Haryana News: हरियाणा में प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर बड़ी राहत, बेटी के बच्चों को भी मिलेगी स्टांप ड्यूटी में छूट

हरियाणा सरकार ने संपत्ति हस्तांतरण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब परिवार के भीतर प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर मिलने वाली स्टांप ड्यूटी छूट का लाभ नाती-नातिन को भी मिलेगा। पहले नियमों की भाषा को लेकर भ्रम था, लेकिन नए स्पष्टीकरण के बाद लाखों परिवारों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

हरियाणा में प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर बड़ी राहत

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 19, 2026

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Haryana News: हरियाणा सरकार ने परिवार के बीच संपत्ति हस्तांतरण को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण जारी कर दिया है। अब माता-पिता या अन्य पात्र पारिवारित सदस्य अपनी अचल संपत्ति बेटी के बच्चों यानी नाती-पोतों के नाम आजीवन हस्तांतरित करते हैं, तो उन्हें भी 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट का लाभ मिलेगा। सरकार के इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें पहले नियमों की भाषा को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

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पुरानी अधिसूचना में थी भाषा की उलझन

हरियाणा सरकार ने इस बदलाव के पीछे 2014 की अधिसूचना के हिंदी अनुवाद में मौजूद भाषाई अस्पष्टता को वजह बताया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त सुमिता मिश्रा के मुताबिक, सरकार ने इस भ्रम को दूर करने के लिए आधिकारिक तौर पर सुधार जारी किया है। उन्होंने बताया कि 16 जून 2014 को हरियाणा सरकार ने इंडियन स्टांप एक्ट, 1899 की धारा 9 के तहत परिवार के भीतर संपत्ति हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क में पूरी छूट देने का प्रावधान किया था।

किन रिश्तेदारों को मिलता है लाभ?

इस व्यवस्था के तहत संपत्ति का मालिक अपने जीवनकाल में खून के रिश्तों से जुड़े कुछ पारिवारिक सदस्यों के नाम अचल संपत्ति हस्तांतरित कर सकता है। ऐसे मामलों में 100 प्रतिशत स्टांप शुल्क माफी का प्रावधान है। इसमें माता-पिता, बच्चे, पोते-पोतियां, भाई-बहन और पति या पत्नी जैसे रिश्ते शामिल हैं। इसका उद्देश्य परिवार के भीतर संपत्ति के हस्तांतरण को आसान बनाना और उस पर लगने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करना है।

बेटी के बच्चों को लेकर क्यों पैदा हुआ विवाद?

असल परेशानी 2014 की अधिसूचना के हिंदी और अंग्रेजी संस्करणों में इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर सामने आई। अंग्रेजी संस्करण में पोते-पोतियों के लिए व्यापक रूप से ‘Grandchildren’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था। वहीं हिंदी संस्करण में केवल ‘पौत्र-पौत्री’ शब्द लिखा गया था। आम तौर पर पौत्र-पौत्री का अर्थ बेटे के बच्चों से लिया जाता है। इस शब्दावली के कारण कई स्थानीय उप-पंजीयक कार्यालयों में भ्रम की स्थिति बनी। परिणामस्वरूप कुछ मामलों में बेटी के बच्चों यानी नाती-नातिन को स्टांप शुल्क में मिलने वाली छूट का लाभ नहीं मिल पाया।

अब नाती-नातिन भी दायरे में

इस समस्या को खत्म करने के लिए हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अब शुद्धि-पत्र जारी किया है। इसमें अधिसूचना की भाषा को स्पष्ट करते हुए ‘पौत्र-पौत्री’ शब्द को विस्तारित किया गया है। अब इसमें ‘पौत्र-पौत्री, दोहता-दोहती/नाती-नातिन’ को शामिल किया गया है। यानी बेटे और बेटी, दोनों के बच्चों को समान रूप से स्टांप शुल्क छूट का लाभ मिल सकेगा।

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परिवारों को क्या फायदा होगा?

सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद परिवार के भीतर संपत्ति के आजीवन हस्तांतरण में बेटे और बेटी के बच्चों के बीच किसी तरह का अंतर नहीं रहेगा। पात्र मामलों में संपत्ति हस्तांतरण पर पूरी स्टांप ड्यूटी माफ होगी। इस फैसले का सीधा फायदा उन परिवारों को मिलेगा जो अपने जीवनकाल में संपत्ति अगली पीढ़ी के नाम करना चाहते हैं। सरकार का कहना है कि भाषा से पैदा हुई अस्पष्टता को दूर करके अब नियम को ज्यादा स्पष्ट और समान बनाया गया है।