H-1B Visa Fee Hike: अमेरिका में काम करने की तैयारी कर रहे विदेशी पेशेवरों के लिए ट्रंप प्रशासन एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने H-1B वीजा आवेदनों पर 1,03,265 डॉलर, यानी करीब 86 से 87 लाख रुपये का नया आवेदन शुल्क प्रस्तावित किया है। इस प्रस्ताव का सबसे ज्यादा असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, टेक कर्मचारियों और अमेरिका में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
सालाना 85 हजार H-1B वीजा पर लागू होगा नियम
प्रस्तावित शुल्क उन H-1B वीजा आवेदनों पर लागू होगा, जो सालाना तय 85,000 वीजा की कैप के अंतर्गत आते हैं। इस सीमा में 65,000 सामान्य श्रेणी के आवेदक और अमेरिकी संस्थानों से मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले उम्मीदवारों के लिए 20,000 सीटें शामिल हैं। हालांकि, विश्वविद्यालयों और कुछ गैर-लाभकारी संस्थानों से जुड़े आवेदनों को इस शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव है।
पुराने 1 लाख डॉलर शुल्क की जगह नया प्रस्ताव
ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले H-1B वीजा के लिए 1 लाख डॉलर की फीस का ऐलान किया था। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ और अमेरिकी अदालत ने जून में इस पर रोक लगा दी थी। यह रोक 21 सितंबर को समाप्त होने वाली है। अब DHS ने 1,03,265 डॉलर की नई फीस का प्रस्ताव सामने रखा है, जिसे पुराने शुल्क की जगह अधिक स्थायी व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है।
विदेशी छात्रों की मुश्किलें भी बढ़ेंगी
प्रस्तावित बदलाव का असर अमेरिका में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों पर भी पड़ सकता है। पहले F-1 वीजा पर अमेरिका में पढ़ने वाले छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद H-1B में स्टेटस बदलने पर पुरानी फीस से राहत पा सकते थे। नए प्रस्ताव के तहत आवेदन दाखिल करते समय ही भारी शुल्क देना पड़ सकता है। इससे अमेरिका में मौजूद बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों और भविष्य में H-1B हासिल करने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों की चिंता बढ़ सकती है।
ड्राफ्ट पर जनता से मांगी जाएगी राय
DHS के इस प्रस्ताव को अंतिम नियम बनाने से पहले सार्वजनिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। करीब 67 पन्नों का ड्राफ्ट नोटिस जारी होने के बाद लोगों, कंपनियों और संबंधित संगठनों को 30 दिनों तक अपनी राय, सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका मिलेगा। इसके बाद सरकार प्राप्त टिप्पणियों की समीक्षा करेगी और अंतिम नियम को लेकर फैसला लिया जा सकता है।
भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है असर
भारत H-1B वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी देशों में शामिल है। बड़ी संख्या में भारतीय आईटी विशेषज्ञ, इंजीनियर और टेक प्रोफेशनल्स अमेरिकी कंपनियों के लिए काम करते हैं। ऐसे में प्रत्येक आवेदन पर करीब 86-87 लाख रुपये का शुल्क लगने से कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना काफी महंगा हो सकता है। इसका असर खास तौर पर उन भारतीय उम्मीदवारों पर पड़ सकता है, जो अमेरिकी नौकरी बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रहे हैं।
छोटे स्टार्टअप्स के सामने बढ़ सकती है चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रस्तावित फीस का बोझ बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की तुलना में छोटे स्टार्टअप्स और मध्यम आकार की आईटी कंपनियों पर ज्यादा पड़ सकता है। इतनी बड़ी रकम हर H-1B आवेदन पर खर्च करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है। इसके चलते कुछ कंपनियां विदेशी प्रतिभाओं को स्पॉन्सर करने से पीछे हट सकती हैं और भारतीय तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय पेशेवरों के लिए अवसर सीमित हो सकते हैं।
नए नियम को कानूनी चुनौती मिलने की संभावना
इतनी बड़ी फीस को लेकर अमेरिकी अदालतों में कानूनी चुनौती की संभावना भी जताई जा रही है। इमिग्रेशन विशेषज्ञों और कारोबारी संगठनों की ओर से नियम की वैधता पर सवाल उठाए जा सकते हैं। फिलहाल यह शुल्क अंतिम नियम नहीं है और सार्वजनिक टिप्पणी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो अमेरिकी कंपनियों और विदेशी पेशेवरों के बीच H-1B प्रक्रिया पर इसका बड़ा आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।
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