Gwalior Stampede: ग्वालियर के डबरा स्थित नवग्रह पीठ में आयोजित कलश यात्रा के दौरान एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। जहाँ एक ओर श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने पहुँचे थे, वहीं अचानक मची भगदड़ ने उत्सव के माहौल को मातम में बदल दिया। इस हादसे में एक महिला की दर्दनाक मृत्यु हो गई है, जबकि कई अन्य महिलाएं और बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मृतक महिला की पहचान हनुमान कॉलोनी निवासी रति साहू के रूप में हुई है। इस घटना ने क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ा दी है और धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीआईपी आयोजन और प्रशासनिक विफलता
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा द्वारा नवग्रह मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का भव्य आयोजन कराया जा रहा था। आज यानी 10 फरवरी से शुरू होकर यह कार्यक्रम 20 फरवरी तक चलना तय हुआ था। उत्सव के पहले ही दिन कलश स्थापना समारोह के दौरान उमड़ी भारी भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हुआ। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर के वीआईपी आयोजन के लिए जैसी पुख्ता सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था होनी चाहिए थी, वैसी जमीन पर नजर नहीं आई। भगदड़ ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल कर रख दी है।
घायलों की स्थिति और चश्मदीदों का बयान
हादसे के बाद कार्यक्रम स्थल पर चीख-पुकार मच गई। घायलों में वार्ड नंबर 11 की निवासी कला बाथम सहित कई महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। हादसे की एक चश्मदीद और घायल बच्ची प्राची की मां आरती ने बताया कि “भीड़ इतनी अधिक थी कि धक्का लगने के कारण हम सभी एक के ऊपर एक गिरते चले गए। अगर स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे नहीं आते तो हताहतों की संख्या और बढ़ सकती थी।” वर्तमान में घायल बच्ची और अन्य श्रद्धालुओं का अस्पताल में उपचार जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि संकरी जगह पर अत्यधिक भीड़ का दबाव ही इस भीषण हादसे का मुख्य कारण बना।
जिला प्रशासन की सक्रियता और कलेक्टर का दौरा
घटना की सूचना मिलते ही ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने स्थिति का जायजा लिया। वे तुरंत घायलों से मिलने निजी अस्पताल पहुँचीं और उनके उपचार के संबंध में डॉक्टरों को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस हादसे में एक श्रद्धालु महिला की मौत हुई है और एक बच्ची सहित सात लोग घायल हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि महिलाओं में कलश यात्रा को लेकर जरूरत से ज्यादा उत्साह था, जो इस अनियंत्रित स्थिति का एक कारण बना। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि आयोजन स्थल पर क्षमता से अधिक लोग कैसे एकत्रित हुए।
आगामी कार्यक्रमों पर संकट के बादल
नवग्रह पीठ पर होने वाला यह प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम आगामी 20 फरवरी तक प्रस्तावित है। लेकिन पहले ही दिन हुए इस जानलेवा हादसे के बाद आयोजन की सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या अगले नौ दिनों तक चलने वाले कार्यक्रमों में सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जाएंगे? पीड़ित परिवारों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों की मांग है कि इस तरह के बड़े आयोजनों के लिए केवल उत्साह ही काफी नहीं है, बल्कि पुख्ता पुलिस बल और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की मौजूदगी भी अनिवार्य होनी चाहिए।
धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा की चुनौती
ग्वालियर की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बड़े धार्मिक जमावड़ों में जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन और आयोजकों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा निर्दोष श्रद्धालुओं को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा है। फिलहाल, पुलिस मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। रति साहू का परिवार और घायल श्रद्धालु अब न्याय और बेहतर व्यवस्था की उम्मीद कर रहे हैं।









