Haryana News: कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक बार फिर हरियाणा और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए हैं। करनाल के असंध में आयोजित एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और देश भर में बढ़ती पेपर लीक की घटनाओं को लेकर सरकार को घेरा।
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जंतर-मंतर पर ‘दोहरे मापदंड’ का आरोप
दीपेंद्र हुड्डा ने हाल ही में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की मिली अनुमति का जिक्र करते हुए सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “यह अच्छी बात है कि कोई जनता की आवाज उठा रहा है और उन्हें प्रदर्शन की अनुमति मिली, लेकिन सरकार को यह बताना चाहिए कि किसानों, पहलवानों और विपक्षी दलों को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत क्यों नहीं दी जाती?”
हुड्डा ने कुरुक्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी कांग्रेस और अन्य सामाजिक संगठनों को प्रदर्शन करने से रोका गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना सबका अधिकार है, लेकिन सरकार चुनिंदा लोगों को ही मंच दे रही है, जो उसकी तानाशाही और भेदभावपूर्ण नीतियों को दर्शाता है।
2014 से पहले और बाद का अंतर
सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का मुद्दा उठाते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “2014 से पहले पीएमटी (PMT) और नीट (NEET) जैसी परीक्षाएं आयोजित होती थीं, लेकिन कभी पेपर लीक होने की खबरें नहीं आती थीं। आजादी के बाद से ही इन परीक्षाओं पर देश के बच्चों का अटूट विश्वास रहा है, लेकिन 2014 के बाद देश में पेपर लीक का एक नया दौर शुरू हो गया है।”
हुड्डा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अब तक लगभग 90 बार पेपर लीक हो चुके हैं। हर साल ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जिससे युवाओं का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि इन पेपर लीक की घटनाओं और भविष्य की चिंता में अब तक 6 छात्र आत्महत्या कर चुके हैं, क्योंकि वे दोबारा परीक्षा देने के मानसिक दबाव को सहन नहीं कर पा रहे हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
पेपर लीक के बढ़ते मामलों के लिए दीपेंद्र हुड्डा ने सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जब युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हो, तो जवाबदेही तो तय करनी ही होगी। हुड्डा ने स्पष्ट रूप से कहा, “अगर हम ऐसी बड़ी विफलता पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाब नहीं मांगेंगे और उनके इस्तीफे की मांग नहीं करेंगे, तो फिर किससे मांगेंगे? सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए।”
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