Haryana News: हरियाणा राज्य में किसानों की कड़ी मेहनत से तैयार फसलों की सुगम खरीद, समय पर उठान और खातों में त्वरित भुगतान सुनिश्चित करना वर्तमान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। धान और बाजरे की खरीद के सीजन को पूरी तरह पारदर्शी, व्यवस्थित और सुचारू बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान फसल खरीद व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं कि अन्नदाताओं को मंडियों में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि किसानों को उनकी फसल का एक-एक दाना सही समय पर और उचित मूल्य पर बिके, ताकि उन्हें अपनी उपज के लिए किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।
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धान की बंपर आवक और उठान प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश

राज्य की मंडियों में इस समय धान की आवक लगातार बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान जानकारी दी कि प्रदेशभर की मंडियों में अब तक कुल 5 लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीद की जा चुकी है। मंडियों में धान की भारी आवक को देखते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि केवल खरीद तक ही सीमित न रहा जाए, बल्कि मंडियों से धान के समय पर उठान (लिफ्टिंग) की गति को भी तेजी से बढ़ाया जाए। कई बार उठान धीमा होने के कारण मंडियों में जगह की कमी हो जाती है, जिससे किसानों और आढ़तियों दोनों को कठिनाई होती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि मिलर्स और ट्रांसपोर्टर्स के साथ बेहतर समन्वय बनाकर धान का त्वरित उठान सुनिश्चित किया जाए, ताकि मंडियों में अनाज का अंबार न लगे और नई फसल लाने वाले किसानों को कोई असुविधा न हो।
बाजरे के किसानों के लिए 2,900 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी और भावान्तर भरपाई योजना

बाजरे की फसल का उत्पादन करने वाले किसानों के हितों की रक्षा के लिए हरियाणा सरकार ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। समीक्षा के दौरान यह तय किया गया कि बाजरे के किसानों को कुल मिलाकर ₹2,900 प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या आर्थिक लाभ सुनिश्चित किया जाएगा। इसके तहत सरकारी खरीद ₹2,300 प्रति क्विंटल की निर्धारित दर से की जाएगी। इसके साथ ही, यदि खुले बाजार में किसानों को इससे अधिक भाव मिलते हैं या बाजार में कीमतें कम रहने पर सरकार भावान्तर भरपाई योजना के माध्यम से शेष अंतर यानी ₹600 प्रति क्विंटल तक का सीधा आर्थिक लाभ किसानों के खातों में पहुंचाएगी। इस अनूठी योजना से यह सुनिश्चित हो गया है कि बाजरा उत्पादक किसानों को किसी भी स्थिति में वित्तीय नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा और उन्हें उनकी फसल का उचित लाभकारी मूल्य अवश्य मिलेगा।
HCS स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति और प्रशासनिक सचिवों के दौरों से पुख्ता हुई निगरानी

खरीद प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार को रोकने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बेहद कड़े और पुख्ता इंतजाम किए हैं। प्रदेश की हर एक अनाज मंडी में खरीद व्यवस्था की कड़ी निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए HCS (Haryana Civil Service) स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त किया गया है, जो मौके पर रहकर पूरी व्यवस्था पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेंगे। इसके अलावा, विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिवों को भी व्यक्तिगत रूप से मंडियों का दौरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ये वरिष्ठ अधिकारी मंडियों में जाकर जमीनी हकीकत का जायजा लेंगे और सीधे तौर पर खरीद, उठान और भुगतान व्यवस्था की विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगे। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के इन सख्त और दूरदर्शी प्रशासनिक कदमों से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि हरियाणा सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी तरह समर्पित है और हर स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था कायम करने के लिए कटिबद्ध है।
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