जमशेदपुर में 24 अवैध बिल्डिंग ध्वस्त करने का हाई कोर्ट ने दिया आदेश

रांची. झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में जमशेदपुर में अवैध निर्माण मामले कोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी की याचिका खारिज करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि अगर अवैध निर्माण करने वाला कोई भी व्यक्ति कोर्ट में याचिका दाखिल करता है तो उसपर जुर्माना लगाया जाएगा। अदालत ने कहा कि किसी ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है, जिससे यह पता चल सके कि उन्होंने नियमानुसार निर्माण किया है। अवैध निर्माण को

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Published On :

जनवरी 29, 2026

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रांची.

झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में जमशेदपुर में अवैध निर्माण मामले कोर्ट के आदेश के खिलाफ दाखिल कई याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी की याचिका खारिज करते हुए उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि अगर अवैध निर्माण करने वाला कोई भी व्यक्ति कोर्ट में याचिका दाखिल करता है तो उसपर जुर्माना लगाया जाएगा।

अदालत ने कहा कि किसी ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है, जिससे यह पता चल सके कि उन्होंने नियमानुसार निर्माण किया है। अवैध निर्माण को बचाने का अधिकार क्यों चाहिए? इनके चलते किसी को पानी और किसी को सूर्य की रोशन नहीं मिली रही है।
ईमानदार लोगों का जीवन बर्बाद हो रहा है। कोर्ट इन्हें राहत नहीं दे सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि पूर्व का आदेश हाई कोर्ट की बनाई अधिवक्ताओं की कमेटी, प्रार्थी और प्रतिवादियों का पक्ष सुनने के बाद ही दिया गया है। वकीलों की कमेटी ने कहा है कि शहर में हुए अवैध निर्माण को तोड़ना ही एक मात्र विकल्प है।

जेएनएसी की सांठगांठ पर फटकार
कोर्ट ने एक बार फिर कहा कि ऐसा करने के लिए जेएनएसी की भरपूर सांठगांठ रही है। अदालत ने कहा कि नौ मार्च तक जेएनएसी 24 अवैध निर्माण को ध्वस्त कर शपथ पत्र दाखिल करे। अगली सुनवाई नौ मार्च को होगी। आदेश के खिलाफ 10 भवन मालिकों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जमशेदपुर में अवैध निर्माण हटाने की मांग को लेकर राकेश कुमार झा की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। उनकी ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माण एक माह में ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जेएनएसी को हर संभव सहयोग प्रदान करे। कोर्ट ने नगर विकास सचिव, जमशेदपुर के उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक को जेएनएसी को सहयोग देने में किसी भी प्रकार की कमी के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया है।

अवैध निर्माणों के प्रति किसी प्रकार की दया नहीं
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर यह कहा है कि अब अवैध निर्माणों के प्रति किसी भी प्रकार की दया दिखाने का समय नहीं है। इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण संबंधित वैधानिक प्राधिकरणों की मिलीभगत या कम से कम उनकी घोर निष्क्रियता के बिना संभव नहीं हैं। कुछ निर्णयों में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों में उन नगर निकायों या प्राधिकरणों के विरुद्ध भी आदेश पारित किए जाने चाहिए, जिन्हें इस तरह के अवैध निर्माणों को रोकने का दायित्व सौंपा गया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने जांच के लिए तीन अधिवक्ताओं की एक समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि निजी प्रतिवादियों द्वारा किए गए निर्माण कानून के अनुरूप नहीं हैं। समिति ने यह भी पाया कि भवन उपनियमों का पालन नहीं होना और संबंधित अधिकारियों की प्रभावी निगरानी नहीं होना ही इस स्थिति के मुख्य कारण हैं, जिसके चलते ईमानदार और कानून का पालन करने वाले नागरिक पीड़ित हो रहे हैं।

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