Haryana News: लाखों लोगों के लिए बड़ी खबर! हरियाणा में पटवारी व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव

हरियाणा सरकार ने राजस्व प्रशासन को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इस पहल के तहत राज्य में पटवार व्यवस्था का पुनर्गठन किया जा रहा है

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 7, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के राजस्व प्रशासन को आधुनिक, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। प्रदेश की वर्षों पुरानी पटवार व्यवस्था के ढांचे को पूरी तरह बदलने की तैयारी है। अब पटवार सर्कलों का पुनर्गठन केवल भूमि के क्षेत्रफल (रकबे) के आधार पर नहीं, बल्कि कार्यभार, जनसंख्या और प्रशासनिक जरूरतों के वैज्ञानिक मानकों के आधार पर किया जाएगा।

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‘रकबा’ नहीं, अब ‘कार्यभार’ होगा आधार

अब तक हरियाणा में पटवारियों के कार्यक्षेत्र का निर्धारण मुख्य रूप से कृषि भूमि के क्षेत्रफल यानी ‘रकबे’ के आधार पर होता था। लेकिन समय के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों में व्यापक बदलाव आया है। आज पटवारी केवल भूमि रिकॉर्ड तक सीमित नहीं हैं; उन्हें म्यूटेशन, डिजिटल भूमि अभिलेखों का प्रबंधन, ऑनलाइन सेवाएं, फसल सर्वेक्षण और नागरिकों के अन्य राजस्व कार्यों को भी संभालना पड़ता है। सरकार का मानना है कि बदलती डिजिटल सेवाओं और शहरीकरण के इस दौर में पुरानी व्यवस्था अप्रासंगिक हो गई है। इसी को देखते हुए अब ‘कार्यभार’ को सर्किलों के निर्धारण का मुख्य आधार बनाया जाएगा।

2000 एकड़ का मानक और लचीलापन

नई व्यवस्था के तहत एक मानक पटवार सर्किल में लगभग 2000 एकड़ कृषि योग्य भूमि को शामिल करने का प्रस्ताव है। हालांकि, सरकार ने इसमें लचीलापन भी रखा है। स्थानीय परिस्थितियों, भौगोलिक स्थिति और कार्य की प्रकृति के आधार पर एक सर्किल का आकार 1500 से 2500 एकड़ के बीच हो सकेगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पटवारी पर काम का बोझ अत्यधिक न हो, जिससे नागरिकों को समय पर सेवाएँ मिल सकें।

जनसंख्या और शहरीकरण का महत्व

नए पुनर्गठन में केवल कृषि भूमि को ही नहीं, बल्कि ‘आबादी देह’ को भी प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2025 के नए प्रावधानों के अनुरूप, उन क्षेत्रों में छोटे पटवार सर्किल बनाए जाएंगे जहां जनसंख्या अधिक है और राजस्व संबंधी कार्यों की संख्या बहुत ज्यादा है। इससे शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वहीं, कम आबादी और कम कार्यभार वाले क्षेत्रों में सर्किलों का दायरा बड़ा रखा जा सकेगा। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अलग-अलग मानक तय किए हैं। शहरी इलाकों में भूमि लेनदेन और नामांतरण की अधिकता को देखते हुए वहां कार्यक्षेत्र अपेक्षाकृत छोटे होंगे।

प्रशासन में आएगी पारदर्शिता और गति

हाल ही में पटवारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिला उपायुक्तों को इस पुनर्गठन अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का दावा है कि इस वैज्ञानिक पुनर्गठन से न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि लंबित पड़े राजस्व मामलों में भी भारी कमी आएगी।

यह बदलाव हरियाणा के प्रशासनिक सुधारों में मील का पत्थर साबित होगा। इससे नागरिकों को अपनी जमीन और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए पारदर्शिता और त्वरित समाधान मिल सकेगा, जिससे आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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