Haryana News: हरियाणा में सामने आए बैंक घोटाले के बाद राज्य सरकार ने वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने और निगरानी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सभी विभागों को अपने अधीन आने वाले बैंक खातों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाना और किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी को रोकना है। वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वे अपने विभागों के अंतर्गत आने वाले ड्राइंग एंड डिस्वर्सिंग ऑफिसर (DDO) के बैंक खातों का पूरा विवरण निर्धारित समय के अंदर जमा करें।
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सात दिन में देना होगा खातों का रिकॉर्ड
वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश में सभी विभागों को सात दिन के भीतर बैंक खातों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है। यह निर्देश वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी किया गया है। मांगी गई जानकारी में वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक संचालित सभी DDO बैंक खातों का विवरण शामिल है। विभागों को यह बताना होगा कि हर वित्तीय वर्ष में कितने सरकारी बैंक खाते सक्रिय रहे, कितने खातों में किसी प्रकार का खर्च नहीं हुआ और ऐसे खातों में कितनी धनराशि मौजूद थी। इसके अलावा विभागों को खातों की स्थिति और उनमें हुए लेन-देन से जुड़ी पूरी जानकारी भी देनी होगी।
प्रधान महालेखाकार के निर्देश पर शुरू हुई प्रक्रिया
सरकार द्वारा यह जानकारी प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), हरियाणा के आग्रह पर मांगी गई है। अधिकारियों का उद्देश्य सभी सरकारी खातों का मिलान करना और यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन का सही तरीके से इस्तेमाल हुआ है या नहीं। विभागों द्वारा उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड की जांच प्रधान महालेखाकार के दस्तावेजों से की जाएगी। खासतौर पर उन खातों पर नजर रखी जा रही है, जिनमें लंबे समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है लेकिन उनमें धनराशि जमा है।
लापरवाही करने वालों पर होगी कार्रवाई
वित्त विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले विभागों और लापरवाही बरतने वाले DDO अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अधिकारियों पर विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। सरकार ने सभी विभागों को इस मामले में गंभीरता बरतने और समय पर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
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जांच में सामने आई थी करोड़ों रुपये की हेराफेरी
हरियाणा में बैंक घोटाले की जांच के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी और राज्य विजिलेंस की पड़ताल में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच में पता चला था कि कुछ मामलों में निजी और अनधिकृत बैंक खातों का इस्तेमाल कर सरकारी धन को गलत तरीके से ट्रांसफर किया गया। आरोपों के अनुसार, फर्जी डेबिट मेमो, नकली हस्ताक्षर और शेल कंपनियों के बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये की राशि डायवर्ट की गई थी। इसी के बाद सरकार ने सभी सरकारी खातों की गहन जांच और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है।
वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश
सरकार का यह कदम सरकारी वित्तीय व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। सभी DDO खातों की समीक्षा के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि कहीं किसी खाते का गलत इस्तेमाल तो नहीं हुआ। बैंक घोटाले के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई भविष्य में ऐसी वित्तीय अनियमितताओं को रोकने और सरकारी धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।










