6 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! HC ने दिया बड़ा फैसला, सर्विस मामले होंगे त्वरित निपटारे के लिए तैयार

इंदौर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों (Service Matters) को लेकर राज्य सरकार को एक बेहद अहम और कड़ा सुझाव दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ट्रांसफर, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और वरिष्ठता जैसे छोटे-छोटे मामलों के लिए कर्मचारियों को अदालत आने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने सरकार को 'इन-हाउस डिस्प्यूट रिसोल्यूशन सिस्टम' (विवाद समाधान प्रणाली) विकसित करने के निर्देश दिए हैं। चीफ सेक्रेटरी को आदेश: 50 हजार मामलों का बोझ होगा कम हाई कोर्ट में वर्तमान में कर्मचारियों से जुड़े 50,000 से अधिक मामले लंबित

Wrriten By :

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Published On :

फ़रवरी 2, 2026

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इंदौर
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों (Service Matters) को लेकर राज्य सरकार को एक बेहद अहम और कड़ा सुझाव दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ट्रांसफर, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और वरिष्ठता जैसे छोटे-छोटे मामलों के लिए कर्मचारियों को अदालत आने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने सरकार को 'इन-हाउस डिस्प्यूट रिसोल्यूशन सिस्टम' (विवाद समाधान प्रणाली) विकसित करने के निर्देश दिए हैं।
चीफ सेक्रेटरी को आदेश: 50 हजार मामलों का बोझ होगा कम
हाई कोर्ट में वर्तमान में कर्मचारियों से जुड़े 50,000 से अधिक मामले लंबित हैं। जस्टिस सराफ ने मंडला के वन रक्षकों की वरिष्ठता से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इस आदेश की प्रति मुख्य सचिव (Chief Secretary) को भेजने के निर्देश दिए हैं।

    याचिकाकर्ता 30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी को अपना आवेदन दें।
    सरकार और संबंधित विभाग इस पर 45 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से फैसला लें।

6 लाख कर्मचारियों के लिए 'राहत' का फॉर्मूला
यदि सरकार इस सुझाव पर अमल करती है, तो प्रदेश के करीब 6 लाख नियमित अधिकारी-कर्मचारियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कोर्ट के सुझाव के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं…

    डेजिग्नेटेड ऑफिसर: हर विभाग में एक नामित अधिकारी हो जो विवादों को सुने।
    निष्पक्षता: पारदर्शिता के लिए जरूरत पड़ने पर रिटायर्ड जिला जजों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं।
    बचत: इससे न केवल अदालतों का बोझ कम होगा, बल्कि सरकार और कर्मचारियों का समय व पैसा भी बचेगा।

'अदालतों में आ गई है सर्विस मामलों की बाढ़'
सुनवाई के दौरान जस्टिस सराफ ने चिंता जताते हुए कहा कि हाई कोर्ट में इन दिनों सर्विस मामलों की बाढ़ आ गई है। उन्होंने कहा, "अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सीधे संवाद की कमी के कारण छोटे-छोटे विवाद भी कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। यह सरकार पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाता है और कर्मचारियों को मानसिक पीड़ा देता है।" कोर्ट का मानना है कि आपसी संवाद और विभागीय स्तर पर सशक्त प्रणाली से अधिकांश केसों का समाधान बिना मुकदमेबाजी के संभव है।

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