Haryana News: हरियाणा में बिजली सब-स्टेशनों पर मॉक ड्रिल, सुरक्षा तैयारियों की होगी जांच

हरियाणा में यूएचबीवीएन ने 33केवी बिजली सब-स्टेशनों पर सरप्राइज मॉक ड्रिल कराने के आदेश दिए हैं। इस दौरान फायर सेफ्टी उपकरण, इमरजेंसी शटडाउन, बिजली बहाली प्रक्रिया और कर्मचारियों की सुरक्षा तैयारियों की जांच होगी। मानसून और गर्मी के दौरान बिजली सप्लाई को सुरक्षित रखने की तैयारी की जा रही है।

हरियाणा में बिजली सब-स्टेशनों पर मॉक ड्रिल

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 21, 2026

Haryana News: उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम यानी यूएचबीवीएन ने बिजली व्यवस्था को और सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। निगम ने सभी ऑपरेशन सर्किलों में चुने गए 33केवी सब-स्टेशनों पर सरप्राइज मॉक ड्रिल कराने के आदेश जारी किए है। यह मॉक ड्रिल अगले मंगलवार सुबह 9 बजे आयोजित की जाएगी।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गर्मी और मानसून के मौसम में बिजली सप्लाई को बिना रुकावट बनाए रखना है। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि किसी आपात स्थिति में विभाग की तैयारी कितनी मजबूत है। बारिश, आग, तकनीकी खराबी या जलभराव जैसी स्थितियों में बिजली व्यवस्था को जल्द बहाल करने के लिए यह अभ्यास अहम माना जा रहा है।

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फायर सेफ्टी उपकरणों की होगी जांच

आपको बता दें कि, मॉक ड्रिल के दौरान सब-स्टेशनों पर उपलब्ध फायर फाइटिंग उपकरणों की स्थिति परखी जाएगी। कर्मचारियों को फायर एक्सटिंग्विशर के सही उपयोग का प्रदर्शन भी करना होगा। इससे यह पता चलेगा कि आग लगने जैसी स्थिति में कर्मचारी कितनी तेजी और सही तरीके से कार्रवाई कर सकते हैं।

इसके अलावा, यह भी देखा जाएगा कि सब-स्टेशन परिसर में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद हैं या नहीं। अगर किसी जगह उपकरण खराब या अधूरे पाए जाते हैं, तो उन्हें ठीक करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

इमरजेंसी शटडाउन और बिजली 

ड्रिल में इमरजेंसी शटडाउन प्रक्रिया की भी जांच की जाएगी। किसी दुर्घटना या तकनीकी समस्या के समय बिजली सप्लाई को सुरक्षित तरीके से बंद करना और फिर हालात सामान्य होने पर उसे दोबारा बहाल करना बेहद जरूरी होता है।

इस अभ्यास के जरिए यह परखा जाएगा कि कर्मचारी आपात स्थिति में कितनी जल्दी और सही क्रम में कार्रवाई कर पाते हैं। बिजली बहाली की प्रक्रिया को भी जांचा जाएगा, ताकि किसी खराबी के बाद उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली कटौती का सामना न करना पड़े।

विभाग और फायर सर्विस के तालमेल की समीक्षा

यूएचबीवीएन इस मॉक ड्रिल के जरिए बिजली विभाग और फायर सर्विस के बीच तालमेल की भी समीक्षा करेगा। किसी बड़ी घटना के समय दोनों विभागों का समय पर और समन्वित तरीके से काम करना बहुत जरूरी होता है। ड्रिल में यह देखा जाएगा कि सूचना देने, मौके पर पहुंचने और राहत कार्य शुरू करने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है। इससे भविष्य में आपात स्थितियों से निपटने की क्षमता बेहतर होगी।

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कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

मॉक ड्रिल के दौरान कर्मचारियों के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता भी जांची जाएगी। इनमें पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट यानी पीपीई किट, ग्लव्स, हेलमेट, सेफ्टी शूज और अन्य जरूरी सामान शामिल हो सकते हैं।

इसके साथ ही सब-स्टेशन परिसर में पर्याप्त रोशनी, रैंप, बाउंड्री वॉल, इमरजेंसी रास्ते और जलभराव से बचाव की व्यवस्था की भी समीक्षा होगी। मानसून के दौरान जलभराव बिजली उपकरणों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है, इसलिए इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वीडियो और फोटो रिकॉर्डिंग अनिवार्य

यूएचबीवीएन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरी मॉक ड्रिल की वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटो तैयार कर अपलोड किए जाएं। इससे उच्च स्तर पर तैयारियों की सही समीक्षा की जा सकेगी। विभाग ने यह भी साफ किया है कि ड्रिल के दौरान बिजली सप्लाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। सभी सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य रहेगा और किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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उपभोक्ताओं को मिलेगा फायदा

इस मॉक ड्रिल का सीधा लाभ बिजली उपभोक्ताओं को मिल सकता है। अगर विभाग की आपातकालीन तैयारी मजबूत होगी, तो बारिश, आग या तकनीकी खराबी के दौरान बिजली व्यवस्था जल्दी बहाल की जा सकेगी। इससे बिजली कटौती की समस्या कम होगी और कर्मचारियों की सुरक्षा भी बेहतर होगी।