Haryana News: कुश्ती जगत में खिलाड़ियों की आयु से जुड़े दस्तावेजों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कथित तौर पर गलत जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर आयु छिपाकर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के आरोपों के बीच भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) द्वारा पांच पहलवानों पर चार साल का प्रतिबंध लगाए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले का हरियाणा कुश्ती संघ ने विरोध जताया है और मामले को महासंघ के समक्ष उठाने की तैयारी शुरू कर दी है।
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हरियाणा कुश्ती संघ ने प्रतिबंध
हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष रमेश बोहर का मानना है कि युवा खिलाड़ियों पर सीधे चार साल का प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। उनका कहना है कि अतीत में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें खिलाड़ियों की आयु संबंधी विसंगतियों की जांच के बाद उन्हें संशोधित आयु निर्धारण के आधार पर दोबारा अवसर दिया गया था। बोहर के अनुसार, यदि किसी खिलाड़ी के दस्तावेजों में त्रुटि पाई जाती है तो पहले उसकी आयु का वैज्ञानिक और आधिकारिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इसके बाद नियमों के अनुसार उचित निर्णय लिया जाना चाहिए, न कि सीधे लंबे समय के लिए प्रतिबंध लगाया जाए।
एशियन अंडर-20 ट्रायल्स के विजेता भी कार्रवाई
हाल ही में भारतीय कुश्ती महासंघ ने एशियन अंडर-20 ट्रायल्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवान दीपांशु समेत पांच खिलाड़ियों पर कार्रवाई की है। महासंघ का आरोप है कि इन खिलाड़ियों के जन्म प्रमाण पत्रों में अनियमितताएं पाई गई हैं। इसके आधार पर सभी पर चार वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया है।
प्रतिबंधित खिलाड़ियों की सूची में दीपांशु, तनुज आंतिल, बलजोत सिंह, निखिल दलाल और साकेत के नाम शामिल हैं। इस फैसले का सबसे बड़ा असर दीपांशु पर पड़ा है, जिन्हें आगामी एशियन चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया है।
एशियन चैंपियनशिप टीम में हुआ बदलाव
प्रतिबंध के बाद दीपांशु का नाम भारतीय टीम से हटा दिया गया है। उनकी जगह पवन बालाजी को टीम में शामिल किया गया है। यह प्रतियोगिता थाईलैंड में आयोजित होनी है और भारतीय दल इसमें भाग लेने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में अंतिम समय में हुए इस बदलाव ने खेल जगत का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
खिलाड़ियों को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
महासंघ ने कार्रवाई के साथ-साथ सभी संबंधित खिलाड़ियों को कारण बताओ नोटिस भी भेजा है। खिलाड़ियों से 10 जून तक अपना पक्ष रखने और आरोपों का जवाब देने को कहा गया है। इसके बाद महासंघ आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
रमेश बोहर ने बताया कि जिन खिलाड़ियों के दस्तावेजों पर सवाल उठाए गए हैं, उनके जन्म प्रमाण पत्र दिल्ली से जारी हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले 800 से अधिक पहलवानों के दस्तावेजों में इसी तरह की अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे मामलों में आयु सत्यापन के बाद खिलाड़ियों को दोबारा प्रतिस्पर्धा का मौका दिया गया था। अब देखना होगा कि खिलाड़ियों के जवाब और राज्य संघ की आपत्तियों के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ इस मामले में आगे क्या निर्णय लेता है।
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