Haryana Land Registry Scam: ₹999 करोड़ के टैक्स घोटाले का CAG ने किया खुलासा

चंडीगढ़. हरियाणा में वर्ष 2023-24 में करों में हेराफेरी से सरकारी खजाने को 999 करोड़ रुपये का ‘फटका’ लग गया। बिक्री कर, मूल्य वर्धित कर (वैट), जमीन की रजिस्ट्री के दौरान स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस, उत्पाद शुल्क व परिवहन कर की वसूली के 7144 मामलों में अनियमितताएं साामने आई हैं। कृषि भूमि के नाम पर 266 आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक प्लाटों की रजिस्ट्री कर दी गईं, जिससे सरकारी खजाने को 34 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क का नुकसान हुआ। इन रजिस्ट्रियों में सरकार को 49.60 करोड़ का शुल्क मिल पाया, जबकि मिलने चाहिए थे 83.68 करोड़ रुपये। नियंत्रक एवं

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Published On :

सितम्बर 3, 2026

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चंडीगढ़.

हरियाणा में वर्ष 2023-24 में करों में हेराफेरी से सरकारी खजाने को 999 करोड़ रुपये का ‘फटका’ लग गया। बिक्री कर, मूल्य वर्धित कर (वैट), जमीन की रजिस्ट्री के दौरान स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस, उत्पाद शुल्क व परिवहन कर की वसूली के 7144 मामलों में अनियमितताएं साामने आई हैं।

कृषि भूमि के नाम पर 266 आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक प्लाटों की रजिस्ट्री कर दी गईं, जिससे सरकारी खजाने को 34 करोड़ रुपये के स्टांप शुल्क का नुकसान हुआ। इन रजिस्ट्रियों में सरकार को 49.60 करोड़ का शुल्क मिल पाया, जबकि मिलने चाहिए थे 83.68 करोड़ रुपये। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) द्वारा विधानसभा में रखी गई रिपोर्ट में यह खामियां सामने आई हैं। संबंधित विभागों ने 5769 मामलों में 814 करोड़ रुपये की कम वसूली को स्वीकार भी किया है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण पंचकूला में नियंत्रक अधिकारी द्वारा नियमों का पालन न करने से 5.43 करोड़ के सरकारी धन का संदिग्ध दुर्विनियोग हुआ।

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कार्य अनुबंध/निर्माण सेवाओं पर लेखापरीक्षा में छूट और रियायती दरों का गलत लाभ उठाने, अग्रिमों एवं अचल परिसंपत्तियों पर कर का भुगतान न करने तथा ब्याज के कम भुगतान से 389 करोड़ की चपत लगी। इनपुट टैक्स क्रेडिट में 37.69 करोड़ की अनियमितताएं मिली। कर के कम भुगतान, टर्नओवर को छिपाने, इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान न होने और ब्याज के कम उद्ग्रहण से 4.83 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जीएसटी मामलों में कर निर्धारण को अंतिम रूप देते समय अंतिम स्टाक के संदर्भ में सत्यापन नहीं किया, इस कारण पांच डीलरों से 6.67 करोड़ का कर नहीं लिया जा सका। कर निर्धारण प्राधिकारी ने वस्तुओं की बिक्री पर लागू कर की दर से कम टैक्स लगाया, जिसके परिणामस्वरूप 3.31 करोड़ के कर और 2.47 करोड़ के ब्याज की वसूली नहीं हो पाई।

जमीन की रजिस्ट्रियों में स्टांप शुल्क को लेकर ऐसे चला ‘खेल’
स्टांप शुल्क वसूली के 59 मामलों में सहयोग करारों के गलत वर्गीकरण/अवमूल्यांकन के परिणामस्वरूप 30.65 करोड़ का कम स्टांप शुल्क मिला। 53 दस्तावेजों में बंधक विलेख पंजीकृत किए गए थे, जिनमें पंजीकरण फीस या तो कम ली गई, या बिल्कुल भी नहीं ली गई। इसके परिणामस्वरूप 9.43 करोड़ का स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस नहीं ली जा सकी। दस मामलों में साधारण बंधक दस्तावेजों के गलत वर्गीकरण के परिणामस्वरूप 50.27 लाख का नुकसान हुआ। इस प्रकार 9.93 करोड़ के स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस का उद्ग्रहण नहीं हुआ हो सका। 24 समझौता डिक्रियां, जो वास्तविक नहीं थी, नाममात्र स्टांप शुल्क लेकर पंजीकृत की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप 4.90 करोड़ का नुकसान हुआ। पंजीकरण प्राधिकारियों ने भूमि विनिमय के 32 विलेखों को पंजीकृत करते समय 16.10 लाख का स्टांप शुल्क एवं पंजीकरण फीस उद्ग्रहित की, जबकि इन पर 1.92 करोड़ का स्टांप शुल्क बनता था। कारण यह कि इन भूमि का विनिमय अलग-अलग राजस्व संपदाओं या आवासीय भूमि के अंतर्गत आता था। इसके परिणामस्वरूप 1.76 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

कैग की ओर से दिया गया निगरानी तंत्र बनाने का सुझाव
कैग ने सरकार को सुझाव दिया है कि लेखापरीक्षा के लिए करदाताओं के विस्तृत अभिलेख प्राप्त करने और उपलब्ध कराने के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाए। इससे कर अधिकारियों द्वारा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा। विभाग रिटर्न और लिए गए इनपुट टैक्स क्रेडिट की सत्यता की जांच करे तथा रिटर्न में पाई गई विसंगतियों या अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई करे।