Greece Wildfire Crisis : ग्रीस जंगल आग अभियान में हेलिकॉप्टर टकराए, पायलट की मौत, यूरोप संकट गहराया लगातार

ग्रीस में जंगल की भीषण आग बुझाने के अभियान के दौरान दो हेलिकॉप्टरों की टक्कर ने हालात और गंभीर बना दिए। हादसे में एक पायलट की मौत हो गई, जबकि बचाव अभियान प्रभावित हुआ। यूरोप पहले ही भीषण गर्मी और जंगल की आग से जूझ रहा है। आखिर इस हादसे के पीछे क्या वजह रही और आगे क्या चुनौतियां हैं?

Greece Wildfire Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 2, 2026

Greece Wildfire Crisis : यूरोप के कई देश इन दिनों भीषण जंगल की आग से जूझ रहे हैं। इसी बीच ग्रीस से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। रविवार को राजधानी एथेंस के पश्चिम में स्थित पोर्टो जर्मेनो क्षेत्र में आग बुझाने के अभियान के दौरान दो फायरफाइटिंग हेलिकॉप्टर हवा में आपस में टकरा गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक हेलिकॉप्टर नीचे गिर गया, जबकि दूसरा भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। दोनों हेलिकॉप्टरों में दो-दो चालक दल के सदस्य सवार थे। हादसे के तुरंत बाद ग्रीक दमकल विभाग और बचाव एजेंसियों ने बड़े स्तर पर खोज एवं राहत अभियान शुरू कर दिया।

बेल 214ST हेलिकॉप्टर थे अभियान में तैनात

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त दोनों हेलिकॉप्टर बेल 214ST मॉडल के थे, जिनका उपयोग जंगल की आग पर काबू पाने के लिए किया जा रहा था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि हादसे में एक पायलट की मौत हो गई, जबकि चालक दल के अन्य सदस्य एक घाटी में घायल अवस्था में मिले। बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित निकालकर सेना के अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज जारी है। हालांकि ग्रीक अधिकारियों की ओर से सभी चालक दल के सदस्यों की स्थिति पर आधिकारिक बयान जारी होने का इंतजार है।

भीषण जंगल की आग के बीच राहत अभियान को लगा झटका

यह दुर्घटना ऐसे समय हुई है, जब ग्रीस सहित पूरे यूरोप में जंगल की आग ने गंभीर रूप ले लिया है। ग्रीस, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों में हजारों दमकलकर्मी लगातार आग बुझाने में जुटे हुए हैं। लेकिन भीषण गर्मी, लंबे समय से जारी सूखा और तेज हवाएं राहत कार्य को बेहद चुनौतीपूर्ण बना रही हैं। ऐसे हालात में फायरफाइटिंग हेलिकॉप्टर आग बुझाने के अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। इस हादसे ने राहत कार्य को और कठिन बना दिया है।

ग्रीस के कई इलाकों में तेजी से फैल रही आग

ग्रीस में सबसे चिंताजनक स्थिति पश्चिमी अटिका क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां जंगल की आग तेजी से फैल रही है। आग मेगारा के औद्योगिक क्षेत्र और आसपास की बस्तियों तक पहुंच चुकी है। तेज हवाओं के कारण हेलिकॉप्टरों को समुद्र से पानी भरने और आग पर काबू पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कांडिली, अगिया स्केपी और तुतुली सहित कई इलाकों को खाली करा दिया है। पोर्टो जर्मेनो के तटीय क्षेत्र में शुक्रवार से लगी आग अब पहाड़ी जंगलों तक फैल चुकी है और सैकड़ों लोगों को समुद्र के रास्ते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

प्रधानमंत्री हालात पर रखे हुए हैं नजर

ग्रीस के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई है और सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त संसाधन भेज रहा है। उल्लेखनीय है कि इसी सप्ताह आग बुझाने के दौरान तीन दमकलकर्मियों की भी जान जा चुकी है, जिससे स्पष्ट है कि इस बार की जंगल की आग कितनी विनाशकारी साबित हो रही है।

फ्रांस और स्पेन में भी आग से भारी तबाही

ग्रीस के अलावा फ्रांस और स्पेन भी भीषण जंगल की आग से प्रभावित हैं। फ्रांस में पिछले दस दिनों के दौरान लगी आग ने 420 वर्ग किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र को तबाह कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए कि लगभग 2.24 लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े, जिसे युद्धकाल के बाद देश का सबसे बड़ा नागरिक निकासी अभियान माना जा रहा है। हालांकि आग के फैलाव को फिलहाल रोक लिया गया है, लेकिन हजारों लोग अब भी अपने घर नहीं लौट पाए हैं। राहत कार्य में करीब 3,000 दमकलकर्मी जुटे हुए हैं और कई देशों से अतिरिक्त सहायता भी पहुंच रही है। वहीं दक्षिण-पूर्वी फ्रांस के प्रोवेंस क्षेत्र में भी जंगल की आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी है, जहां हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है। यूरोपीय संघ की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के अनुसार, 1980 के दशक के बाद से यूरोप का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी गति से बढ़ा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, लंबे सूखे और तेज हवाओं ने जंगल की आग की घटनाओं को पहले की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक बना दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में पूरे यूरोप में 10,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र जंगल की आग की चपेट में आया था। वहीं पिछले चार दशकों में वाइल्डफायर की घटनाओं में लगभग 800 लोगों की मौत हो चुकी है। मौजूदा संकट ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन से निपटने और आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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