Greenland Row: ट्रंप के खिलाफ हुई खुद की जनता, 86% अमेरिकियों ने ग्रीनलैंड डील को नकारा

डोनाल्ड ट्रंप भले ही ग्रीनलैंड को खरीदने या उसे सैन्य विकल्प से हथियाने की जिद पर अड़े हों, लेकिन अमेरिका की जनता उनके इस कदम के सख्त खिलाफ है। ताजा सर्वे के अनुसार, 86% अमेरिकी नागरिक इसे गलत मानते हैं। क्या जनता का यह भारी विरोध ट्रंप को पीछे हटने पर मजबूर कर देगा?

Greenland Row

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 19, 2026

Greenland Row: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण करने की महत्वाकांक्षा को खुद उनके ही देश में कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हालिया सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका की लगभग 86 प्रतिशत जनता इस बात के सख्त खिलाफ है कि प्रेजिडेंट ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करें। केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि ट्रंप की अपनी रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर असंतोष देखा जा रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के 70 प्रतिशत समर्थक ग्रीनलैंड पर सैन्य नियंत्रण के पक्ष में नहीं हैं। वेनेजुएला के बाद अब ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की इस नई कूटनीतिक चाल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।

टैरिफ को बनाया हथियार: विरोध करने वाले 8 नाटो देशों पर आर्थिक प्रहार

डोनाल्ड ट्रंप ने उन यूरोपीय देशों को सीधे तौर पर धमकी दी है जो ग्रीनलैंड पर अमेरिकी प्रभुत्व का विरोध कर रहे हैं। ट्रंप ने घोषणा की है कि वह 1 फरवरी से डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, फिनलैंड और ग्रेट ब्रिटेन पर 10 प्रतिशत का टैरिफ (आयात शुल्क) लगाएंगे। गौर करने वाली बात यह है कि ये सभी देश नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) का हिस्सा हैं और अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी रहे हैं। ट्रंप का तर्क है कि ये देश ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास का हिस्सा हैं और अमेरिकी हितों में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि जून तक ग्रीनलैंड की पूर्ण खरीद पर समझौता नहीं हुआ, तो यह टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा।

सर्वे के आंकड़े: रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ही ट्रंप के फैसले के खिलाफ

सीबीएस न्यूज और क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी (Quinnipiac University) द्वारा किए गए अलग-अलग पोल यह दर्शाते हैं कि ट्रंप इस मुद्दे पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए हैं। सर्वे के अनुसार, 95 प्रतिशत डेमोक्रेट्स और 94 प्रतिशत निर्दलीय (Independent) वोटर्स ग्रीनलैंड पर कब्जे के सख्त खिलाफ हैं। यहाँ तक कि रिपब्लिकन पार्टी के केवल 30 प्रतिशत कट्टर समर्थक ही अमेरिकी सेना के ग्रीनलैंड पर कब्जे का समर्थन कर रहे हैं। अधिकांश अमेरिकियों का मानना है कि एक संप्रभु क्षेत्र पर कब्जा करने की कोशिश अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुँचा सकती है और नाटो जैसे महत्वपूर्ण सैन्य गठबंधन को खतरे में डाल सकती है।

नीदरलैंड और ब्रिटेन की तीखी प्रतिक्रिया: ट्रंप की नीति को बताया ‘ब्लैकमेलिंग’

यूरोपीय देशों ने ट्रंप के इस रवैये पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। नीदरलैंड के विदेश मंत्री ने ट्रंप की टैरिफ धमकी को सीधे तौर पर ‘ब्लैकमेलिंग’ करार दिया है। उन्होंने रविवार को एक बयान में कहा कि ग्रीनलैंड जैसे संवेदनशील मुद्दे पर नाटो सहयोगियों को मनाने के लिए इस तरह के हथकंडे कतई मददगार साबित नहीं होंगे। वहीं, फ्रांस और ब्रिटेन ने भी ट्रंप की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए खतरनाक बताया है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त हिस्सा है और इसकी स्थिति को आर्थिक दबाव के जरिए नहीं बदला जा सकता।

ग्रीनलैंड का सामरिक महत्व: क्यों इस द्वीप पर कब्जा चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप?

ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जो सैन्य और प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट के जरिए संकेत दिया है कि वह सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र पर अमेरिकी नियंत्रण चाहते हैं। हालांकि, डेनमार्क ने बार-बार कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है। अब 1 फरवरी की समयसीमा जैसे-जैसे करीब आ रही है, दुनिया भर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नाटो देश ट्रंप के आर्थिक दबाव के आगे झुकेंगे या फिर ट्रांसअटलांटिक रिश्तों में ऐसी दरार आएगी जिसे भरना नामुमकिन होगा।

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