Haryana News: सूरजमुखी किसानों की चिंता खत्म, मंडियों में पूरी फसल खरीदेगी सरकार

हरियाणा सरकार 30 जून तक सूरजमुखी की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदेगी। सरकार के आश्वासन के बाद पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया, जिससे सूरजमुखी किसानों को बड़ी राहत मिली है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 26, 2026

Haryana News: हरियाणा के सूरजमुखी उत्पादक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि मंडियों में आने वाली सूरजमुखी की पूरी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जाएगी। इस प्रक्रिया को लेकर चल रही कानूनी कार्यवाही के बीच, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए खरीद की समय सीमा 30 जून तक निर्धारित की है।

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हाई कोर्ट में सरकार का आश्वासन और याचिका का निपटारा

सूरजमुखी खरीद को लेकर चल रहे विवाद पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। सुनवाई के दौरान, हरियाणा सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि मंडियों में आने वाली सूरजमुखी की एक भी फसल बिना खरीद के वापस नहीं जाएगी। सरकार के इस आश्वासन के बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि राज्य सरकार और संबंधित खरीद एजेंसियां (जैसे हैफेड और वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन) अपने इस बयान से बंधी रहेंगी और किसानों के हितों की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता होगी।

अब तक कितनी हुई खरीद?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 23 जून की शाम तक राज्य की विभिन्न मंडियों में कुल 93,505 क्विंटल सूरजमुखी बीजों की खरीद सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। हैफेड और हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने अदालत को जानकारी दी कि मंडियों में पहुंचे सूरजमुखी के स्टॉक को एमएसपी के मानकों के अनुसार खरीदा जा चुका है। सरकार का दावा है कि खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य समय पर मिल रहा है।

30 जून तक का समय, किसान न हों चिंतित

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की फसल अभी तक मंडियों में नहीं पहुंच पाई है, उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। जो किसान अपनी फसल 30 जून तक मंडियों में लाएंगे, सरकार उनकी पूरी फसल को एमएसपी पर खरीदेगी। यह उन किसानों के लिए बड़ी राहत है जो मौसम या परिवहन कारणों से अब तक अपनी उपज बेचने में असमर्थ रहे थे। सरकार ने खरीद एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित मानकों के अनुरूप फसल की गुणवत्ता की जांच की जाए और खरीद में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए।

किसानों के लिए क्या है संदेश?

सरकार के इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिकने से किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है, जिससे उनकी आय में स्थिरता बनी रहती है। 30 जून की समय सीमा बढ़ाए जाने से उन किसानों को भी पर्याप्त समय मिल गया है जिनकी कटाई देरी से हुई थी।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि हाई कोर्ट के इस रुख और सरकार की तत्परता से किसानों का मनोबल बढ़ा है। अब किसान बिना किसी डर के अपनी फसल मंडियों तक पहुंचा सकते हैं। हरियाणा सरकार का यह कदम राज्य के कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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