Harish Rawat News: चुनाव नहीं लड़ेंगे हरीश रावत, उत्तराखंड कांग्रेस में नई भूमिका पर बढ़ी हलचल

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का संकेत दिया है। हालांकि, उन्होंने राजनीति से संन्यास की चर्चाओं को खारिज किया है। रावत ने साफ कहा कि कांग्रेस उन्हें जो भी भूमिका देगी, वह उसे पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगे। ऐसे में उनकी अगली भूमिका को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं।

Harish Rawat News

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 23, 2026

Harish Rawat News: उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के राजनीतिक संन्यास को लेकर पिछले दो दिनों से चल रही चर्चाओं ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। 21 अगस्त को रावत ने कहा था कि वह अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उनके समर्थक भी चाहते हैं कि वह अब चुनावी मैदान से दूरी बनाएं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे वह पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे।

रावत ने संन्यास की खबरों को किया खारिज

रावत के इस बयान के अगले दिन सोशल मीडिया पर उनके सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की खबरें तेजी से फैलने लगीं। 22 अगस्त को खुद हरीश रावत ने इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने राजनीति छोड़ने का कोई ऐलान नहीं किया है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि वह फिलहाल कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं और पार्टी तथा उत्तराखंड के हित में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

मार्च में भी लिया था राजनीतिक अवकाश

रावत के हालिया बयानों को उनके पिछले कुछ महीनों के राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जाए तो तस्वीर और स्पष्ट होती है। मार्च में रामनगर के संजय नेगी को कांग्रेस में शामिल कराने को लेकर पार्टी के भीतर विवाद हुआ था। उस दौरान रावत ने 15 दिन का राजनीतिक अवकाश लेने की घोषणा की थी। उनके इस फैसले को कांग्रेस के अंदर उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा गया था।

अप्रैल में फिर सक्रिय राजनीति में लौटे

इसके बाद अप्रैल में हरीश रावत ने दोबारा सक्रिय राजनीतिक गतिविधियों में वापसी की। उन्होंने संकेत दिया था कि वह जनता और अपने समर्थकों की राय जानने के बाद अपनी आगे की भूमिका तय करेंगे। ऐसे में पिछले कुछ महीनों में उनके बयानों में दो तरह के संकेत दिखाई दिए हैं। एक तरफ वह सक्रिय राजनीति में बने रहने की इच्छा जताते रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनावी राजनीति से दूरी बनाने का विचार भी सामने आया है।

चुनाव नहीं लड़ना संन्यास से अलग फैसला

हरीश रावत का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला अपने आप में सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने का संकेत नहीं माना जा सकता। चुनाव न लड़ना और राजनीति से संन्यास लेना दोनों अलग-अलग बातें हैं। रावत ने खुद कहा है कि कांग्रेस उन्हें जो भूमिका देगी, वह उसे पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगे। ऐसे में वह संगठन, चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और प्रचार अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

2027 चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने सवाल

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। पार्टी को यह तय करना होगा कि चुनाव में उसका प्रमुख चेहरा कौन होगा और मुख्यमंत्री पद को लेकर उसकी रणनीति क्या होगी। 20 अगस्त को रावत ने मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के सवाल पर कहा था कि यदि कांग्रेस चुनाव जीतती है तो इस संबंध में पार्टी आलाकमान का फैसला प्रदेश संगठन स्वीकार करेगा।

चुनाव से बाहर रहकर भी प्रभाव कायम

अगर रावत विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं होगा कि उनका कांग्रेस की राजनीति में प्रभाव समाप्त हो जाएगा। वह किसी सीट की सीधी लड़ाई से बाहर रहकर पूरे प्रदेश में पार्टी के लिए प्रचार कर सकते हैं। साथ ही अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने और चुनावी रणनीति तैयार करने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

कांग्रेस के लिए रावत का अनुभव महत्वपूर्ण

हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और प्रदेश की राजनीति की गहरी समझ के कारण पार्टी के लिए उनकी भूमिका अहम बनी हुई है। हालांकि कांग्रेस के भीतर अलग-अलग नेताओं और गुटों के बीच खींचतान भी सामने आती रही है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी रावत को आगामी चुनाव में किस तरह की जिम्मेदारी देती है।

उत्तराखंड कांग्रेस में अभी बाकी है रावत फैक्टर

यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के फैसले के साथ हरीश रावत उत्तराखंड की सक्रिय राजनीति से बाहर हो गए हैं। उनके हालिया बयान बताते हैं कि वह अभी भी राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय हैं। 21 अगस्त को उन्होंने राहुल गांधी के छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष का समर्थन भी किया था।

कांग्रेस के सामने बड़ी रणनीतिक चुनौती

अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि रावत के राजनीतिक अनुभव और ऊर्जा का इस्तेमाल किस तरह किया जाए। क्या उन्हें चुनाव अभियान की बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, क्या उम्मीदवारों के चयन में उनकी राय महत्वपूर्ण होगी और क्या पार्टी उन्हें प्रमुख रणनीतिक चेहरों में शामिल करेगी? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सामने आएंगे। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि हरीश रावत ने संन्यास नहीं लिया है और उत्तराखंड कांग्रेस में उनका प्रभाव अभी कायम है।

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