Haryana News: हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार के दूसरे कार्यकाल को अक्टूबर 2026 में दो साल पूरे हो रहे हैं। नायब सिंह सैनी ने 17 अक्टूबर 2024 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इन दो वर्षों में सरकार ने रोजगार, किसान कल्याण, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा, उद्योग और बुनियादी ढांचे को अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। सरकार अपने कामकाज को ‘विकसित हरियाणा’ के लक्ष्य से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि विपक्ष और विभिन्न वर्गों की ओर से कानून-व्यवस्था, रोजगार और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों पर सवाल भी उठाए जाते रहे हैं।
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‘पर्ची-खर्ची’ के खिलाफ पारदर्शी भर्ती का दावा

हरियाणा सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में सरकारी भर्तियां और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना शामिल रहा है। सरकार का दावा है कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और मेरिट को प्राथमिकता दी गई है तथा युवाओं को बिना राजनीतिक सिफारिश और भ्रष्टाचार के नौकरी देने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। जुलाई 2026 में सरकार ने 3,586 नव चयनित ग्रुप-D कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र दिए और भर्ती प्रक्रिया को मेरिट आधारित बताया।
युवाओं के लिए कौशल विकास को भी रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। सरकार के अनुसार, सीईटी पास युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए काम और मानदेय की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। जुलाई 2026 में सरकार ने बताया कि सर्वे में 5.40 लाख से अधिक सीईटी पास युवा सामने आए हैं।
MSP, फसल खरीद और कृषि सहायता

हरियाणा की राजनीति और अर्थव्यवस्था में किसान महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं। सरकार के अनुसार प्रदेश में 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है और फसल खरीद की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री ने बताया कि 12 लाख किसानों को फसल खरीद के एवज में 1.86 लाख करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए गए हैं। सरकार ने प्राकृतिक खेती, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल कृषि जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने की बात भी कही है।
हालांकि किसानों के लिए असली चुनौती केवल खरीद और मुआवजे तक सीमित नहीं है। बढ़ती लागत, सिंचाई, फसल विविधीकरण, बाजार व्यवस्था और कृषि आय जैसे सवाल आने वाले वर्षों में भी सरकार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
महिलाओं के लिए योजनाएं और आर्थिक सहायता

महिला सशक्तिकरण को भी सरकार ने अपने एजेंडे में प्रमुख स्थान दिया है। सरकार के अनुसार, दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं को 2,100 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है और अगस्त 2026 तक करीब 10 लाख महिलाओं को 2,042 करोड़ रुपये दिए जा चुके थे। इसके अलावा ‘हर घर हर गृहिणी’ योजना के तहत करीब 15 लाख परिवारों को 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने की बात सरकार ने कही है। पंचायतों में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी और महिला-केंद्रित सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना को भी सरकार अपनी उपलब्धियों में गिनाती है।
सामाजिक सुरक्षा और गरीब परिवारों के लिए योजनाएं
सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी कई योजनाओं का उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 3,200 रुपये प्रतिमाह किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.56 लाख घर उपलब्ध कराने और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत लगभग 32 हजार गरीब परिवारों को प्लॉट देने का भी दावा किया गया है। इसके अलावा दयालु योजना के तहत आर्थिक सहायता और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
उद्योग और निवेश

हरियाणा को निवेश और उद्योग का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए सरकार ने नई औद्योगिक नीतियों पर जोर दिया है। सरकार के अनुसार ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी-2026’ और विभिन्न सेक्टर आधारित नीतियों के जरिए अगले पांच वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित करने तथा 10 लाख रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने यह भी बताया कि नीति के प्री-लॉन्च चरण में 110 कंपनियों के साथ 1.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों से जुड़े एमओयू हुए हैं। गुरुग्राम ग्लोबल सिटी, नारनौल लॉजिस्टिक्स हब, हिसार मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर और सोहना इलेक्ट्रॉनिक्स पार्क जैसी परियोजनाओं को भी औद्योगिक विस्तार से जोड़ा जा रहा है।
यहां बड़ी चुनौती यह होगी कि प्रस्तावित निवेश कितनी तेजी से वास्तविक परियोजनाओं में बदलेगा और उनसे स्थानीय युवाओं के लिए कितने रोजगार पैदा होंगे।
ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाएं

