Haryana Power Crisis: हरियाणा में बिजली हड़ताल से हाहाकार, कई शहरों में सड़क जाम

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने कई शहरों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है। गुरुग्राम में फ्लाईओवर पर जाम लगा, नूंह में पानी का संकट गहराया और करनाल में लोग सड़क पर उतर आए। निजीकरण के विरोध में जारी हड़ताल के बीच सवाल है कि बिजली आपूर्ति कब बहाल होगी?

Haryana Power Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 23, 2026

Haryana Power Crisis : हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण के फैसले के विरोध में बिजली निगम के कर्मचारियों ने 22 से 24 अक्टूबर तक प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपने के फैसले से कर्मचारी संगठन नाराज हैं। हड़ताल का असर गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और करनाल समेत कई क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को पानी, इंटरनेट और रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली न आने से लोगों का गुस्सा बढ़ गया है और उन्होंने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया है।

गुरुग्राम में ग्रामीणों का प्रदर्शन, दौलताबाद फ्लाईओवर पर जाम

गुरुग्राम के भीमगढ़ खेड़ी इलाके में बिजली आपूर्ति बाधित होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गईं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रात 11 बजे से बिजली नहीं थी और 18 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं हुई। बिजली विभाग के अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाने से नाराज सैकड़ों ग्रामीण दौलताबाद फ्लाईओवर पर एकत्र हुए और धरना देकर यातायात बाधित कर दिया। सूचना मिलने पर एसीपी क्राइम धर्मवीर शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और स्थिति संभालने की कोशिश की। ग्रामीणों की मांग है कि इलाके में जल्द बिजली बहाल की जाए, ताकि पानी की आपूर्ति समेत जरूरी सेवाएं दोबारा शुरू हो सकें।

फरीदाबाद में पानी और इंटरनेट सेवाओं पर असर

फरीदाबाद में बिजली संकट के कारण घरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का कामकाज प्रभावित होने की शिकायतें सामने आईं। बिजली आपूर्ति बाधित होने से पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ा। कुछ इलाकों के निवासियों ने इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क में परेशानी आने का दावा किया। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि वीआईपी सेक्टरों में बिजली आपूर्ति जारी है, जबकि आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। बिजली संकट के चलते लोगों को दैनिक जरूरतें पूरी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

नूंह के सैकड़ों गांवों में बिजली-पानी का संकट

नूंह जिले में बिजली संकट का असर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ सरकारी कार्यालयों पर भी पड़ा। खबर के मुताबिक, कई गांवों में करीब 18 घंटे तक बिजली नहीं आई, जिससे इनवर्टर भी जवाब दे गए। नूंह मिनी सचिवालय में बिजली बाधित होने से सरकारी कामकाज प्रभावित हुआ। लोगों के आक्रोश को देखते हुए जिला मुख्यालय स्थित बिजली विभाग के कार्यालय पर पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात किए गए।

पुन्हाना, नगीना और फिरोजपुर झिरका जैसे इलाकों में बिजली नहीं होने से पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई। लोगों को पीने के पानी के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी चुनौती बन गया। बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने से स्थानीय लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती रहीं।

करनाल के निसिंग में लोगों ने लगाया जाम

करनाल के निसिंग में बिजली संकट से नाराज लोग बिजली कार्यालय पहुंच गए। वहां स्थानीय लोगों और अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। लोगों ने सवाल उठाया कि सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते। बिजली आपूर्ति बाधित रहने से नाराज लोगों ने निसिंग रोड पर जाम लगा दिया और कहा कि बिजली बहाल होने तक वे सड़क से नहीं हटेंगे।

मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची और बिजली आपूर्ति सुचारू कराने के प्रयास किए गए। वहीं, बिजली विभाग के अधिकारियों ने समस्या के पीछे तकनीकी फॉल्ट होने की बात कही। ऐसे में बिजली कटौती को लेकर हड़ताल और तकनीकी खराबी, दोनों पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

निजीकरण के विरोध में अड़े कर्मचारी, समाधान की चुनौती

बिजली कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वितरण व्यवस्था का निजीकरण कर्मचारी विरोधी और जनविरोधी है। उन्होंने फैसले के खिलाफ आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। दूसरी ओर, वैकल्पिक व्यवस्था के तहत तैनात अधिकारियों के सामने बिजली आपूर्ति बहाल करना चुनौती बना हुआ है। बिजली मंत्री अनिल विज के सामने भी संकट से निपटने और आम लोगों को राहत दिलाने की चुनौती है।

प्रदेश में बिजली संकट ने निजीकरण के फैसले और आवश्यक सेवाओं पर हड़ताल के असर को लेकर बहस तेज कर दी है। यदि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच जल्द सहमति नहीं बनती, तो लोगों की परेशानियां बढ़ सकती हैं। फिलहाल, प्रभावित इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।