MP Swamitva Yojana : हरदा में ग्रामीणों को मिला जमीन का मालिकाना हक, सीएम मोहन यादव ने बांटे प्रमाण-पत्र

मध्य प्रदेश के हरदा में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 10 ग्रामीणों को जमीन के रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र वितरित किए। सरकार का कहना है कि इससे पात्र हितग्राहियों को संपत्ति से जुड़े कानूनी दस्तावेज मिलेंगे। बैंक ऋण और निर्माण कार्यों में संभावित सहूलियत के बीच मुख्यमंत्री ने रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए।

MP Swamitva Yojana

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 10, 2026

MP Swamitva Yojana : मध्य प्रदेश में ग्रामीणों को उनकी भूमि पर कानूनी अधिकार दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 अक्टूबर को हरदा जिले में आयोजित कार्यक्रम में 10 हितग्राहियों को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र वितरित किए। यह वितरण स्वामित्व अधिकार अभिलेखों के हस्तांतरण विलेख के निष्पादन की योजना के अंतर्गत किया गया। सरकार की इस पहल का उद्देश्य पात्र ग्रामीणों को उनकी संपत्ति से जुड़े अधिकारों के दस्तावेज उपलब्ध कराना है।

गोंदागांव के हितग्राहियों को मिले रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हरदा जिले के ग्राम गोंदागांव के निवासी निर्भयदास और भैयालाल को रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र सौंपे। इनके साथ आठ अन्य हितग्राहियों को भी दस्तावेज वितरित किए गए। प्रमाण-पत्र मिलने के बाद लाभार्थियों ने प्रसन्नता जाहिर की। उनके लिए यह दस्तावेज अपनी भूमि से संबंधित अधिकारों को औपचारिक रूप से दर्ज कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे ग्रामीणों को संपत्ति से जुड़े कामों में कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत करने में मदद मिल सकती है।

जमीन के दस्तावेज से आर्थिक मजबूती की उम्मीद

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक पात्र ग्रामीण को उसकी भूमि से संबंधित अधिकार प्राप्त हों। उनके अनुसार, स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को संपत्ति के संबंध में कानूनी सुरक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। जमीन से जुड़े दस्तावेज होने पर ग्रामीण अपनी संपत्ति का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। इससे उन्हें आर्थिक गतिविधियों और भविष्य की योजनाओं के लिए भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

संपत्ति के मूल्य और सरकारी योजनाओं में मिल सकती है मदद

मुख्यमंत्री के मुताबिक, रजिस्ट्री प्रमाण-पत्र मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का इस्तेमाल अधिक व्यवस्थित तरीके से करने में मदद मिल सकती है। वैध दस्तावेज उपलब्ध होने से संपत्ति से जुड़े मामलों में अपनी स्थिति स्पष्ट करना आसान हो सकता है। इसके अलावा, पात्रता और संबंधित नियमों के अधीन ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी सहूलियत मिल सकती है। हालांकि, किसी योजना का लाभ मिलना संबंधित विभाग के नियमों और पात्रता पर निर्भर करेगा।

बैंक ऋण और निर्माण कार्य में होगी सहूलियत

प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले हितग्राहियों ने उम्मीद जताई कि जमीन का वैध दस्तावेज मिलने से बैंक से ऋण लेने की प्रक्रिया में सहायता मिल सकती है। इसके अलावा, भूमि पर निर्माण कार्य कराने और संपत्ति से जुड़े दूसरे जरूरी कामों में भी सुविधा होने की संभावना है। लाभार्थियों ने इस पहल को ग्रामीण परिवारों के लिए उपयोगी बताते हुए राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। बैंक ऋण की स्वीकृति हालांकि संबंधित बैंक के नियमों और अन्य आवश्यक शर्तों पर निर्भर करेगी।

रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज करने के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जिला कलेक्टर को भू-स्वामित्व से संबंधित रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने पटवारियों को भी प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने और सरकारी कामकाज में अनावश्यक बाधाएं दूर रखने पर जोर दिया। सरकार का उद्देश्य पात्र हितग्राहियों के मामलों का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निष्पादन करना है, ताकि दस्तावेज जारी करने में बेवजह देरी न हो।

पहले से दर्ज जानकारी के आधार पर होगा निष्पादन

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्री का निष्पादन अधिकार अभिलेख में पहले से दर्ज जानकारी के आधार पर किया जाएगा। इस प्रक्रिया में किसी व्यक्ति के भूमि स्वामित्व का नए सिरे से निर्धारण नहीं होगा और न ही नई जानकारी तैयार की जाएगी। इस तरह योजना के तहत पात्र ग्रामीणों को उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर भूमि से जुड़े अधिकारों के दस्तावेज देने पर जोर है। अब प्रशासन के सामने प्रक्रिया को समयबद्ध और स्पष्ट तरीके से पूरा करने की जिम्मेदारी है।

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