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी सरकार के एजेंडे में रहा है। सरकार के अनुसार 6,000 से अधिक गांवों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और 30 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पाइप से साफ पानी पहुंचाया गया है। चालू वित्त वर्ष में ग्रामीण विकास के लिए 8,704 करोड़ रुपये का प्रावधान बताए गया है। इसके साथ ही सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य और स्थानीय बुनियादी ढांचे की स्थिति में सुधार करना सरकार के सामने लगातार चुनौती बनी हुई है।
खेलों में हरियाणा की पहचान को आगे बढ़ाने की कोशिश
हरियाणा लंबे समय से देश को शीर्ष स्तर के खिलाड़ी देने के लिए जाना जाता है। राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सम्मान और आर्थिक पुरस्कार देने की नीति जारी रखी है। 2026 में कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक विजेताओं और प्रतिभागियों को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभा की पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं और ग्रामीण स्तर पर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।
कानून-व्यवस्था और पुलिस सुधार
कानून-व्यवस्था भी सरकार के दो साल के रिपोर्ट कार्ड का अहम हिस्सा है। सरकार की ओर से पुलिस व्यवस्था में तकनीकी सुधार और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया है। 2026 के बजट से जुड़े फैसलों में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के लिए 5,000 बॉडी कैमरे खरीदने की घोषणा भी की गई थी।
हालांकि, अपराध और कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष की आलोचना भी सामने आती रही है। सितंबर 2026 में पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने प्रदेश में अपराध और पुलिस व्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। ये विपक्षी आरोप हैं और इन्हें सरकार के आधिकारिक दृष्टिकोण से अलग समझना जरूरी है।
शिक्षा और कौशल विकास

हरियाणा के युवाओं को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार तैयार करना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। स्किल गैप, तकनीकी शिक्षा, आईटीआई और व्यावसायिक प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ना आने वाले समय में अहम रहेगा।
सरकार ने हर जिले में मॉडल आईटीआई और ब्लॉक स्तर पर आईटीआई खोलने की दिशा में योजना की बात कही है। इससे प्रशिक्षण व्यवस्था का विस्तार हो सकता है, लेकिन इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को उद्योगों में कितने अवसर मिलते हैं।
दो साल बाद सरकार के सामने क्या चुनौतियां?
दो साल पूरे होने के मौके पर सरकार की उपलब्धियों के साथ उन मुद्दों पर भी नजर जरूरी है जो अभी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। रोजगार की गुणवत्ता और निजी क्षेत्र में अवसर, किसानों की आय, शहरों में ट्रैफिक और प्रदूषण, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा की गुणवत्ता, कानून-व्यवस्था और औद्योगिक निवेश को जमीन पर उतारना प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं।
सरकार के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल योजनाओं के आंकड़ों से आगे उनके वास्तविक प्रभाव का है। किसी योजना के लाभार्थियों की संख्या के साथ यह देखना भी जरूरी होगा कि उससे लोगों की आय, रोजगार, जीवन स्तर और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में कितना बदलाव आया।
दो साल का पड़ाव, आगे की बड़ी परीक्षा

नायब सिंह सैनी सरकार के दो साल के कार्यकाल में रोजगार, किसान, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा, निवेश और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई फैसले सामने आए हैं। सरकार इन योजनाओं और आंकड़ों को अपनी उपलब्धियों के तौर पर प्रस्तुत कर रही है।
अब अगले चरण में असली कसौटी इन घोषणाओं और लक्ष्यों के जमीन पर असर की होगी। निवेश प्रस्तावों का वास्तविक उद्योगों में बदलना, युवाओं को स्थायी रोजगार मिलना, किसानों की आय और कृषि व्यवस्था में सुधार, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ना तथा कानून-व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना—ये वे क्षेत्र हैं जिन पर हरियाणा की जनता और राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी।
इस लिहाज से सरकार के दो साल एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं, लेकिन अगले वर्षों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि घोषित नीतियां और योजनाएं हरियाणा की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर में कितना ठोस बदलाव ला पाती हैं।
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