सुरक्षा बदलावों की कहानी भी है
दशकों में सामने आई हाइजैकिंग की घटनाओं ने विमानन उद्योग को सुरक्षा के नए तरीकों पर काम करने के लिए मजबूर किया। 1931 के शुरुआती प्रयास से लेकर 9/11 और उसके बाद के मामलों तक विमान सुरक्षा लगातार विकसित हुई है। आज कॉकपिट सुरक्षा, एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान और आपातकालीन प्रतिक्रिया को विमानन सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्सों के रूप में देखा जाता है।
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